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कृष्ण व रुक्मिणी का विवाह देख श्रद्धालु हुए भाव विभोर
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सतहरिया। मुंगराबादशाहपुर के शक्ति पीठ मां काली मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन रविवार को भगवान श्रीकृष्ण व रुक्मिणी का विवाह देख श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। भगवान श्रीकृष्ण के गले में जयमाला पड़ते ही प्रभु की जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा।
इसके पूर्व भगवान श्रीकृष्ण की बारात कस्बे में निकाली गई। भगवान के रथ की आरती उतार कर आयोजक मनोज जायसवाल व उनकी धर्म पत्नी ममता ने बारात को रवाना किया, जो लाई मंडी से निकल कर समूचे नगर में भ्रमण किया। रास्ते में श्रद्धालुओं ने दर्शन व पूजन अर्चन किया। वहीं फूलों की वर्षा भी किया। हरे कृष्ण हरे हरे से कस्बा कृष्ण मय हो गया था। भ्रमण के बाद श्रीकृष्ण रथ बारातियों के संग कथा स्थल पर पहुंचा, जहां पर वृंदावन धाम से आए संत अंकिता नंद महराज ने कन्या पांव पूजन रस्म के साथ विधिवत मंत्रोंच्चारण व सनातन धर्म के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण संग रुक्मिणी का विवाह संपन्न कराया। भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका अंकिता जायसवाल व रुक्मिरणी की भूमिका देव जायसवाल ने निभाई। इसके पहले संत ने भगवान श्रीकृष्ण विवाह सहित विवाह प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि अगर कोई पूर्ण है तो सिर्फ ईश्वर है। भगवान शिव विषपान कर नीलकंठ महादेव हो गए। यह किसी साधारण व्यक्ति के बूते की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि मन इंद्रियों के नियंत्रण कर्ता है। किन्तु एकाग्रता की कमी तथा मन की चंचलता के कारण हम प्रभू मिलन से दूर होते जा रहे हैं। यही मानव जीवन में दु:ख आने का सबसे बड़ा कारण है। इस अवसर पर अनिल, कृष्णा, रीता, रेनू, दीपक, आलोक, अनुस्का, ऋषभ, विमला आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे ।
इसके पूर्व भगवान श्रीकृष्ण की बारात कस्बे में निकाली गई। भगवान के रथ की आरती उतार कर आयोजक मनोज जायसवाल व उनकी धर्म पत्नी ममता ने बारात को रवाना किया, जो लाई मंडी से निकल कर समूचे नगर में भ्रमण किया। रास्ते में श्रद्धालुओं ने दर्शन व पूजन अर्चन किया। वहीं फूलों की वर्षा भी किया। हरे कृष्ण हरे हरे से कस्बा कृष्ण मय हो गया था। भ्रमण के बाद श्रीकृष्ण रथ बारातियों के संग कथा स्थल पर पहुंचा, जहां पर वृंदावन धाम से आए संत अंकिता नंद महराज ने कन्या पांव पूजन रस्म के साथ विधिवत मंत्रोंच्चारण व सनातन धर्म के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण संग रुक्मिणी का विवाह संपन्न कराया। भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका अंकिता जायसवाल व रुक्मिरणी की भूमिका देव जायसवाल ने निभाई। इसके पहले संत ने भगवान श्रीकृष्ण विवाह सहित विवाह प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि अगर कोई पूर्ण है तो सिर्फ ईश्वर है। भगवान शिव विषपान कर नीलकंठ महादेव हो गए। यह किसी साधारण व्यक्ति के बूते की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि मन इंद्रियों के नियंत्रण कर्ता है। किन्तु एकाग्रता की कमी तथा मन की चंचलता के कारण हम प्रभू मिलन से दूर होते जा रहे हैं। यही मानव जीवन में दु:ख आने का सबसे बड़ा कारण है। इस अवसर पर अनिल, कृष्णा, रीता, रेनू, दीपक, आलोक, अनुस्का, ऋषभ, विमला आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे ।
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