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माफिया लेखपालों की बनेगी कुंडली

Thu, 04 Jan 2018 01:01 AM IST
Updated Thu, 04 Jan 2018 01:01 AM IST
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माफिया लेखपालों की बनेगी कुंडली

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जौनपुर। शासनादेश को दरकिनार कर एक ही तहसील में वर्षों से जमे और भू माफिया से साठगांठ करने रखने वाले लेखपालों की कुंडली तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। भाजपा संगठन के पदाधिकारियों की शिकायत पर जिले के प्रभारी प्रमुख सचिव दुग्ध विकास सुधीर एम बोबड़े ने डीएम को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। उस पर अब काम शुरू हो गया है।
नियमानुसार किसी भी पटल पर कोई कर्मचारी लगातार तीन वर्ष ही तैनात रह सकता हैं। यही नहीं सामान्य परिस्थितियों में किसी भी कर्मचारी का एक वर्ष से अधिक समय तक संबद्धीकरण नहीं हो सकता। बावजूद इसके शहर तहसील में 10 वर्ष से अधिक समय से लेखपाल जमे हुए हैं। इसमें चार पांच ऐसे लेखपाल हैं जो बीच-बीच में एक दो साल के लिए अपना स्थानांतरण दूसरे तहसीलों में कराकर फिर वापस लौट आए हैं। इन पर भू-माफियाओं को सह देने का आरोप भी कई बार लग चुका है। कोई भी अधिकारी इन पर हाथ नहीं डालना चाहता। शहर की कई ऐसे विवादित मामले हैं जिसमें परोक्ष और अपरोक्ष रूप से इन माफिया लेखपालों का नाम सामने आया है। और तो और मुख्यमंत्री की रिपोर्ट में भी गलत सूचना देने में संकोच नहीं कर रहे हैं। माफिया लेखपालों की शिकायत भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय, महामंत्री पुष्पराज सिंह, संदीप तिवारी आदि ने दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में आए प्रमुख सचिव दुग्ध विकास एवं जिले के प्रभारी सुधीर एम बोबड़े से किया। भाजपा संगठन के शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव ने ऐसे लेखपालों पर नकेल कसने का निर्देश डीएम को दिया है।
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एक पूर्व मंत्री के करीबी हैं कई लेखपाल
जौनपुर। सपा शासनकाल में एक मंत्री की शह पर कई लेखपालों की तैनाती शहर में की गई है। ऐसे लेखपाल पूर्व के इशारे पर इस समय भी काम कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो ऐसे लेखपाल 10 साल से अधिक समय से तैनात हैं।
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लेखपालों से डरते हैं अफसर
जौनपुर। कुछ लेखपाल ऐसे दबंग है कि उनसे अधिकारी भी डरते हैं। और इनके खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच करते हैं। इनका ट्रांसफर भी पूछकर अधिकारी करते हैं। पूर्व डीएम सर्वज्ञराम मिश्र के कार्यकाल में कई लेखपालों पर कार्रवाई हुई, जिसके बाद लेखपाल आंदोलित हुए लेकिन बाद में समझौता हो गया। मछलीशहर में एक लेखपाल को निलंबित करने के कुछ ही दिन बाद अधिकारियों ने दबाव में बहाल कर दिया।


मामला संज्ञान में आया है। इसे गंभीरता से लेते हुए सभी एसडीएम से इस बारे में वार्ता कर सूची तैयार की जाएगी और शासनादेश का अनुपालन कराया जाएगा।-अरविंद मल्लपा बंगारी, डीएम जौनपुर
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