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दो कुलों को आपस में जोड़ती हैं बेटियां
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:18 AM IST
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जौनपुर। बेटियां समाज की रीढ़ हैं। वे दो परिवारों को जोड़ने का काम करती हैं। स्वस्थ समाज तभी बन सकता है जब महिलाओं को सम्मान मिले। समाज में लिंग असमानता व हिंसा को रोकने के लिए सबसे पहले हमें स्वयं जागरूक होना पड़ेगा। ये बातें गुरुवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के फार्मेसी संस्थान के शोध एवं नवाचार केंद्र में आयोजित बाल विवाह की रोकथाम, लिंग आधारित भेदभाव एवं हिंसा विषयक प्रशिक्षण कार्यशाला में मुख्य अतिथि एनएसएस समन्वयक राकेश यादव ने कहीं।
यूनिसेफ एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अजय द्विवेदी ने कहा कि आज मानसिक परिवर्तन लाने की जरूरत है। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाज से हटाने में युवा बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। इसी क्रम में कार्यक्रम अधिकारी डा. रियाज अहमद ने महिला हिंसा, बाल अधिकार व लिंग भेदभाव के विविध आयामों पर अपनी बात रखी। अध्यक्षीय संबोधन में इंजीनियरिंग संकाय के अध्यक्ष डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि अगर हमारे अंदर एक अच्छा चरित्र विकसित होगा तो लिंग असमानता स्वयं समाप्त हो जाएगी। फार्मेसी संस्थान की शिक्षिका झांसी मिश्रा ने बाल विवाह व महिला सशक्तीकरण पर अनुभवों को सांझा किया। महिला के जीवन की मार्मिक कहानी सुनाई। प्रशिक्षण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने अधिकारों एवं कानूनों की जानकारी दी। संयोजक कार्यक्रम अधिकारी डा. विनय वर्मा ने संचालन किया। प्रशिक्षण कार्यशाला में डा. सुरजीत यादव, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. आशीष गुप्ता, डा. अलोक दास आदि उपस्थित रहे।
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यूनिसेफ एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अजय द्विवेदी ने कहा कि आज मानसिक परिवर्तन लाने की जरूरत है। बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाज से हटाने में युवा बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। इसी क्रम में कार्यक्रम अधिकारी डा. रियाज अहमद ने महिला हिंसा, बाल अधिकार व लिंग भेदभाव के विविध आयामों पर अपनी बात रखी। अध्यक्षीय संबोधन में इंजीनियरिंग संकाय के अध्यक्ष डॉ. एके श्रीवास्तव ने कहा कि अगर हमारे अंदर एक अच्छा चरित्र विकसित होगा तो लिंग असमानता स्वयं समाप्त हो जाएगी। फार्मेसी संस्थान की शिक्षिका झांसी मिश्रा ने बाल विवाह व महिला सशक्तीकरण पर अनुभवों को सांझा किया। महिला के जीवन की मार्मिक कहानी सुनाई। प्रशिक्षण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने अधिकारों एवं कानूनों की जानकारी दी। संयोजक कार्यक्रम अधिकारी डा. विनय वर्मा ने संचालन किया। प्रशिक्षण कार्यशाला में डा. सुरजीत यादव, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. आशीष गुप्ता, डा. अलोक दास आदि उपस्थित रहे।
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