फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   किरन की हार बढ़ा सकती है दो जातियों के बीच खाई!

किरन की हार बढ़ा सकती है दो जातियों के बीच खाई!

Sun, 03 Dec 2017 12:25 AM IST
Updated Sun, 03 Dec 2017 12:25 AM IST
विज्ञापन
किरन की हार बढ़ा सकती है दो जातियों के बीच खाई!
जौनपुर। निकाय चुनाव में नगर पालिका जौनपुर की भाजपा प्रत्याशी किरन श्रीवास्तव की हार को लेकर मंथन शुरू हो गया है। परिणाम पर गौर करें तो इस चुनाव में भाजपा के मुद्दों पर जातीय समीकरण भारी पड़े। हार का दूसरा बड़ा कारण भितरघात बताया जा रहा है। इस बात की भी चर्चा है कि भाजपा की हार से आगामी लोकसभा चुनाव में दो जातियों के बीच खाई बढ़ सकती है। लंबे समय बाद कायस्थ बिरादरी की महिला को पार्टी ने प्रत्याशी बनाया था। भाजपा के कुछ लोग जातीय समीकरणों की वजह से कांग्रेस के पक्ष में अंदरूनी तौर पर प्रचार में लगे थे। यही कारण है कि कांग्रेस प्रत्याशी डा. चित्रलेखा को 11560 मत और भाजपा की किरन श्रीवास्तव को 17516 मत ही मिले । जबकि 39 वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में वोटों को जोड़ें तो तकरीबन 20671 मत पार्टी के खाते में आए। यानी 3155 मतदाताओं ने भाजपा को अध्यक्ष पद में वोट नहीं दिया।
विज्ञापन

जौनपुर नगर पालिका क्षेत्र के 39 वार्डों में मतदाताओं की संख्या 190294 हैं। इसमें 90366 मत पोल हुए थे। प्राप्त मतों पर गौर किया जाए तो बसपा की माया टंडन को 22740, सपा की पूनम मौर्या को 17517, भाजपा की किरन श्रीवास्तव 17516, कांग्रेस की डा. चित्रलेखा सिंह को 11560, कांग्रेस की बागी दीपमाला को 6279, मालती मौर्या को 5960, बसपा की बागी शाहीन को 3588, आम आदमी पार्टी की डा. बीना त्रिपाठी को 1161, शकीला बानो को 1731, खुशनूर बानो को 648, दीपिका तिवारी को 496 मत मिले थे। प्रत्याशियों के प्राप्त मतों पर गौर करें तो भाजपा के ही वोटों में सेंध लगी है। पिछली बार डा. चित्रलेखा सिंह लड़ी थी लेकिन उन्हें इतने वोट नहीं मिले थे। इस बार वह मजबूती से वह लड़ीं और जातीय समीकरणों के हाबी होने की वजह से उन्हें अहमियत मिली। उधर, कायस्थ बिरादरी ने भी भाजपा प्रत्याशी को अहमियत दी। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि चुनाव में पार्टी और विकास नहीं जातीय समीकरण हाबी रहे। इन्हीं समीकरणों को सहेजकर माया टंडन अध्यक्ष का चुनाव जीत गईं। भाजपा का के आधार मत कायस्थ और वैश्य माने जाते हैं। बावजूद इसके जौनपुर में किसी कायस्थ को लोकसभा, विधानसभा में टिकट नहीं मिल पाया। राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए भाजपा ने किरन श्रीवास्तव को टिकट दिया था लेकिन वह कुछ लोगों के सियासी चाल की शिकार हो गईं। इससे कायस्थ बिरादरी के लोग नाराज हैं। इस नाराजगी का खामियाजा भाजपा को लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। नगर पालिका में संध्या रानी श्रीवास्तव के बाद पहली बार किसी कायस्थ महिला को टिकट मिला था।
विज्ञापन

चुनाव से पहले नगर विकास राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव किरन श्रीवास्तव को टिकट दिलाने के पक्ष में नहीं थे। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय किरन श्रीवास्तव को टिकट दिलाने के लिए पूरा जोर लगाए थे। किरन श्रीवास्तव को टिकट मिला और वह मजबूती से चुनाव भी लड़ने लगी लेकिन कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा था। उन्होंने एक ही तीर से दो निशाना साधा। एक तो किरन की हार से जिलाध्यक्ष सुशील उपाध्याय हटाए जा सकते हैं। दूसरा गिरीश यादव पर भी हराने का आरोप लग सकता है। इसी रणनीति के तहत दोनों का कद घटाने के लिए एक मुहिम कुछ लोगों ने शुरू की और इसी मुहिम एवं सियासी चाल का परिणाम है कि भाजपा तीसरे स्थान पर चली गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed