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पुरानी पेंशन योजना के लिए शिक्षकों का प्रदर्शन
Updated Fri, 15 Sep 2017 12:11 AM IST
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जौनपुर। पुरानी पेंशन योजना बहाल किए जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे माध्यमिक शिक्षक संघ नवीन गुट के लोगों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। अपनी मांग से संबंधित प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित 11 सूत्री पत्रक जिलाधिकारी को सौंपा। वक्ताओं ने कहा कि अगर पेंशन योजना शिक्षकों के लिए जरूरी नहीं है तो सांसद और विधायकों की भी पेंशन बंद होनी चाहिए।
माध्यमिक शिक्षक संघ नवीन के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव की अगुवाई में बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक जुलूस की शक्ल में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां पूरे परिसर का भ्रमण कर सरकार विरोधी नारे लगाए। कलेक्ट्रेट में धरना सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने कहा कि एक अप्रैल 2005 से नियुक्त करीब नौ लाख शिक्षक कर्मचारियों और अधिकारियों भविष्य के साथ नाइंसाफी की गई है। पेंशन किसी भी कर्मचारी अधिकारी के बुढ़ापे की लाठी होती है, लेकिन सरकार ने बुढ़ापे की लाठी को ही छीनने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार या तो पुरानी पेंशन योजना को बहाल करे नहीं तो विधायक और सांसदों की भी पेंशन बंद की जाए। इस देश में दोहरी नीति नहीं चलेगी। मंडल अध्यक्ष अजीत चौरसिया ने कहा कि वर्ष 2001 में केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने पेंशन योजना को समाप्त किया था, लेकिन आज भी पश्चिम बंगाल, केरल, त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में पेंशन योजना लागू है। वित्त विहीन महासभा के प्रदेश महासचिव छोटेलाल यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय बंद कर शिक्षक विरोधी नीति पर काम कर रही है। धरना सभा को शैलेंद्र सरोज, राजकेशर यादव, सभापति उपाध्याय, रितेश यादव, डॉ. ओमप्रकाश मौर्य, हौसिला प्रसाद पाल, लालबहादुर यादव, सुनील कुमार आदि ने भी संबोधित किया।
माध्यमिक शिक्षक संघ नवीन के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव की अगुवाई में बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक जुलूस की शक्ल में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां पूरे परिसर का भ्रमण कर सरकार विरोधी नारे लगाए। कलेक्ट्रेट में धरना सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने कहा कि एक अप्रैल 2005 से नियुक्त करीब नौ लाख शिक्षक कर्मचारियों और अधिकारियों भविष्य के साथ नाइंसाफी की गई है। पेंशन किसी भी कर्मचारी अधिकारी के बुढ़ापे की लाठी होती है, लेकिन सरकार ने बुढ़ापे की लाठी को ही छीनने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार या तो पुरानी पेंशन योजना को बहाल करे नहीं तो विधायक और सांसदों की भी पेंशन बंद की जाए। इस देश में दोहरी नीति नहीं चलेगी। मंडल अध्यक्ष अजीत चौरसिया ने कहा कि वर्ष 2001 में केंद्र की तत्कालीन भाजपा सरकार ने पेंशन योजना को समाप्त किया था, लेकिन आज भी पश्चिम बंगाल, केरल, त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में पेंशन योजना लागू है। वित्त विहीन महासभा के प्रदेश महासचिव छोटेलाल यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय बंद कर शिक्षक विरोधी नीति पर काम कर रही है। धरना सभा को शैलेंद्र सरोज, राजकेशर यादव, सभापति उपाध्याय, रितेश यादव, डॉ. ओमप्रकाश मौर्य, हौसिला प्रसाद पाल, लालबहादुर यादव, सुनील कुमार आदि ने भी संबोधित किया।
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