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दूसरे की खुशी के लिए हारना सबसे बड़ी महानता
Updated Fri, 04 Aug 2017 11:52 PM IST
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जौनपुर। प्रबंधन क्षेत्र के अंतर वैयक्तिक संबंधों में जीत का सिद्धांत काफी महत्वपूर्ण है। जब दो व्यक्ति परस्पर संपर्क करते हैं तो चार संभावनाएं बनती हैं। कुछ लोग दूसरों के नुकसान की कीमत पर अपना हित देखना चाहते हैं तो कुछ दूसरों की खुशी के लिए हारना चाहते हैं जो बड़ी महानता है। ये बातें पूर्व प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त गिरीश नारायण पांडेय ने शुक्रवार को पूर्वांचल विश्वविद्यालय विश्वेसरैया सभागार में प्रबंध अध्ययन संस्थान की ओर से आयोजित प्रबंधन में जीत का सिद्धांत विषयक व्याख्यान में कहीं।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में तमाम ऐसे लोग हैं जो दूसरे की ख़ुशी के लिए हमेशा हारना चाहते हैं। सभी को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए। ऐसी शिक्षा जो सार्थक हो, सम्यक व उपयोगी हो जो बच्चे की जिंदगी को बेहतर बनाए। जिम्मेदारी उठाने के काबिल बनाए। आजकल शिक्षा में नकल की प्रवृत्ति फैली र्हुइ है। वह पूरी की पूरी बच्चों की फसल को घुन की तरह बर्बाद कर रही है। इससे बचना और बचाना होगा। हमें आज पर्यावरण की चिंता करनी होगी। हमें आज पर्यावरण सुरक्षा से लेकर नदी, जल संग्रहण और वनस्पतियों पशु-पक्षियों सब की चिंता करने की जरूरत है। कुलपति प्रो. राजा राम यादव ने कहा कि जीवन में सदा सकारात्मक सोच की आदत डालें, विद्वान एवं महापुरुषों के सानिध्य में ज्ञान अर्जित करें। व्यक्तित्व विकास के लिए इन गुणों को अपने अंदर समाहित करने की जरूरत है। संचालन मुराद अली एवं धन्यवाद् ज्ञापन डा. वीडी शर्मा ने किया। इस अवसर पर डा. एके श्रीवास्तव, डा. अजय द्विवेदी, डा. राज कुमार सोनी, डा. संतोष कुमार उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में तमाम ऐसे लोग हैं जो दूसरे की ख़ुशी के लिए हमेशा हारना चाहते हैं। सभी को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए। ऐसी शिक्षा जो सार्थक हो, सम्यक व उपयोगी हो जो बच्चे की जिंदगी को बेहतर बनाए। जिम्मेदारी उठाने के काबिल बनाए। आजकल शिक्षा में नकल की प्रवृत्ति फैली र्हुइ है। वह पूरी की पूरी बच्चों की फसल को घुन की तरह बर्बाद कर रही है। इससे बचना और बचाना होगा। हमें आज पर्यावरण की चिंता करनी होगी। हमें आज पर्यावरण सुरक्षा से लेकर नदी, जल संग्रहण और वनस्पतियों पशु-पक्षियों सब की चिंता करने की जरूरत है। कुलपति प्रो. राजा राम यादव ने कहा कि जीवन में सदा सकारात्मक सोच की आदत डालें, विद्वान एवं महापुरुषों के सानिध्य में ज्ञान अर्जित करें। व्यक्तित्व विकास के लिए इन गुणों को अपने अंदर समाहित करने की जरूरत है। संचालन मुराद अली एवं धन्यवाद् ज्ञापन डा. वीडी शर्मा ने किया। इस अवसर पर डा. एके श्रीवास्तव, डा. अजय द्विवेदी, डा. राज कुमार सोनी, डा. संतोष कुमार उपस्थित रहे।
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