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38 जजों के जिम्मे 1.48 लाख मुकदमे 

Wed, 27 Apr 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर Updated Wed, 27 Apr 2016 12:40 AM IST
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1.48 lac cases depend of 38 Judges
court
न्यायालयों में जजों की कमी और लंबित मुकदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ऐसे ही चिंतित नहीं हैं। हाईकोर्ट ही नहीं लोवर कोर्टों में भी जहां भारी भरकम मुकदमों का बोझ है वहीं कई कोर्ट कई वर्षों से खाली चल रही हैं। ऐसे में उनकी चिंता जायज है। आंकड़ों पर गौर करें तो जौनपुर दीवानी न्यायालय की 38 कोर्टों में सिर्फ 26 में जज हैं। जिला जज समेत 10 कोर्ट में कोई जज नहीं हैं।
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जबकि इन कोर्टों में करीब 148022 मुकदमें लंबित हैं। इनमें कई मुकदमें तो ऐसे हैं जो पिछले 30 से 35 साल पुराने हैं। जौनपुर दीवानी न्यायालय के विभिन्न कोर्ट के पास मुकदमों का बोझ है। विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामले से संबंधित कुल 73070 मुकदमें हैं। जबकि अपराध से संबंधित मुकदमों की संख्या 74950 है। मजिस्ट्रेट कोर्ट में 62393 क्रिमिनल के मुकदमें लंबित हैं।
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फैमिली कोर्ट में कुल 7205 मुकदमें हैं। जिसमें वैवाहिक वाद 2414, भरण पोषण के 2331 मुकदमें हैं।  पास्को के 236, दुष्कर्म के 178, हत्या के 448 मुकदमें अलग अलग कोर्ट में लंबित हैं। इनमें कई मुकदमें ऐसे हैं जो 30 से 35 साल पुराने हैं। भूमि विवाद से संबंधित केराकत के भड़ेहरी का मुकदमा जसई बनाम बेचू 1983 से लंबित है।
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जबकि जलालपुर क्षेत्र के शिवनाथ बनाम जयनाथ 1981, केराकत के रमुंती बनाम बचऊ 1988, केराकत के ही अब्दूल समद बनाम अमीमुल्ला 1988, इजरी मनहन जलालपुर के दुखनी बनाम रामअधार 1982, सदर तहसील क्षेत्र के शंभू बनाम जिला परिषद 1981, सतीश बनाम शंभू 1978, केराकत के रमाशंकर बनाम कालीचरण 1982 से लंबित है। इन सभी मामलों में नोटिस जारी की गई है। अभी सुनवाई शुरू ही नहीं हुई। 
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