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पुलिस की मानवता से युवक व मासूम की जान बची
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उरई/मुहम्मदाबाद। डकोर थाना पुलिस की मानवता से युवक व उसके मासूम बेटे की जान बच गई। सड़क पर पड़े युवक व उसके बेटे को पुलिस कोतवाली ले गई और जानकारी कर उसके रिश्तेदारों को सूचना दी। पुलिस के इस मानवीय कार्य की क्षेत्रीय लोगों ने सराहना की।
डकोर कोतवाल बीएल यादव पुलिस फोर्स के साथ रविवार देर रात 11 बजे उरई राठ मार्ग पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। तभी मुहाना स्थित बेतवा नदी के पुल के पास सड़क पर एक बाइक पड़ी दिखी। वहीं पास में एक युवक अचेत अवस्था में पड़ा और उसका तीन वर्षीय मासूम पुत्र वहीं बैठकर रो रहा था। पुलिस ने किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए ठंड से कंपकंपाते मासूम को गोद में उठाया और अचेत पड़े युवक को गाड़ी में बैठाकर कोतवाली लाए। जहां उसे आग जलाकर तपाया और चाय पिलाई। होश में आने पर युवक ने अपना नाम राजकुमार राजपूत निवासी पनवाड़ी, महोबा बताया। पूछताछ में उसने बताया कि वह नशे की हालत में पुत्र प्रिंस को लेकर घुमाने निकला था और बाइक चलाते चलाते मुहाना तक आ गया। बाइक फिसलकर गिर गई जिससे वह अचेत हो गया। सुबह कोतवाल ने उसके रिश्तेदार मकरेछा निवासी भरत राजपूत को बुलाकर उनके घर पहुंचा दिया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने मानवता दिखाते हुए सड़क पर पड़े मासूम व उसके पिता को उठाया नहीं होता तो ठंड या जंगली जानवरों के हमले से पिता पुत्र के साथ कुछ भी हादसा हो सकता था।
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डकोर कोतवाल बीएल यादव पुलिस फोर्स के साथ रविवार देर रात 11 बजे उरई राठ मार्ग पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। तभी मुहाना स्थित बेतवा नदी के पुल के पास सड़क पर एक बाइक पड़ी दिखी। वहीं पास में एक युवक अचेत अवस्था में पड़ा और उसका तीन वर्षीय मासूम पुत्र वहीं बैठकर रो रहा था। पुलिस ने किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए ठंड से कंपकंपाते मासूम को गोद में उठाया और अचेत पड़े युवक को गाड़ी में बैठाकर कोतवाली लाए। जहां उसे आग जलाकर तपाया और चाय पिलाई। होश में आने पर युवक ने अपना नाम राजकुमार राजपूत निवासी पनवाड़ी, महोबा बताया। पूछताछ में उसने बताया कि वह नशे की हालत में पुत्र प्रिंस को लेकर घुमाने निकला था और बाइक चलाते चलाते मुहाना तक आ गया। बाइक फिसलकर गिर गई जिससे वह अचेत हो गया। सुबह कोतवाल ने उसके रिश्तेदार मकरेछा निवासी भरत राजपूत को बुलाकर उनके घर पहुंचा दिया। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पुलिस ने मानवता दिखाते हुए सड़क पर पड़े मासूम व उसके पिता को उठाया नहीं होता तो ठंड या जंगली जानवरों के हमले से पिता पुत्र के साथ कुछ भी हादसा हो सकता था।
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