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Jalaun News: सर्द माैसम में ठंडी भूमि पर ठिठुर रहे नौनिहाल

Fri, 22 Dec 2023 12:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 22 Dec 2023 12:39 AM IST
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Young children are shivering on the cold ground in the cold season.
कुठौंद। सरकारी विद्यालयों में फर्नीचर नहीं है। नौनिहाल जमीन व टाटपट्टी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। चिकित्सकों की माने तो यह स्थिति बच्चों को कोल्ड डायरिया, निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित कर सकती है।
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बेसिक शिक्षा विभाग के कुठौंद ब्लॉक में 157 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें 12785 बच्चे पढ़ते हैं। ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों की स्थिति सुधारने और फर्नीचर की व्यवस्था को लेकर कई बार जोर दिया जाता रहा है। मौखिक और कागजी तौर पर हुई तैयारी पर धरातल पर अब तक नहीं उतर पाई। ब्लॉकवार स्थिति परखने के लिए कुठौंद संवाद सहयोगी की पड़ताल पर एक रिपोर्ट...
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नीमगांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल विद्यालय की कक्षाओं के लिए फर्नीचर नहीं है। विद्यालय में 91 बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चे जमीन में टाट पट्ट़ी पर बैठकर पढ़ रहे हैं। प्राध्यापक माता प्रसाद ने बताया तीन-चार साल से फर्नीचर की मांग कर रहे हैं। सुनवाई नहीं हो रही। विद्यालय में एक भी टेबल व बेंच नहीं है।
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ब्लॉक के अजीतापुर गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में 208 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें प्राइमरी में 101 बच्चे पंजीकृत हैं। बच्चे सर्दी में फर्श पर बैठकर पढ़ रहे थे। प्राध्यापक राजेंद्र प्रसाद ने बताया बच्चों को फर्नीचर की कमी के चलते जमीन पर बैठाना पड़ रहा है।जूनियर के बच्चों के लिए 2022 में 40 मेज और बेंच बनवाई थी। जूनियर के 107 बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं। प्राइमरी के बच्चों के लिए कई बार फर्नीचर की मांग की, लेकिन नहीं मिला।

जमलापुर में बने प्राथमिक विद्यालय में बच्चे खुले में बैठे थे। जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे। मौसम में ठंडक थी और शीतलहर का असर भी बच्चों पर दिख रहा था। प्राध्यापक शिवम वर्मा ने बताया कि बच्चों के लिए कोई फर्नीचर नहीं है। फर्नीचर की मांग की गई, लेकिन नहीं मिला।


शेखपुर अहीर में कंपोजिट विद्यालय में 218 बच्चे पंजीकृत हैं। पड़ताल में विद्यालय में कुछ बच्चे कमरे में फर्श पर तो कुछ टाट पट्ट़ी पर बैठे मिले। फर्नीचर न होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा था। अध्यापक नंदकिशोर यादव ने बताया कि पहले जो फर्नीचर था, वह टूट गया है। पांच साल से फर्नीचर नहीं आया। लिस्ट में नाम भेजा गया पर अभी आया नहीं है।

अजीतापुर की रहने वालीं रेखा देवी ने बताया बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने की क्षमता नहीं है इसलिए मजबूरन सरकारी स्कूल भेजते हैं। लेकिन सर्दी के मौसम में बच्चों का जमीन पर बैठना बेहद मुश्किल होता है।

अजीतपुर निवासी सुमन देवी ने बताया स्कूल में फर्नीचर न होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कई बार बच्चों की तबीयत बिगड़ जाती है। जुकाम, खांसी की दिक्कतें होती हैं। स्कूल में फर्नीचर होना चाहिए, ऐसे में बच्चे बीमार पड़ जाएंगे।

स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी कुठौंद डॉ. अरुण तिवारी ने बताया कि पांच से दस साल के बच्चों को जमीन कोल्ड डायरिया की शिकायत हो सकती है। सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार की समस्या भी हो सकती है। इनसे बड़े बच्चों में पेट दर्द की समस्या हो सकती है।


खंड शिक्षा अधिकारी नेत्रपाल सिंह का कहना है दो महीने पहले 82 विद्यालयों के लिए फर्नीचर की मांग की गई है। जल्द ही फर्नीचर की व्यवस्था कराई जाएगी।
बीएसए चंद्र प्रकाश ने बताया कि कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों में फर्नीचर की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में बैठक होगी। प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन स्तर पर ही बजट मिलेगा। अभी यह आकलन नहीं किया गया है, कि फर्नीचर पर कितना खर्च आएगा।
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