{"_id":"613657ef8ebc3e0749169d56","slug":"whether-you-believe-it-or-not-the-clock-is-of-two-clocks-ansar-kambari-orai-news-knp650581052","type":"story","status":"publish","title_hn":"तू मान या न मान घड़ी दो घड़ी का है अंसार कंबरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तू मान या न मान घड़ी दो घड़ी का है अंसार कंबरी
विज्ञापन
कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते यज्ञ दत्त त्रिपाठी मौजूद कवि
- फोटो : ORAI
उरई। संवेदना साहित्य समिति के तत्वाधान में स्टेशन रोड स्थित सिटी सेंटर में कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह आयोजित हुआ। संस्था के पदाधिकारियों ने कवियो को सम्मानित किया। कवियों ने अपनी रचनाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर किया। वाणी वंदना समिति की अध्यक्ष डा. माया सिंह माया ने की। इसके बाद कानपुर से आए कवि अंसार कंबरी ने काव्य पाठ करते हुआ पढ़ा कि तू मान या न मान, घड़ी दो घड़ी का है, ये जिस्म का मकान घड़ी दो घड़ी का है। झांसी से आए कवि अर्जुन सिंह चांद ने सुनाया कि रवायत प्यार की अमनो अमा को मिटाने पर तुले है कुछ सिरफिरे।
इसके बाद मंच पर आई कुसुम सिंह अविचल ने कहा काट दिए शीश लाल लहु से रंगी धरा। मुरली मनोहर परिहार ने कहा कि मैं समंदर रहा फिर भी प्यासा रहा। इसके बाद अन्य कवियों ने भी काव्य पाठ किए। कार्यक्रम में काव्य शिरोमणि यज्ञदत्त त्रिपाठी का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजनों से सामाजिक जागरुकता होती है। ऐसे आयोजनों का होना आवश्यक है।
विज्ञापन
इस दौरान कवि प्रेम नारायण, रामशंकर गौड़, संजय शर्मा, जगरुप सिंह, शांति कनौजिया, मानसिंह, लाखन सिंह कुशवाहा, विमला तिवारी आदि मौजूद रहें। कार्यक्रम की अध्यक्षता यज्ञदत्त त्रिपाठी, संचालन अर्जुन सिंह चांद ने किया। संस्था की अध्यक्ष माया सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी ने सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर किया। वाणी वंदना समिति की अध्यक्ष डा. माया सिंह माया ने की। इसके बाद कानपुर से आए कवि अंसार कंबरी ने काव्य पाठ करते हुआ पढ़ा कि तू मान या न मान, घड़ी दो घड़ी का है, ये जिस्म का मकान घड़ी दो घड़ी का है। झांसी से आए कवि अर्जुन सिंह चांद ने सुनाया कि रवायत प्यार की अमनो अमा को मिटाने पर तुले है कुछ सिरफिरे।
विज्ञापन
इसके बाद मंच पर आई कुसुम सिंह अविचल ने कहा काट दिए शीश लाल लहु से रंगी धरा। मुरली मनोहर परिहार ने कहा कि मैं समंदर रहा फिर भी प्यासा रहा। इसके बाद अन्य कवियों ने भी काव्य पाठ किए। कार्यक्रम में काव्य शिरोमणि यज्ञदत्त त्रिपाठी का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजनों से सामाजिक जागरुकता होती है। ऐसे आयोजनों का होना आवश्यक है।
विज्ञापन
इस दौरान कवि प्रेम नारायण, रामशंकर गौड़, संजय शर्मा, जगरुप सिंह, शांति कनौजिया, मानसिंह, लाखन सिंह कुशवाहा, विमला तिवारी आदि मौजूद रहें। कार्यक्रम की अध्यक्षता यज्ञदत्त त्रिपाठी, संचालन अर्जुन सिंह चांद ने किया। संस्था की अध्यक्ष माया सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।