{"_id":"6abeb33ac34ddb6c210d8288","slug":"when-the-game-of-fake-receipts-was-exposed-three-year-old-files-were-scrutinized-orai-news-c-224-1-ori1005-150562-2026-10-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: फर्जी रसीदों का खेल खुला तो खंगाली जाने लगीं तीन साल पुरानी फाइलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: फर्जी रसीदों का खेल खुला तो खंगाली जाने लगीं तीन साल पुरानी फाइलें
विज्ञापन
उरई। बिजली चोरी के मामले में फर्जी रसीद लगाकर मुकदमा निपटाने का मामला सामने आने के बाद बिजली निगम ने अब तीन साल पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। वर्ष 2023 और 2024 की शुरुआत में बिजली चोरी के मामलों में जमा कराई गई रसीदों का विभागीय सॉफ्टवेयर में दर्ज रिकॉर्ड से मिलान कराया जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि कहीं दूसरे मामलों में भी फर्जी रसीदों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया। जांच के दौरान तत्कालीन अधिशासी अभियंता के नाम से जारी पत्र पर मौजूद हस्ताक्षर भी सवालों के घेरे में हैं।
बुधवार को सामने आए मामले में करीब 39 हजार रुपये जमा करने के दावे के आधार पर बिजली चोरी के मुकदमे के निस्तारण की संस्तुति की गई थी। बिजली थाने से भी एफआर लगा दी गई थी। मामला न्यायालय पहुंचने पर रसीदों की जांच हुई तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया। ईसी एक्ट कोर्ट ने एफआर खारिज कर मुकदमा चलाने के आदेश दिए। इसके बाद बिजली निगम के अधिकारियों ने पुराने मामलों के रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। खास बात यह है कि जिन मामलों के रिकॉर्ड अब खंगाले जा रहे हैं, उस समय तैनात अधीक्षण अभियंता से लेकर उपखंड अधिकारी तक कोई भी अधिकारी अब जिले में नहीं है। यानी मौजूदा अधिकारियों के पास उस समय की कार्यप्रणाली की जानकारी लेने के लिए संबंधित अधिकारी भी मौजूद नहीं हैं। ऐसे में विभागीय सॉफ्टवेयर और पुराने दस्तावेज ही जांच का मुख्य आधार बने हैं।
फर्जी रसीदों के मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता के नाम से मौजूद पत्र पर किए गए हस्ताक्षर भी संदेह के घेरे में हैं। विभागीय कर्मचारियों के अनुसार पत्र पर मौजूद हस्ताक्षर तत्कालीन अधिकारी के वास्तविक हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते। हालांकि दस्तावेज पर विभागीय कार्यालय की मोहर का इस्तेमाल किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्यालय की मुहर किसके पास थी और उसका इस्तेमाल किसने किया।
विज्ञापन
22 संविदा कर्मचारियों में अब छह ही बचे
जिस समय यह मामला सामने आए रिकॉर्ड से जुड़ा है, उस दौरान उप्र सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से बिजली विभाग में 22 संविदा कर्मचारियों को लगाया गया था। वर्तमान में इनमें सिर्फ छह कर्मचारी ही बचे हैं। बाकी कर्मचारी अलग-अलग कारणों से विभाग से हट चुके हैं। ऐसे में पुराने मामलों में किस स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई, इसकी जानकारी जुटाना भी विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
पुरानी शिकायतों की भी खुलेगी फाइल
विभाग अब उस दौरान संविदा कर्मचारियों के खिलाफ की गई शिकायतों का रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है। अधिकारियों की कोशिश है कि उस समय शिकायतों में किन कर्मचारियों के नाम सामने आए थे और उन पर क्या कार्रवाई हुई थी, इसका मिलान पुराने बिजली चोरी के मामलों से किया जा सके। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगते रहे, पर उन्हें क्लीन चिट भी मिलती रही।
सॉफ्टवेयर से होगा रसीदों का मिलान
जांच में बिजली चोरी के मामलों में जमा धनराशि, रसीद संख्या, उपभोक्ता का विवरण और मुकदमे के निस्तारण से संबंधित रिकॉर्ड का विभागीय सॉफ्टवेयर से मिलान किया जा रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश है कि जिन रसीदों के आधार पर भुगतान और मुकदमे के निस्तारण का दावा किया गया, उनका वास्तविक रिकॉर्ड विभागीय सिस्टम में दर्ज है या नहीं। इस पड़ताल के बाद ही पता चलेगा कि फर्जी रसीद का मामला एक प्रकरण तक सीमित है या पुराने मामलों में भी ऐसी गड़बड़ी हुई है।
-- -- -- --
वर्जन
पुराना मामला है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जिन लोगों के पास ऐसे प्रमाण हैं, वे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- योगेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता
नोट: जिले के उपभोक्ता अगर उनके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है, तो वह 9548521724 नंबर पर कोई भी जानकारी दे सकते हैं।
विज्ञापन
बुधवार को सामने आए मामले में करीब 39 हजार रुपये जमा करने के दावे के आधार पर बिजली चोरी के मुकदमे के निस्तारण की संस्तुति की गई थी। बिजली थाने से भी एफआर लगा दी गई थी। मामला न्यायालय पहुंचने पर रसीदों की जांच हुई तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया। ईसी एक्ट कोर्ट ने एफआर खारिज कर मुकदमा चलाने के आदेश दिए। इसके बाद बिजली निगम के अधिकारियों ने पुराने मामलों के रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। खास बात यह है कि जिन मामलों के रिकॉर्ड अब खंगाले जा रहे हैं, उस समय तैनात अधीक्षण अभियंता से लेकर उपखंड अधिकारी तक कोई भी अधिकारी अब जिले में नहीं है। यानी मौजूदा अधिकारियों के पास उस समय की कार्यप्रणाली की जानकारी लेने के लिए संबंधित अधिकारी भी मौजूद नहीं हैं। ऐसे में विभागीय सॉफ्टवेयर और पुराने दस्तावेज ही जांच का मुख्य आधार बने हैं।
विज्ञापन
फर्जी रसीदों के मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता के नाम से मौजूद पत्र पर किए गए हस्ताक्षर भी संदेह के घेरे में हैं। विभागीय कर्मचारियों के अनुसार पत्र पर मौजूद हस्ताक्षर तत्कालीन अधिकारी के वास्तविक हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते। हालांकि दस्तावेज पर विभागीय कार्यालय की मोहर का इस्तेमाल किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्यालय की मुहर किसके पास थी और उसका इस्तेमाल किसने किया।
विज्ञापन
22 संविदा कर्मचारियों में अब छह ही बचे
जिस समय यह मामला सामने आए रिकॉर्ड से जुड़ा है, उस दौरान उप्र सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से बिजली विभाग में 22 संविदा कर्मचारियों को लगाया गया था। वर्तमान में इनमें सिर्फ छह कर्मचारी ही बचे हैं। बाकी कर्मचारी अलग-अलग कारणों से विभाग से हट चुके हैं। ऐसे में पुराने मामलों में किस स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई, इसकी जानकारी जुटाना भी विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
पुरानी शिकायतों की भी खुलेगी फाइल
विभाग अब उस दौरान संविदा कर्मचारियों के खिलाफ की गई शिकायतों का रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है। अधिकारियों की कोशिश है कि उस समय शिकायतों में किन कर्मचारियों के नाम सामने आए थे और उन पर क्या कार्रवाई हुई थी, इसका मिलान पुराने बिजली चोरी के मामलों से किया जा सके। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगते रहे, पर उन्हें क्लीन चिट भी मिलती रही।
सॉफ्टवेयर से होगा रसीदों का मिलान
जांच में बिजली चोरी के मामलों में जमा धनराशि, रसीद संख्या, उपभोक्ता का विवरण और मुकदमे के निस्तारण से संबंधित रिकॉर्ड का विभागीय सॉफ्टवेयर से मिलान किया जा रहा है। इससे यह पता लगाने की कोशिश है कि जिन रसीदों के आधार पर भुगतान और मुकदमे के निस्तारण का दावा किया गया, उनका वास्तविक रिकॉर्ड विभागीय सिस्टम में दर्ज है या नहीं। इस पड़ताल के बाद ही पता चलेगा कि फर्जी रसीद का मामला एक प्रकरण तक सीमित है या पुराने मामलों में भी ऐसी गड़बड़ी हुई है।
वर्जन
पुराना मामला है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जिन लोगों के पास ऐसे प्रमाण हैं, वे शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- योगेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता
नोट: जिले के उपभोक्ता अगर उनके साथ फर्जीवाड़ा हुआ है, तो वह 9548521724 नंबर पर कोई भी जानकारी दे सकते हैं।