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दान करते समय अहंकार न करें-सुभाष देव
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 20 May 2016 11:26 PM IST
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कथा श्रवण करते श्रोता।
- फोटो : अमर उजाला
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विकास खंड नदीगांव के बीहड़ी गांव रूपपुरा में गौड़ बाबा के स्थान पर श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के दौरान कानपुर से पधारे विद्वान संत स्वामी सुभाष देव ने व्यास पीठ से कथामृत का पान कराया। कहा, भगवान तो भक्त के वश में होते हैं और इस धरा धाम पर प्रभु का अवतरण बड़े ही आनंद का विषय है। राजा बलि भगवान में पूर्ण आसक्त था और भगवान ने उसके यहां
पहरेदारी करना भी स्वीकार किया। कथावाचक ने परमात्मा के विभिन्न अवतारों की कथाएं बड़े ही सुरुचिपूर्ण ढंग से सुनाईं। कथा व्यास ने कहा कि प्रभु चरणों में अनुराग और निष्ठा के ही प्रभाव से प्रह्लाद जैसे भक्त के कष्ट दूर करने के लिए भगवान ने स्तंभ से प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। उनके पिता अत्याचारी हिरण्यकश्यप को मोक्ष प्रदान किया। दैत्यों का राजा बलि
एक महान दानवीर था किंतु इसका उसे बहुत ही अहंकार हो गया। तब अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए भगवान नारायण ने वामन रूप धारण किया और उन्होंने बलि से तीन पग पृथ्वी दान में मांग ली। राजा बलि से भगवान इतने प्रसन्न हुए कि उसके यहां पहरेदारी करना भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। कथा व्यास कहते हैं कि व्यक्ति को दान करते समय अहंकार
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का भाव नहीं रखना चाहिए। उन्होंने राम जन्म का हेतु और उनके प्राकट्य का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया। कृष्णावतार का विस्तार से वर्णन किया और जैसे ही भगवान वासुदेव अवतरित होते हैं, गोलों और हर्षध्वनि से पंडाल गूंज उठता है, महिलाओं ने बधाइयां गाईं। कथा व्यास कहते हैं कि भगवान का अवतार भक्तों के लिए होता है, दुष्टों के लिए भगवान अवतार नहीं लेते।
दुष्टों का अंत तो उनकी दुष्टता के कारण ही हो जाता है। बीच बीच में भजनों ने श्रोताओं को आनंदित किया जबकि तबले पर श्याम छानी, ऑरगन पर अत्री क्योलारी संगत कर रहे थे।
परीक्षित मंगल मुखरैया सामी ने भागवतजी की आरती उतारी। भागवत पाठ दीपेश तिवारी कर रहे हैं जबकि शशिभूषण व्यवस्था की देखरेख में लगे हैं। राजेश शर्मा सामी, गुलाबी गिरोह की शीर्ष कमांडर अंजू शर्मा आदि मौजूद रहे।
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पहरेदारी करना भी स्वीकार किया। कथावाचक ने परमात्मा के विभिन्न अवतारों की कथाएं बड़े ही सुरुचिपूर्ण ढंग से सुनाईं। कथा व्यास ने कहा कि प्रभु चरणों में अनुराग और निष्ठा के ही प्रभाव से प्रह्लाद जैसे भक्त के कष्ट दूर करने के लिए भगवान ने स्तंभ से प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए। उनके पिता अत्याचारी हिरण्यकश्यप को मोक्ष प्रदान किया। दैत्यों का राजा बलि
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एक महान दानवीर था किंतु इसका उसे बहुत ही अहंकार हो गया। तब अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए भगवान नारायण ने वामन रूप धारण किया और उन्होंने बलि से तीन पग पृथ्वी दान में मांग ली। राजा बलि से भगवान इतने प्रसन्न हुए कि उसके यहां पहरेदारी करना भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। कथा व्यास कहते हैं कि व्यक्ति को दान करते समय अहंकार
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का भाव नहीं रखना चाहिए। उन्होंने राम जन्म का हेतु और उनके प्राकट्य का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया। कृष्णावतार का विस्तार से वर्णन किया और जैसे ही भगवान वासुदेव अवतरित होते हैं, गोलों और हर्षध्वनि से पंडाल गूंज उठता है, महिलाओं ने बधाइयां गाईं। कथा व्यास कहते हैं कि भगवान का अवतार भक्तों के लिए होता है, दुष्टों के लिए भगवान अवतार नहीं लेते।
दुष्टों का अंत तो उनकी दुष्टता के कारण ही हो जाता है। बीच बीच में भजनों ने श्रोताओं को आनंदित किया जबकि तबले पर श्याम छानी, ऑरगन पर अत्री क्योलारी संगत कर रहे थे।
परीक्षित मंगल मुखरैया सामी ने भागवतजी की आरती उतारी। भागवत पाठ दीपेश तिवारी कर रहे हैं जबकि शशिभूषण व्यवस्था की देखरेख में लगे हैं। राजेश शर्मा सामी, गुलाबी गिरोह की शीर्ष कमांडर अंजू शर्मा आदि मौजूद रहे।