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Jalaun News: 50 हजार हेक्टेयर में पानी भरा, रबी की बोआई पर संकट

Mon, 19 Oct 2026 01:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 01:33 AM IST
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Waterlogging across 50,000 hectares; Rabi sowing at risk
फोटो- 10 अजीज खान, किसान
उरई/मुहम्मदाबाद। जिले में करीब 50 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में पानी भरा होने से रबी की बोआई पर संकट खड़ा हो गया है। 15 अक्टूबर से हरी मटर की बोआई शुरू हो जाती है। इसके साथ ही किसान मसूर, चना समेत अन्य दलहनी फसलों की बोआई की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन खेतों में जलभराव के कारण किसान खेत तैयार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में बोआई पिछड़ने और पैदावार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
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पिछले महीने हुई लगातार बारिश का असर अब रबी की खेती पर दिखाई देने लगा है। जिले के डकोर, महेवा, जालौन, माधौगढ़ व कोंच सहित कई क्षेत्रों में खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है। जिन खेतों में हरी मटर की बोआई हो जानी चाहिए थी, वहां किसान पानी निकलने का इंतजार कर रहे हैं। खेतों में नमी अधिक होने से जुताई करना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं, मसूर और चना की बोआई की तैयारी कर रहे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।
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किसान राहुप खान, जैनुलाब्दीन, शशि राजपूत, लखन राजपूत, मुवीन खान, रमेश और राधेलाल का कहना है कि खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसान कर्ज लेकर खाद और बीज खरीदते हैं, लेकिन समय पर बोआई न होने और फसल खराब होने से लागत तक नहीं निकल पाती।
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किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेतों से पानी निकालकर समय पर बोआई करने की है। कई किसान पंपसेट लगाकर पानी निकाल रहे हैं, लेकिन इसमें डीजल और मजदूरी पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। इसके बावजूद खेतों से पानी पूरी तरह निकलने में समय लग रहा है। बोआई में देरी होने से फसलों की बढ़वार और पैदावार पर असर पड़ने की आशंका है। इससे किसानों की लागत बढ़ने के साथ आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।
मौसम वैज्ञानिक विस्टर जोशी का कहना है कि खेतों में जलभराव होने से रबी की फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है। हरी मटर की बुवाई शुरू हो चुकी है, जबकि मसूर और चना की बुवाई की तैयारी भी किसान कर रहे हैं। खेतों से पानी निकलने के बाद ही बुवाई के लिए अनुकूल स्थिति बनेगी। किसानों को चाहिए कि खेतों की नमी और मौसम की स्थिति को देखते हुए बुवाई करें, ताकि बीज का अंकुरण प्रभावित न हो।

हर साल जलभराव से जूझते हैं किसान

किसानों का कहना है कि बारिश के दौरान खेतों में पानी भरने के बाद उसकी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है। पानी लंबे समय तक भरा रहने से खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचता है और रबी की बोआई भी प्रभावित होती है। किसानों ने जलनिकासी के लिए स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि खेत समय पर तैयार हो सकें और मटर, मसूर व चना की बोआई में देरी न हो।

बोले किसान
फोटो - 09 लखन राजपूत।
पंपसेट लगाकर निकाल रहे खेतों से पानी
किसान लखन राजपूत ने बताया कि खेतों में इतना पानी भरा है कि लगातार एक सप्ताह पंपसेट चलाने के बाद भी पूरी तरह निकासी होना मुश्किल है। इस बार रबी की बोआई कम से कम 15 दिन पिछड़ने की आशंका है। इससे फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।


फोटो- 10 अजीज खान, किसान
कर्ज लेकर खेती कर रहे किसान, लागत निकालना भी मुश्किल
किसान अजीज खान ने बताया कि हर साल बारिश के दौरान खेतों में जलभराव से खेती प्रभावित होती है। किसान कर्ज लेकर खाद और बीज खरीदते हैं, लेकिन समय पर बोआई नहीं होने से पैदावार घटने का खतरा रहता है।

फोटो- 10 अजीज खान, किसान

फोटो- 10 अजीज खान, किसान

फोटो- 10 अजीज खान, किसान

फोटो- 10 अजीज खान, किसान

फोटो- 10 अजीज खान, किसान

फोटो- 10 अजीज खान, किसान

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