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टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी, सिंचाई के लिए किसान परेशान
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वीरेंद्र सिंह
- फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद (जालौन)। नहरों की सिल्ट सफाई न होने से डकोर क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ा रहा है। नहरों में खरपतवार और अतिक्रमण की वजह से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इससे क्षेत्र में गेहूं की फसलों में सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों में आक्रोश है। किसानों का कहना है कि कई बार नहर विभाग से सिल्ट सफाई करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी ने भी सुध नहीं ली।
क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से करीब तीन दशक पहले बेतवा केनाल से निकली 18 किमी लंबी नहर का निर्माण कराया गया था। जिससे उस दौरान किसानों के मन में आस जगी थी कि अब उन्हें सिंचाई की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से इस नहर का लाभ क्षेत्र के किसानों को कुछ समय बाद ही मिलना बंद हो गया। सालों से नहर की सफाई न होने से किसानों को सिंचाई के लिए भटकना पड़ रहा है, जबकि कई बार किसान नगर सफाई की मांग कर चुके है।
इस नहर पर डकोर, टिमरो, चिल्ली, कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद, कुठौंदा आदि दर्जनों गांव की सिंचाई पूर्णता निर्भर है। खरपतवार व अतिक्रमण के कारण इस माइनर का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। अतिक्रमण व खरपतवार के चलते इस माइनर का पानी कभी भी टेल तक नहीं पहुंच रहा है। इससे गेहूं की सिंचाई करने वाले आधा दर्जन गांवों के सामने पानी का संकट बना रहता है। इस क्षेत्र के किसान महंगे डीजल तथा निजी पंपों से पानी खरीदकर खेतों की सिंचाई करने को मजदूर है। जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही नहरों की सफाई न कराई गई तो वह सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।
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किसानों पर पड़ रही दोहरी मार
मुहम्मदाबाद निवासी न्यामत उल्ला का कहा कि माइनर के नाम पर लगान तो सरकार ले रही है, लेकिन इस माइनर में टेल तक पानी नहीं पहुंचता है। इससे किसान को लगान के साथ-साथ निजी खर्च भी करना पड़ता है।
संसाधन के अभाव में करते हैं पारंपरिक खेती
किसान लला राजपूत ने बताया कि पानी के अभाव में किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर नई तकनीक पर आधारित खेती नहीं कर पा रहे हैं। संबंधित उच्चाधिकारियों को अवगत भी कराया पर आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला।
फुलगेज से चलें नहरें तो मिले पानी
किसान पूरन वर्मा का कहना है कि नहरों को दोबारा शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन फुल गेज से पानी न आने से किसानों को सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
ऊपरी क्षेत्रों से हटाए जाएं बंधा
किसान वीरेंद्र सिंह का कहना है कि जैसे-तैसे नहर का पानी क्षेत्र में पहुंचता है, लेकिन जैसे ही क्षेत्र में पानी पहुंचता है ऊपरी क्षेत्र में पड़ने वाले किसान नहर में बंधा बनाकर पानी रोक लेते हैं।
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क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से करीब तीन दशक पहले बेतवा केनाल से निकली 18 किमी लंबी नहर का निर्माण कराया गया था। जिससे उस दौरान किसानों के मन में आस जगी थी कि अब उन्हें सिंचाई की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी से इस नहर का लाभ क्षेत्र के किसानों को कुछ समय बाद ही मिलना बंद हो गया। सालों से नहर की सफाई न होने से किसानों को सिंचाई के लिए भटकना पड़ रहा है, जबकि कई बार किसान नगर सफाई की मांग कर चुके है।
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इस नहर पर डकोर, टिमरो, चिल्ली, कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद, कुठौंदा आदि दर्जनों गांव की सिंचाई पूर्णता निर्भर है। खरपतवार व अतिक्रमण के कारण इस माइनर का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। अतिक्रमण व खरपतवार के चलते इस माइनर का पानी कभी भी टेल तक नहीं पहुंच रहा है। इससे गेहूं की सिंचाई करने वाले आधा दर्जन गांवों के सामने पानी का संकट बना रहता है। इस क्षेत्र के किसान महंगे डीजल तथा निजी पंपों से पानी खरीदकर खेतों की सिंचाई करने को मजदूर है। जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है किसानों का कहना है कि अगर जल्द ही नहरों की सफाई न कराई गई तो वह सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।
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किसानों पर पड़ रही दोहरी मार
मुहम्मदाबाद निवासी न्यामत उल्ला का कहा कि माइनर के नाम पर लगान तो सरकार ले रही है, लेकिन इस माइनर में टेल तक पानी नहीं पहुंचता है। इससे किसान को लगान के साथ-साथ निजी खर्च भी करना पड़ता है।
संसाधन के अभाव में करते हैं पारंपरिक खेती
किसान लला राजपूत ने बताया कि पानी के अभाव में किसान पारंपरिक खेती को छोड़कर नई तकनीक पर आधारित खेती नहीं कर पा रहे हैं। संबंधित उच्चाधिकारियों को अवगत भी कराया पर आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला।
फुलगेज से चलें नहरें तो मिले पानी
किसान पूरन वर्मा का कहना है कि नहरों को दोबारा शुरू हुए एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन फुल गेज से पानी न आने से किसानों को सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
ऊपरी क्षेत्रों से हटाए जाएं बंधा
किसान वीरेंद्र सिंह का कहना है कि जैसे-तैसे नहर का पानी क्षेत्र में पहुंचता है, लेकिन जैसे ही क्षेत्र में पानी पहुंचता है ऊपरी क्षेत्र में पड़ने वाले किसान नहर में बंधा बनाकर पानी रोक लेते हैं।

लला राजपूत- फोटो : ORAI

पूरन वर्मा- फोटो : ORAI

किसान नियामत उल्ला- फोटो : ORAI

उरई टिमरो माइनर सूखा पड़ा- फोटो : ORAI

गेहूं की सूखी फसल दिखाता किसान- फोटो : ORAI