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मतदान ड्यूटी नहीं, मरीजों की सेवा करेंगे डॉक्टर, नर्स
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:00 PM IST
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निर्वाचन कार्यालय में ड्यूटी संबंधित कार्य करते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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इस मर्तबा चुनाव आयोग ने ऐसे डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को चुनाव ड्यूटी से दूर रखने का फैसला किया है, जिनकी ड्यूटी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल में लगी है। इसके अलावा चुनाव ड्यूटी से वन विभाग के अफसरों को भी राहत दी जाएगी। दूसरी ओर जिला निर्वाचन कार्यालय में ड्यूटी संबंधी पत्र विभागों को भेजने का काम भी शुरू हो गया है। सहायक जिला
निर्वाचन अधिकारी आलोक यादव का कहना है कि आयोग की ओर से जारी गाइड लाइन के आधार पर ही ड्यूटी लगाई और हटाई जाएगी। नई गाइड लाइन के मुताबिक जिले के सरकारी अस्पतालों और सीएचसी, पीएचसी में जिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी मरीजों की देखभाल में लगी है, उन्हें बहुत ही इमरजेंसी में चुनाव ड्यूटी पर लिया जाएगा। अधिकारियों की
मानें तो ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि मतदान की वजह से अस्पतालों के मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। उन पर प्राइवेट अस्पतालों के मंहगे खर्च का बोझ न पड़ सके। इसके अलावा दूरदर्शन, आकाशवाणी, बीएसएनएल. खाद्य निगम के अधिकारी, पशु अस्पताल के डॉक्टर कंपाउडर भी चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखे जा सकते हैं।
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जिनका रिटायरमेंट जल्द, उन्हें भी राहत
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति में 6 माह अथवा उससे कम का समय बाकी है, उनकी भी ड्यूटी इस मर्तबा नहीं लगाई जाएगी। इससे उम्र दराज अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चुनावी भागदौड़ से राहत मिलेगी।
दिव्यांगों से पूछकर लगेगी ड्यूटी
दिव्यांग कर्मियों की ड्यूटी लगाने से पहले उनसे राय मशविरा भी किया जाएगा, कि ड्यूटी वाले स्थान पर उन्हें किसी तरह की शारीरिक दिक्कत तो नहीं है। इसके बाद ही उन्हें ड्यूटी चार्ट थमाया जाएगा।
महिलाओं को भी मिलेगी सहूलियत
गर्भवती महिलाओं अथवा दुधमुंहे बच्चों की माताओं (मातृत्व अवकाश) के लिए गाइड लाइन में कोई फेरबदल नहीं है। उन्हें इस मर्तबा भी चुनावी ड्यूटी से दूर ही रखा जाएगा। इसके अलावा महिला कर्मियों की शहरी क्षेत्र में ही ड्यूटी लगाने का प्रयास किया जाएगा।
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निर्वाचन अधिकारी आलोक यादव का कहना है कि आयोग की ओर से जारी गाइड लाइन के आधार पर ही ड्यूटी लगाई और हटाई जाएगी। नई गाइड लाइन के मुताबिक जिले के सरकारी अस्पतालों और सीएचसी, पीएचसी में जिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी मरीजों की देखभाल में लगी है, उन्हें बहुत ही इमरजेंसी में चुनाव ड्यूटी पर लिया जाएगा। अधिकारियों की
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मानें तो ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि मतदान की वजह से अस्पतालों के मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े। उन पर प्राइवेट अस्पतालों के मंहगे खर्च का बोझ न पड़ सके। इसके अलावा दूरदर्शन, आकाशवाणी, बीएसएनएल. खाद्य निगम के अधिकारी, पशु अस्पताल के डॉक्टर कंपाउडर भी चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखे जा सकते हैं।
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जिनका रिटायरमेंट जल्द, उन्हें भी राहत
जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति में 6 माह अथवा उससे कम का समय बाकी है, उनकी भी ड्यूटी इस मर्तबा नहीं लगाई जाएगी। इससे उम्र दराज अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चुनावी भागदौड़ से राहत मिलेगी।
दिव्यांगों से पूछकर लगेगी ड्यूटी
दिव्यांग कर्मियों की ड्यूटी लगाने से पहले उनसे राय मशविरा भी किया जाएगा, कि ड्यूटी वाले स्थान पर उन्हें किसी तरह की शारीरिक दिक्कत तो नहीं है। इसके बाद ही उन्हें ड्यूटी चार्ट थमाया जाएगा।
महिलाओं को भी मिलेगी सहूलियत
गर्भवती महिलाओं अथवा दुधमुंहे बच्चों की माताओं (मातृत्व अवकाश) के लिए गाइड लाइन में कोई फेरबदल नहीं है। उन्हें इस मर्तबा भी चुनावी ड्यूटी से दूर ही रखा जाएगा। इसके अलावा महिला कर्मियों की शहरी क्षेत्र में ही ड्यूटी लगाने का प्रयास किया जाएगा।