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रामलला मंदिर प्रशासन ने पर्यटन विभाग की टीम को लौटाया
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कोंच। महारानी लक्ष्मीबाई के गुरुद्वारे कोंच के ऐतिहासिक रामलला मंदिर परिक्षेत्र में सौंदर्यीकरण की संभावनाएं तलाशने आए यूपीपीसीएल के आर्किटेक्ट को मंदिर प्रशासन ने लौटा दिया। दो टूक कहा कि उन्हें सरकारी धन से परिक्षेत्र का सुंदरीकरण कराया जाना मंजूर नहीं है। ऐतिहासिक महत्व के इस मंदिर को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने और इसका सौंदर्यीकरण कराए जाने का प्रस्ताव झांसी-जालौन-ललितपुर निकाय क्षेत्र से सपा की एमएलसी रमा आरपी निरंजन ने शासन में दिया था, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के लिए यूपीपीसीएल के आर्किटेक्ट को भेजा गया था। बता दें कि मंदिर के पुराने निर्माण की जीर्णशीर्ण हालत को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने पुरानी इमारत ध्वस्त कराकर नव निर्माण शुरू कराया है।
कोंच का अति प्राचीन बुंदेलखंड की गौरव रानी झांसी लक्ष्मीबाई के गुरुद्वारे के रूप में विख्यात रामलला मंदिर यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गतिविधियां भी यहां से संचालित रहने की बात इतिहासविदों द्वारा कही जाती रही है। सपा एमएलसी रमा आरपी निरंजन ने इलाकाई लोगों की मांग पर शासन में प्रस्ताव दिया था कि इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाए। ताकि इसके बारे में देश विदेश के लोग भी जान सकें। एमएलसी के इस प्रस्ताव को शासन ने पर्यटन विभाग को भेजा है। पर्यटन विभाग द्वारा नामित संस्था यूपीपीसीएल के आर्किटेक्ट की टीम शुक्रवार को कोंच आई और मंदिर की पूरी लोकेशन देखी। टीम में आर्किटेक्ट अभय राजन, सुभाष सिंह, अमन कुमार शामिल थे। इसी बीच मंदिर के एकादश गद्दीधर महंत रघुनाथ दास ने दो टूक कह दिया कि सरकारी धन से सुंदरीकरण उन्हें स्वीकार नहीं है। इसके बाद टीम बिना किसी नापजोख के वापस लौट गई।
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कोंच का अति प्राचीन बुंदेलखंड की गौरव रानी झांसी लक्ष्मीबाई के गुरुद्वारे के रूप में विख्यात रामलला मंदिर यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गतिविधियां भी यहां से संचालित रहने की बात इतिहासविदों द्वारा कही जाती रही है। सपा एमएलसी रमा आरपी निरंजन ने इलाकाई लोगों की मांग पर शासन में प्रस्ताव दिया था कि इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाए। ताकि इसके बारे में देश विदेश के लोग भी जान सकें। एमएलसी के इस प्रस्ताव को शासन ने पर्यटन विभाग को भेजा है। पर्यटन विभाग द्वारा नामित संस्था यूपीपीसीएल के आर्किटेक्ट की टीम शुक्रवार को कोंच आई और मंदिर की पूरी लोकेशन देखी। टीम में आर्किटेक्ट अभय राजन, सुभाष सिंह, अमन कुमार शामिल थे। इसी बीच मंदिर के एकादश गद्दीधर महंत रघुनाथ दास ने दो टूक कह दिया कि सरकारी धन से सुंदरीकरण उन्हें स्वीकार नहीं है। इसके बाद टीम बिना किसी नापजोख के वापस लौट गई।
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