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बैंक मैनेजर से लूट में दो लुटेरों को पांच-पांच साल कैद
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उरई। कोटरा स्थित बैंक जा रहे शाखा प्रबंधक से लूट के मामले में दोष साबित हो जाने पर अपर जिला जज सुरेश चंद्र ने दो लुटेरों को पांच-पांच साल की कैद और पांच पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मामला सात साल पुराना है।
अभियोजन के अनुसार, यूपी इलाहाबाद ग्रामीण बैंक कोटरा के शाखा प्रबंधक ललित बिहारी द्विवेदी ने कोटरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 21 नवंबर 2012 को वह बैंक कैशियर हरीशंकर गुप्ता के साथ बाइक से बैंक जा रहे थे। सुबह पौने नौ बजे जब वह एट कोटरा मार्ग स्थित कुरकुरु गांव के पास पहुंचे तो बाइक सवार तीन बदमाशों ने ओवरटेक कर झपट्टा मारकर बैग छीन लिया था।
बैग में बैंक की चाबी, कागजात, मोबाइल और दो हजार रुपये नगद थे। पुलिस ने इस मामले में मुनेश नायक पुत्र ओमप्रकाश निवासी कुरकुरु थाना कोटरा व नरेंद्र कुशवाहा पुत्र चंद्रभान कुशवाहा व उसके भतीजे गजेंद्र निवासी ग्राम इसकिल थाना एरच जनपद झांसी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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मामले की पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम सिंह ने मुनेश नायक व नरेंद्र कुशवाहा पर दोष साबित होने पर अपर जिला जज सुरेश चंद्र ने पांच पांच साल की सजा और पांच पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अधिवक्ता ने बताया कि मामले के तीसरे आरोपी नरेंद्र का भतीजा गजेंद्र शिमला की जेल में किसी मामले में बंद था। वहां से फरार हो गया था। इस कारण उसके मामले में सुनवाई नहीं हुई।
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अभियोजन के अनुसार, यूपी इलाहाबाद ग्रामीण बैंक कोटरा के शाखा प्रबंधक ललित बिहारी द्विवेदी ने कोटरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 21 नवंबर 2012 को वह बैंक कैशियर हरीशंकर गुप्ता के साथ बाइक से बैंक जा रहे थे। सुबह पौने नौ बजे जब वह एट कोटरा मार्ग स्थित कुरकुरु गांव के पास पहुंचे तो बाइक सवार तीन बदमाशों ने ओवरटेक कर झपट्टा मारकर बैग छीन लिया था।
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बैग में बैंक की चाबी, कागजात, मोबाइल और दो हजार रुपये नगद थे। पुलिस ने इस मामले में मुनेश नायक पुत्र ओमप्रकाश निवासी कुरकुरु थाना कोटरा व नरेंद्र कुशवाहा पुत्र चंद्रभान कुशवाहा व उसके भतीजे गजेंद्र निवासी ग्राम इसकिल थाना एरच जनपद झांसी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
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मामले की पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम सिंह ने मुनेश नायक व नरेंद्र कुशवाहा पर दोष साबित होने पर अपर जिला जज सुरेश चंद्र ने पांच पांच साल की सजा और पांच पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अधिवक्ता ने बताया कि मामले के तीसरे आरोपी नरेंद्र का भतीजा गजेंद्र शिमला की जेल में किसी मामले में बंद था। वहां से फरार हो गया था। इस कारण उसके मामले में सुनवाई नहीं हुई।