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महिला पर जानलेवा हमले में दो को दस साल कैद
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उरई। कालपी कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला तरीबुल्दा में घर में घुसकर महिला के छप्पर में आग लगाने और विरोध करने पर तमंचा से गोली मारने का दोष साबित होने पर अपर सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट अनिल कुमार यादव ने दो लोगों को दस-दस साल की सजा और 23-23 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला दस साल पुराना है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अनूप उपाध्याय ने बताया कि कालपी कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला तरीबुल्दा निवासी विमला देवी पत्नी मलखान ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 जुलाई 2009 की रात करीब डेढ़ बजे मोहल्ले के ही नंदकिशोर पुत्र शंकर निषाद अपने साथी मथुरा पुत्र तुलसीराम निवासी मूसानगर (कानपुर देहात) के साथ उसके घर में घुस आया और छप्पर में आग लगा दी। जब उसने विरोध किया तो तमंचे से गोली मार दी।
इस मामले में विवेचक ने नंदकिशोर को तो आरोपी बनाया था पर एफआईआर में मथुरा को बाहर कर दिया था। इस पर विमला ने अदालत में इसका विरोध किया। तब कोर्ट ने मथुरा को भी आरोपी बनाते हुए ट्रायल शुरू किया। मामले की पैरवी कर रहे अपर शासकीय अधिवक्ता अनूप उपाध्याय और ह्देश पांडेय ने बताया कि गुरुवार को इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट अनिल कुमार यादव ने नंदकिशोर और मथुरा दोनों को दोषी पाते हुए दस दस साल के कारावास और 23-23 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर आठ-आठ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता अनूप उपाध्याय ने बताया कि कालपी कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला तरीबुल्दा निवासी विमला देवी पत्नी मलखान ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 जुलाई 2009 की रात करीब डेढ़ बजे मोहल्ले के ही नंदकिशोर पुत्र शंकर निषाद अपने साथी मथुरा पुत्र तुलसीराम निवासी मूसानगर (कानपुर देहात) के साथ उसके घर में घुस आया और छप्पर में आग लगा दी। जब उसने विरोध किया तो तमंचे से गोली मार दी।
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इस मामले में विवेचक ने नंदकिशोर को तो आरोपी बनाया था पर एफआईआर में मथुरा को बाहर कर दिया था। इस पर विमला ने अदालत में इसका विरोध किया। तब कोर्ट ने मथुरा को भी आरोपी बनाते हुए ट्रायल शुरू किया। मामले की पैरवी कर रहे अपर शासकीय अधिवक्ता अनूप उपाध्याय और ह्देश पांडेय ने बताया कि गुरुवार को इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट अनिल कुमार यादव ने नंदकिशोर और मथुरा दोनों को दोषी पाते हुए दस दस साल के कारावास और 23-23 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर आठ-आठ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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