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गरजा बुलडोजर, ढहाए पक्के कब्जे
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 12 Feb 2016 11:19 PM IST
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शहर के मुहल्ला लहारिया पुरवा में नजूल की भूमि पर कब्जा को लेकर प्रशासन
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ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को गरीबों के कच्चे मकान तहस नहस
किए जाने के बाद शुक्रवार को एक बार फिर से पालिका बुल्डोजर गरजा। इस बार
आठ पक्के मकान ढहा दिए गए। इस दौरान प्रभावित परिवारों के लोग जेसीबी के
आगे लेट गए लेकिन उनकी एक
नहीं चली। वहीं मेहनत की कमाई से एक-एक ईंट लगाने वालों के सामने जब उनके घर टूटे तो गश खाकर गिर गए। यह देख प्रशासन के अधिकारियों का पसीना छूट गया। मौके पर सीओ के पहुंचने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ सकी।
शासन की आवासीय योजना ने कई गरीबों को बेघर कर दिया है। प्रशासन को भी नजूल की भूमि की सुध आ गई।
मंगलवार को पालिका प्रशासन ने मलिन बस्ती में डेढ़ सौ कच्चे मकान गिरा दिए। उस दौरान आठ पक्के मकान भी नजूल भूमि की जद में आ रहे थे, उन्हें नहीं तोड़ा गया। उधर, बेघर हुए गरीबों ने पुनर्वास के लिए नेताओं और अफसरों की परिक्रमा की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान ईओ के बोल पर महिलाओं का आक्रोश भी फूटा। कहा गया कि महलों को
तोड़ने के लिए प्रशासन आगे क्यों नहीं आता। शुक्रवार को प्रशासन ने फिर सख्त रुख अख्तियार करते हुए पहले से ही चिन्हित आठ मकानों को जद में लिया। स्थानीय फोर्स के साथ पीएसी को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट पीके सक्सेना, ईओ रविंद्र
कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे और मकानों को गिराने के निर्देश दिए। इसके बाद जेसीबी मशीन ने मकानों को जमीदोंज कर दिया। शुरू में लोगों ने विरोध किया और मशीन के सामने लेट गए। बाद में सीओ जंगबहादुर सिंह पहुंचे और वहां से लोगों को हटवाया। इसके बाद मकानों को गिरा दिया गया। इस दौरान खासी हड़कंप और तनाव की स्थिति रही।
मीटर कनेक्शन, तो किसी ने हाउस टैक्स की दिखाई रसीद
नगर पालिका व जिला प्रशासन के अफसर जब पक्के मकानों को तोड़ने पहुंचे तो कुछ लोगों ने बिजली कनेक्शन की रसीद दिखाई तो कुछ ने हाउस टैक्स जमा करने का प्रमाण प्रस्तुत किया। इस दौरान कहा कई ने मालिकाना हक के तौर पर हुई नोटरी को भी दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मकान तोड़ दिए गए।
आशियाना उजड़ा तो फफक पड़ी महिलाएं
सरकारी जमीन से अनजान लोगों ने किसी भू माफिया के चक्कर में आकर अपना आशियाना बना लिया। इसके बाद उसे आंखों के सामने उजड़ता देखा तो महिलाएं और घर के अन्य सदस्य फफक पड़े। एक दूसरे से लिपटकर खूब रोए। लोगों ने ढाढ़स बंधाया तो चुप भी हो गए लेकिन बदहवास से बने रहे। सामान निकालने की भी क्षमता उनमें नहीं दिखी। इससे मकान में उनका सामान भी दब गया।
बेहोश हुई महिला, पुलिस ने दिखाई बेदर्दी
पक्के मकानों को ध्वस्त करने के दौरान महिला पुलिस की बेदर्दी भी सामने आई। जैसे ही जेसीबी मशीन आगे बढ़ी तो 70 वर्षीय सरोज के बेटे दहाड़ मारकर रोने लगे। उजड़ता आशियाना और बच्चों को रोते देख वृद्धा गश खाकर गिर गई। इसके बाद सीओ जंगबहादुर सिंह यादव के निर्देश पर महिला पुुलिसवृद्धा को बड़ी बेदर्दी से टांग कर अस्पताल की ओर ले गई। हालत यह थी कि कोई उसका एक हाथ पकड़े थी तो कोई पैर। यह देखकर वहां के लोगों के मुंह से निकल पड़ा पुलिस की मानवता भी मर जाती है।
पूर्व सभासद का मकान तोड़ने में नरमी
नजूल की भूमि पर एक पूर्व सभासद का भी आलीशान मकान बना है। शुरू में अधिकारियों ने इसे भी गिराने में सख्ती दिखाई और आगे की दीवारें व छज्जा ढहा दिया। इसके बाद इस मकान को नहीं तोड़ा गया। प्रशासन की यह फैसला अन्य पीड़ितों को बहुत अखरा। उनका कहना था कि जब उनके मकान जमींदोज कर दिए गए तो फिर पूर्व सभासद का मकान क्यों छोड़ दिया गया।
वर्जन
नजूल की भूमि पर जहां-जहां अतिक्रमण किया गया है उसे हटाया जाएगा। न्यायालय का भी आदेश है सरकारी जमीन पर जो कब्जा है उसे हटाया जाएगा। इसके लिए सख्ती के साथ कार्रवाई की जाएगी।
पीके सक्सेना सिटी मजिस्ट्रेट उरई
नजूल की जमीन पर किसने डलवा दी इंटरलाकिंग
लहारिया पुरवा में नजूल की जमीन पर बनाए गए कच्चे और पक्के अवैध मकान लोगों ने तुड़वा दिए हैं। अब सवाल यह है कि इन अवैध मकानों के लिए जो सुविधाएं दी गई वह किस आधार पर रहीं। उस इलाके में इंटरलाकिंग डलवाई गई लेकिन किसने डलवाई यह नगर पालिका के अधिकारियों को ही पता नहीं है।
नगर पालिका ने नजूल की जमीन से कब्जे हटवाए हैं। यहां पर कच्चे व पक्के मकानों को गिरा दिया गया। यहां पर मकान किसकी शह पर बने यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन शासन व प्रशासन की ढुलमुल नीति जरूर उजागर हो गई है। एक ओर मकानों को अवैध बताया जा रहा है वहीं दूसरी ओर इनमें बिजली कनेक्शन दे दिया गया। इतना ही नहीं इंटरलाकिंग भी
नजूल की जमीन में डलवा दी गई। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इंटरलाकिंग किस विभाग ने डलवाई यह बात नगर पालिका को भी मालूम नहीं है। डूडा को भी इसकी जानकारी नहीं है। ईओ रविंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि इंटरलाकिंग पालिका से नहीं बनी है। किस विभाग ने बनवाई यह भी जानकारी नहीं है।
नहीं चली। वहीं मेहनत की कमाई से एक-एक ईंट लगाने वालों के सामने जब उनके घर टूटे तो गश खाकर गिर गए। यह देख प्रशासन के अधिकारियों का पसीना छूट गया। मौके पर सीओ के पहुंचने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ सकी।
शासन की आवासीय योजना ने कई गरीबों को बेघर कर दिया है। प्रशासन को भी नजूल की भूमि की सुध आ गई।
मंगलवार को पालिका प्रशासन ने मलिन बस्ती में डेढ़ सौ कच्चे मकान गिरा दिए। उस दौरान आठ पक्के मकान भी नजूल भूमि की जद में आ रहे थे, उन्हें नहीं तोड़ा गया। उधर, बेघर हुए गरीबों ने पुनर्वास के लिए नेताओं और अफसरों की परिक्रमा की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान ईओ के बोल पर महिलाओं का आक्रोश भी फूटा। कहा गया कि महलों को
तोड़ने के लिए प्रशासन आगे क्यों नहीं आता। शुक्रवार को प्रशासन ने फिर सख्त रुख अख्तियार करते हुए पहले से ही चिन्हित आठ मकानों को जद में लिया। स्थानीय फोर्स के साथ पीएसी को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट पीके सक्सेना, ईओ रविंद्र
कुमार वर्मा मौके पर पहुंचे और मकानों को गिराने के निर्देश दिए। इसके बाद जेसीबी मशीन ने मकानों को जमीदोंज कर दिया। शुरू में लोगों ने विरोध किया और मशीन के सामने लेट गए। बाद में सीओ जंगबहादुर सिंह पहुंचे और वहां से लोगों को हटवाया। इसके बाद मकानों को गिरा दिया गया। इस दौरान खासी हड़कंप और तनाव की स्थिति रही।
मीटर कनेक्शन, तो किसी ने हाउस टैक्स की दिखाई रसीद
नगर पालिका व जिला प्रशासन के अफसर जब पक्के मकानों को तोड़ने पहुंचे तो कुछ लोगों ने बिजली कनेक्शन की रसीद दिखाई तो कुछ ने हाउस टैक्स जमा करने का प्रमाण प्रस्तुत किया। इस दौरान कहा कई ने मालिकाना हक के तौर पर हुई नोटरी को भी दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मकान तोड़ दिए गए।
आशियाना उजड़ा तो फफक पड़ी महिलाएं
सरकारी जमीन से अनजान लोगों ने किसी भू माफिया के चक्कर में आकर अपना आशियाना बना लिया। इसके बाद उसे आंखों के सामने उजड़ता देखा तो महिलाएं और घर के अन्य सदस्य फफक पड़े। एक दूसरे से लिपटकर खूब रोए। लोगों ने ढाढ़स बंधाया तो चुप भी हो गए लेकिन बदहवास से बने रहे। सामान निकालने की भी क्षमता उनमें नहीं दिखी। इससे मकान में उनका सामान भी दब गया।
बेहोश हुई महिला, पुलिस ने दिखाई बेदर्दी
पक्के मकानों को ध्वस्त करने के दौरान महिला पुलिस की बेदर्दी भी सामने आई। जैसे ही जेसीबी मशीन आगे बढ़ी तो 70 वर्षीय सरोज के बेटे दहाड़ मारकर रोने लगे। उजड़ता आशियाना और बच्चों को रोते देख वृद्धा गश खाकर गिर गई। इसके बाद सीओ जंगबहादुर सिंह यादव के निर्देश पर महिला पुुलिसवृद्धा को बड़ी बेदर्दी से टांग कर अस्पताल की ओर ले गई। हालत यह थी कि कोई उसका एक हाथ पकड़े थी तो कोई पैर। यह देखकर वहां के लोगों के मुंह से निकल पड़ा पुलिस की मानवता भी मर जाती है।
पूर्व सभासद का मकान तोड़ने में नरमी
नजूल की भूमि पर एक पूर्व सभासद का भी आलीशान मकान बना है। शुरू में अधिकारियों ने इसे भी गिराने में सख्ती दिखाई और आगे की दीवारें व छज्जा ढहा दिया। इसके बाद इस मकान को नहीं तोड़ा गया। प्रशासन की यह फैसला अन्य पीड़ितों को बहुत अखरा। उनका कहना था कि जब उनके मकान जमींदोज कर दिए गए तो फिर पूर्व सभासद का मकान क्यों छोड़ दिया गया।
वर्जन
नजूल की भूमि पर जहां-जहां अतिक्रमण किया गया है उसे हटाया जाएगा। न्यायालय का भी आदेश है सरकारी जमीन पर जो कब्जा है उसे हटाया जाएगा। इसके लिए सख्ती के साथ कार्रवाई की जाएगी।
पीके सक्सेना सिटी मजिस्ट्रेट उरई
नजूल की जमीन पर किसने डलवा दी इंटरलाकिंग
लहारिया पुरवा में नजूल की जमीन पर बनाए गए कच्चे और पक्के अवैध मकान लोगों ने तुड़वा दिए हैं। अब सवाल यह है कि इन अवैध मकानों के लिए जो सुविधाएं दी गई वह किस आधार पर रहीं। उस इलाके में इंटरलाकिंग डलवाई गई लेकिन किसने डलवाई यह नगर पालिका के अधिकारियों को ही पता नहीं है।
नगर पालिका ने नजूल की जमीन से कब्जे हटवाए हैं। यहां पर कच्चे व पक्के मकानों को गिरा दिया गया। यहां पर मकान किसकी शह पर बने यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन शासन व प्रशासन की ढुलमुल नीति जरूर उजागर हो गई है। एक ओर मकानों को अवैध बताया जा रहा है वहीं दूसरी ओर इनमें बिजली कनेक्शन दे दिया गया। इतना ही नहीं इंटरलाकिंग भी
नजूल की जमीन में डलवा दी गई। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इंटरलाकिंग किस विभाग ने डलवाई यह बात नगर पालिका को भी मालूम नहीं है। डूडा को भी इसकी जानकारी नहीं है। ईओ रविंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि इंटरलाकिंग पालिका से नहीं बनी है। किस विभाग ने बनवाई यह भी जानकारी नहीं है।