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Jalaun News: आठ डिग्री पारा, घना कोहरा, सीजन की सबसे ठंडी बीती रात

Fri, 26 Dec 2025 01:04 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Dec 2025 01:04 AM IST
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The temperature dropped to eight degrees, there was dense fog, and it was the coldest night of the season.
उरई। जिले में सीजन की अब तक की सबसे ठंडी बुधवार की रात दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान गिरकर आठ डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान महज 18 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। घने कोहरे के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त नजर आया।
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बृहस्पतिवार को सुबह कोहरे की चादर इतनी घनी रही कि दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई। सड़कों पर वाहन चालकों को दिन में भी लाइट जलाकर चलना पड़ा। हाईवे और ग्रामीण मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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ठंड और कोहरे के कारण लोग आवश्यक कार्यों को छोड़कर घरों में ही दुबके रहे। किसानों के लिए भी यह मौसम परेशानी का कारण बन रहा है। लगातार पड़ रही ठंड और कोहरे से सरसों, चना सहित रबी की फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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वहीं, खुले में काम करने वाले मजदूर, बुजुर्ग और छोटे बच्चे ठंड की चपेट में सबसे अधिक हैं। गरीब और असहाय लोगों के लिए ठंड किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है।
मौसम वैज्ञानिक कुलदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव और उत्तरी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। अभी ठंड से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। अगले दो से तीन दिनों तक न्यूनतम तापमान में और गिरावट हो सकती है। सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।
उन्होंने लोगों को ठंड से बचाव के लिए सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
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फोटो-09 ग्राम लौना में हरी मटर की फलियां तोड़ते मजदूर। संवाद


हरी मटर की कम पैदावार से किसानों में मायूसी
मंडी में आवक कम व्यापारी परेशान, न उपज ढंग की मिल रही है और न ही भाव

संवाद न्यूज एजेंसी

कोंच। कहने को तो कोंच मंडी हरी मटर का हब मानी जाती है लेकिन इस बार किसान और व्यापारी दोनों परेशान हैं। इसकी वजह हरी मटर का रकबा ही पिछले वर्षों की तुलना में काफी घटा है ऊपर से पैदावार भी कम हो रही है।
उधर, मंडी में हरी मटर की आवक कम होने व्यापारी भी परेशान हैं। ऊपर से इस बार हरि मटर की क्वालिटी कुछ गड़बड़ होने की वजह से किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में किसानों की आमदनी दोगुनी होने की कौन कहे, उन्हें अपनी लागत निकालना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
इस बार मौसम ने किसानों को बुरी तरह छला है। बेमौसम बारिश से लेट हुई बोआई के कारण अव्वल तो मटर उगाने वाले ज्यादातर किसान मटर बो ही नहीं पाए। उन्हें चना, मसूर, सफेद मटर खेतों में बोआई करनी पड़ी है। जिन किसानों ने जैसे तैसे हरी मटर बोने का जोखिम उठाया भी था उनका अंकुरण ठीक से नहीं हुआ। इसके चलते उन्हें खेत जोत कर दोबारा से मटर के इतर चना, मसूर गेहूं की बोआई की है।
मंडी में पहले हरी मटर की आवक इतनी होती थी कि व्यापारी रात-रात भर तौलाई करते रहते थे लेकिन अब तमाम व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। हरी मटर की पैदावार भी मौसम की वजह से प्रभावित हुई है।
भाव की अगर बात करें तो पिछले साल की ही तुलना में इस बार की शुरुआत एक तिहाई दामों से हुई है। आने वाले दिनों में हरी मटर के दाम और नीचे आने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है क्योंकि आवक बढ़ने के साथ रेट डाउन होना स्वाभाविक है।





25 की जगह पांच झल्ली वाली निकल रही हरी मटर की फलियां


कोंच। हरी मटर की फसल में इस बार किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि जहां एक बीघा में लगभग 25 झिल्लियां निकलती थीं, वहीं इस बार मात्र 5 से 8 झिल्लिया ही निकल रही हैं। पैदावार में आई इस गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि मौसम में बदलाव कारण फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। (संवाद)






इस बार मौसम ने बर्बाद किया किसानों को



फोटो-16 किसान अजय कुशवाहा। संवाद



इस बार मौसम ने किसानों को पूरी तरह से बर्बाद करके रख दिया है। हरी मटर को नकद फसल के तौर पर देखा जाता है। किसान ढेर सारी जरूरतें पूरी कर लेता है लेकिन इस बार बेमौसम बारिश ने बोआई इतनी लेट कर दी कि चाहते हुए भी हरी मटर नहीं बोई जा सकी। इससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
- अजय कुशवाहा, गोरा करनपुर









फोटो- 17 किसान शिव कुमार। संवाद



हरी मटर उगाने वाले किसानों को इस बार तगड़ा झटका लगा है। हद से ज्यादा हुई बारिश की वजह से समय पर खेत सूख नहीं पाए जिसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें मटर से हाथ धोना पड़ा और उसकी जगह चना, मसूर, गेहूं जैसी फसलों की बोआई करके आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
- शिव कुमार, सुनाया
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