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Jalaun News: सात साल पहले का सर्वे बेकार, दोबारा होगा
Tue, 05 Mar 2024 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Tue, 05 Mar 2024 12:21 AM IST
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उरई। जीआईएस यानि ग्लोबल इनफार्मेशन सिस्टम के तहत नगर पालिका फिर से सर्वे कराने जा रही है। यह सर्वे पालिका ने सात साल पहले भी कराया था, जिस पर 60 लाख रुपये के करीब खर्च आया था। लेकिन, फिर से यह सर्वे नए सिरे से कराया जा रहा है, जिसमें इस बार 40 फीसदी के करीब खर्च बढ़ गया है। दावा किया जा रहा है कि सर्वे होने के बाद रिकार्ड में शहर का सही नक्शा दर्ज होगा। जो नए भवन तैयार हुए हैं, और जिनसे कर नहीं वसूला जा रहा, वे भी कर के दायरे में आएंगे। इससे नगर पालिका राजस्व बढ़ा सकेगी।
करीब तीन लाख की आबादी वाले जिले के सबसे बड़ी निकाय क्षेत्र में नगर पालिका अभी करीब छह हजार घरेलू और करीब दो सौ व्यवसायिक भवनों से कर वसूलती है। सालाना लक्ष्य भी करीब छह करोड़ रुपये रहता है। लेकिन, कई घर और कामर्शियल भवन अभी भी छूटे हैं। जीआईएस सर्वे से शहर का सटीक नक्शा बन सकेगा और उसमें जो भी भवन और जितने भी क्षेत्रफल में हैं, उसका सटीक ब्योरा ऑनलाइन दर्ज हो जाएगा। पालिका के कर मानकों के हिसाब से और भवन क्षेत्र के हिसाब से गृह स्वामी को कर देना होगा। हालांकि चुनाव नजदीक होने की वजह से फिलहाल यह सर्वे लोकसभा चुनाव पूरे होने के बाद ही शुरू हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि हर पांच साल में यह जीआईएस सर्वे कराना जरूरी होता है, जिससे आवासों की बढ़ी संख्या सटीक रूप से दर्ज की जा सके। वर्ष 2016-17 में भी यह सर्वे हुआ था, उसके बाद से काफी आबादी बढ़ी है। इस सर्वे में उस आबादी को भी दर्ज किया जा सकेगा।
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करीब तीन लाख की आबादी वाले जिले के सबसे बड़ी निकाय क्षेत्र में नगर पालिका अभी करीब छह हजार घरेलू और करीब दो सौ व्यवसायिक भवनों से कर वसूलती है। सालाना लक्ष्य भी करीब छह करोड़ रुपये रहता है। लेकिन, कई घर और कामर्शियल भवन अभी भी छूटे हैं। जीआईएस सर्वे से शहर का सटीक नक्शा बन सकेगा और उसमें जो भी भवन और जितने भी क्षेत्रफल में हैं, उसका सटीक ब्योरा ऑनलाइन दर्ज हो जाएगा। पालिका के कर मानकों के हिसाब से और भवन क्षेत्र के हिसाब से गृह स्वामी को कर देना होगा। हालांकि चुनाव नजदीक होने की वजह से फिलहाल यह सर्वे लोकसभा चुनाव पूरे होने के बाद ही शुरू हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि हर पांच साल में यह जीआईएस सर्वे कराना जरूरी होता है, जिससे आवासों की बढ़ी संख्या सटीक रूप से दर्ज की जा सके। वर्ष 2016-17 में भी यह सर्वे हुआ था, उसके बाद से काफी आबादी बढ़ी है। इस सर्वे में उस आबादी को भी दर्ज किया जा सकेगा।
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