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Jalaun News: दो अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी थाना प्रभारी ने निभाई
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कुठौंद। आदर्श विद्यापीठ इंटर कॉलेज के दो बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी थाना प्रभारी ने ली है। इन बच्चों के माता-पिता की मौत हो चुकी है। दोनों नाना के यहां रह कर पढ़ रहे हैं। नाना की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं है।
थाना क्षेत्र के आदर्श विद्यापीठ इंटर कॉलेज में छात्राओं को जागरूक करने के लिए मंगलवार को एक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान टीम को जानकारी मिली कि विद्यालय में पढ़ने वाले दो बच्चे अर्पित और अभी, भरसैन, थाना औरैया, वर्तमान में अपने नाना रामनरेश सलेमपुर कालपी के यहां रहते हैं। उनके माता-पिता का निधन हो चुका है। नाना की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपनी पढ़ाई के लिए किताबें खरीदने व फीस जमा करने में असमर्थ थे।
इस स्थिति की जानकारी मिशन शक्ति टीम ने थाना प्रभारी अरुण कुमार राय को दी। घटना की जानकारी मिलते ही निरीक्षक अरुण कुमार राय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने दोनों बच्चों को थाना बुलवाया और उन्हें आवश्यक पुस्तकें अध्ययन सामग्री प्रदान की। साथ ही विद्यालय के प्रधानाचार्य से संपर्क कर दोनों बच्चों अर्पित और अभी की एक वर्ष की फीस स्वयं अपने निजी खर्च से जमा कराई। थाना प्रभारी अरुण कुमार राय का यह प्रयास उन असहाय बच्चों के लिए न केवल वरदान साबित हुआ। बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गया है।
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थाना क्षेत्र के आदर्श विद्यापीठ इंटर कॉलेज में छात्राओं को जागरूक करने के लिए मंगलवार को एक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान टीम को जानकारी मिली कि विद्यालय में पढ़ने वाले दो बच्चे अर्पित और अभी, भरसैन, थाना औरैया, वर्तमान में अपने नाना रामनरेश सलेमपुर कालपी के यहां रहते हैं। उनके माता-पिता का निधन हो चुका है। नाना की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपनी पढ़ाई के लिए किताबें खरीदने व फीस जमा करने में असमर्थ थे।
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इस स्थिति की जानकारी मिशन शक्ति टीम ने थाना प्रभारी अरुण कुमार राय को दी। घटना की जानकारी मिलते ही निरीक्षक अरुण कुमार राय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने दोनों बच्चों को थाना बुलवाया और उन्हें आवश्यक पुस्तकें अध्ययन सामग्री प्रदान की। साथ ही विद्यालय के प्रधानाचार्य से संपर्क कर दोनों बच्चों अर्पित और अभी की एक वर्ष की फीस स्वयं अपने निजी खर्च से जमा कराई। थाना प्रभारी अरुण कुमार राय का यह प्रयास उन असहाय बच्चों के लिए न केवल वरदान साबित हुआ। बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गया है।
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