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शोभायात्रा निकाल दिया अहिंसा का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 19 Apr 2016 11:18 PM IST
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महावीर जयंती पर शहर में निकलती शोभायात्रा।
- फोटो : अमर उजाला
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भगवान महावीर की 2615वीं जयंती मंगलवार को शहर में धूमधाम से मनाई गई। इस दौरान जैन धर्म के अनुयायियों ने नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली और फिर दिगंबर जैन मंदिर में ध्वजारोहण के साथ पूजा अर्चना करके भजन कीर्तन किया। इस दौरान जैन मुनियों ने अहिंसा परमो धर्म का उपदेश दिया और कहा कि भगवान महावीर सत्य और अहिंसा पर हमेशा
जोर देते थे। मंगलवार को महावीर जयंती पर सुबह साढ़े सात बजे दिगंबर जैन मंदिर राजेंद्र नगर में ध्वजारोहण हुआ। इसके बाद भगवान की शांति धारा के साथ सामूहिक अभिषेक एवं पूजन अर्चन किया गया। सुबह साढ़े नौ बजे भगवान महावीर का पालनोत्सव हुआ। इसमें बचपन के समय की लीलाओं का वर्णन किया गया। दोपहर दो बजे से श्री तारण तरन जैन
चैत्यालय से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा शहर में माहिल तालाब, शहीद भगत सिंह चौराहा, अंबेडकर चौराहा होते हुए राजेंद्र नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। यहां पर शोभायात्रा का समापन हुआ और फिर जैन धर्म के अनुयायियों की एक सभा हुई। नगर में निकली शोभायात्रा पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई। कई स्थानों पर शोभायात्रा में साथ चल रहे
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लोगों को शरबत पिलाया गया। शाम के समय साढ़े सात बजे आरती का आयोजन किया गया। जैन मुनियों ने जैन धर्म का महत्व समझाया और कहा कि जैन धर्म में तीर्थंकर परंपरा शाश्वत है। ये अनादि काल से चली आ रही है और अनंत काल तक चलेगी। प्रत्येक युग में 24 तीर्थकर धर्म की पुन: स्थापना करते हैं। इस युग के प्रथम तीर्थकर भगवान आदिनाथ थे।
उन्हीं की परंपरा में भगवान महावीर 24वें एवं अंतिम तीर्थकर बने। भगवान महावीर के जीवन पर प्रकाश डाला गया। उनके उपदेशों पर चलने का आह्वान किया गया।
इस मौके पर डॉ. देवेंद्र कुमार जैन, एके जैन, हरिश्चंद्र जैन, मनुज, बीसी जैन, प्रदीप कुमार, शगुन, प्रमोद, रामखिलावन, अमर चंद्र, महेश चंद्र, दीपचंद्र, आशा आदि मौजूद रहे।
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जोर देते थे। मंगलवार को महावीर जयंती पर सुबह साढ़े सात बजे दिगंबर जैन मंदिर राजेंद्र नगर में ध्वजारोहण हुआ। इसके बाद भगवान की शांति धारा के साथ सामूहिक अभिषेक एवं पूजन अर्चन किया गया। सुबह साढ़े नौ बजे भगवान महावीर का पालनोत्सव हुआ। इसमें बचपन के समय की लीलाओं का वर्णन किया गया। दोपहर दो बजे से श्री तारण तरन जैन
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चैत्यालय से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा शहर में माहिल तालाब, शहीद भगत सिंह चौराहा, अंबेडकर चौराहा होते हुए राजेंद्र नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंची। यहां पर शोभायात्रा का समापन हुआ और फिर जैन धर्म के अनुयायियों की एक सभा हुई। नगर में निकली शोभायात्रा पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई। कई स्थानों पर शोभायात्रा में साथ चल रहे
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लोगों को शरबत पिलाया गया। शाम के समय साढ़े सात बजे आरती का आयोजन किया गया। जैन मुनियों ने जैन धर्म का महत्व समझाया और कहा कि जैन धर्म में तीर्थंकर परंपरा शाश्वत है। ये अनादि काल से चली आ रही है और अनंत काल तक चलेगी। प्रत्येक युग में 24 तीर्थकर धर्म की पुन: स्थापना करते हैं। इस युग के प्रथम तीर्थकर भगवान आदिनाथ थे।
उन्हीं की परंपरा में भगवान महावीर 24वें एवं अंतिम तीर्थकर बने। भगवान महावीर के जीवन पर प्रकाश डाला गया। उनके उपदेशों पर चलने का आह्वान किया गया।
इस मौके पर डॉ. देवेंद्र कुमार जैन, एके जैन, हरिश्चंद्र जैन, मनुज, बीसी जैन, प्रदीप कुमार, शगुन, प्रमोद, रामखिलावन, अमर चंद्र, महेश चंद्र, दीपचंद्र, आशा आदि मौजूद रहे।