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Jalaun News: गबन मामले में जांच टीम ने लिया प्रधान का स्पष्टीकरण
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कदौरा। ग्राम पंचायत मवई अहीर में सरकारी धन के गबन के मामले में नया खुलासा हुआ है। जांच के लिए पहुंची जिला स्तरीय द्वि-सदस्यीय टीम ने स्थलीय निरीक्षण कर ग्राम प्रधान भूपेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण लिया। इसमें प्रधान ने खुद को निर्देष बताया है।
टीम में डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह और एई डीआरडीए अनूप मिश्रा शामिल रहे। प्रधान भूपेंद्र सिंह ने लिखित स्पष्टीकरण में कहा कि पंचायत सचिव ने उनकी जानकारी के बिना संबंधित जेई से मिलकर चहारदीवारी का भुगतान करा लिया। प्रधान ने आरोप लगाया कि जिस समय यह भुगतान हुआ, वह जेल में थे।
जेल से रिहा होने के बाद मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने के कारण पंचायत कार्यों पर ध्यान नहीं दे पाए। इसी दौरान सचिव ने उनके पास मौजूद डिजिटल सिग्नेचर (डोंगल) का उपयोग कर भुगतान कर दिया। डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह ने प्रधान द्वारा सचिव को डोंगल देने को गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि डिजिटल सिग्नेचर किसी को सौंपना स्वयं के लिए धोखाधड़ी का कारण बन सकता है।
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प्रधान ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव ने उन्हें ओएसआर पेमेंट का झांसा देकर उनके फोन से ओटीपी मंगवाया और उसका दुरुपयोग कर फर्जी भुगतान करा दिया। इस पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रधान ने इसकी शिकायत सीडीओ से की थी। जिला प्रशासन ने मामले की गहन जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं और जांच टीम ने अब सचिव व संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया है।
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टीम में डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह और एई डीआरडीए अनूप मिश्रा शामिल रहे। प्रधान भूपेंद्र सिंह ने लिखित स्पष्टीकरण में कहा कि पंचायत सचिव ने उनकी जानकारी के बिना संबंधित जेई से मिलकर चहारदीवारी का भुगतान करा लिया। प्रधान ने आरोप लगाया कि जिस समय यह भुगतान हुआ, वह जेल में थे।
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जेल से रिहा होने के बाद मानसिक रूप से अस्वस्थ रहने के कारण पंचायत कार्यों पर ध्यान नहीं दे पाए। इसी दौरान सचिव ने उनके पास मौजूद डिजिटल सिग्नेचर (डोंगल) का उपयोग कर भुगतान कर दिया। डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह ने प्रधान द्वारा सचिव को डोंगल देने को गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि डिजिटल सिग्नेचर किसी को सौंपना स्वयं के लिए धोखाधड़ी का कारण बन सकता है।
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प्रधान ने यह भी आरोप लगाया कि सचिव ने उन्हें ओएसआर पेमेंट का झांसा देकर उनके फोन से ओटीपी मंगवाया और उसका दुरुपयोग कर फर्जी भुगतान करा दिया। इस पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रधान ने इसकी शिकायत सीडीओ से की थी। जिला प्रशासन ने मामले की गहन जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं और जांच टीम ने अब सचिव व संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया है।