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Jalaun News: कालपी के ऐतिहासिक स्थल बनेंगे पर्यटन का केंद्र, विकास की राह खुली

Tue, 03 Feb 2026 01:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Feb 2026 01:08 AM IST
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The historical sites of Kalpi will become a center of tourism, opening the way for development.
कालपी। नगर के प्राचीन और पौराणिक स्थलों को अब पर्यटन के नक्शे पर लाने की कवायद तेज हो गई है। प्रशासन द्वारा गणेश मंदिर, पीलाघाट और ऐतिहासिक किलागिर्द से संबंधित महत्वपूर्ण विवरण पर्यटन विभाग को भेज दिए गए हैं। यदि यह योजना सुचारू रूप से आगे बढ़ती है, तो इन ऐतिहासिक धरोहरों का कायाकल्प जल्द ही देखने को मिल सकता है, जिससे कालपी को एक नई पहचान मिलेगी।
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कालपी नगर सदियों से ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक महत्व के अनमोल स्थलों का गवाह रहा है। इन स्थलों के अवशेष आज भी मौजूद हैं, परंतु उचित विकास के अभाव में इनका गौरवशाली इतिहास धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार हो रहा है। स्थानीय विधायक विनोद चतुर्वेदी ने नगर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित सूर्य मंदिर, गणेश मंदिर, व्यास मंदिर, पातालेश्वर मंदिर, पीलाघाट और ऐतिहासिक किलागिर्द के विकास के लिए प्रदेश सरकार से सक्रिय पहल की थी।
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विधायक के प्रयासों के फलस्वरूप, शासन ने पर्यटन विभाग को इन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर शामिल करने हेतु एक विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं।
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पर्यटन विभाग ने पातालेश्वर मंदिर के सुंदरीकरण का कार्य प्रारंभ किया था, लेकिन पुरातत्व विभाग के हस्तक्षेप के कारण इसे फिलहाल रोक दिया गया है। वहीं, व्यास मंदिर क्षेत्र में विकास कार्य प्रगति पर हैं। हाल ही में पर्यटन विभाग ने पीलाघाट, गणेश मंदिर और किलागिर्द के विकास के लिए आवश्यक राजस्व अभिलेख तहसील प्रशासन से मांगे थे। एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने बताया कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर रिपोर्ट पर्यटन विभाग को प्रेषित कर दी गई है। इन औपचारिकताओं के पूर्ण होने पर इन प्राचीन स्थलों की सूरत बदलने की पूरी संभावना है।


इन ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थलों के विकास से न केवल कालपी के गौरवशाली अतीत को सहेजने में मदद मिलेगी, बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान भी प्राप्त करेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। प्रशासन और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से कालपी की ऐतिहासिक धरोहरें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी।
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