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दिन की गर्मी और रात में सर्दी कर रही लोगों को बीमार
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Fri, 01 Jan 2016 11:26 PM IST
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इस बार हेल्दी सीजन में भी लोग बीमार पड़ रहे हैं। माना जाता है कि सर्दी में लोग कम बीमार होते हैं और इसलिए ही इसे हेल्दी सीजन कहा जाता ही। इस धारणा के ठीक उलट जनवरी में भी तेज धूप के कारण दिन में गर्मी व रात में सर्दी हो रही है। हालत यह है कि हर घर में चारपाई बिछी है और लोग खांसी, जुकाम या बुखार से पीड़ित हैं। डाक्टर भी इसके पीछे मौसम को कारण मान रहे हैं।
शुक्रवार को जिला अस्पताल में मरीजाें की भीड़ रही। फिजीशियन व चाइल्ड स्पेशलिस्ट डाक्टरों के चैंबराें में ज्यादा मरीज थे। इनमें अधिकांश मरीज सर्दी से होने वाली बीमारी से ग्रसित थे। अमूमन सर्दियों के मौसम में जिला अस्पताल में करीब 500 से 600 मरीज आते थे लेकिन इस मर्तबा करीब 1200 से 1500 मरीज रोज आ रहे हैं। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौसम किस तरह लोगों को बीमार कर रहा है।
बच्चों में सांस की बीमारी भी बढ़ रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. विनय अग्रवाल ने बताया कि यह बीमारी कोल्ड वायरल है। यह दिन में गर्मी और रात व शाम के समय सर्दी होने के कारण हो रहा है। इस मौसम में लोग लापरवाही बरतते हैं जिससे उन्हें सर्दी लग जाती है। बताया कि लोग लापरवाही न बरतें। गर्म कपडे़ पहनें और कान बांधकर रखें और इस बीमारी की चपेट में आए परिजनों की तौलिया व बिस्तर आदि अलग रखें। यह फै लने वाली बीमारी है और संपर्क में आते ही लोग बीमार हो जाते है। सर्दी लगने पर डाक्टर को दिखाकर दवा लें और आराम करें।
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जिला अस्पताल में खांसी का सीरप नहीं है। इससे मरीजों को यहां वहां भटकना पड़ रहा है। वहीं डाक्टरों के चैंबर में मौजूद दवा प्रतिनिधि व मेडिकल स्टोर संचालकों के गुर्गें मरीजों को अपनी दुकान में बिकने वाले सीरप लिख देते हैं। इससे मरीजों को सीरप अधिक मूल्य देकर लेना पड़ता है। यही नहीं, यह दवा के दलाल अन्य दवाओं की भी पर्चियां लिखते नजर आते हैं।
ऐसे करें बचाव
-कान बंाधक र रखें ,गर्म कपडे़ पहनें। दिन में इनर जरूर पहनें।
-खाने में हरी व रेशेदार सब्जियाें का प्रयोग करे, गर्म ताजा खाना खाएं।
-वायरल फीवर से पीड़ित मरीज की उपयोग की गई वस्तुओं का उपयोग न करें।
-कमरे से एकदम बाहर न निकलें, नंगे पैर न घूमें।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. केके गुप्त ने बताया कि सर्दियों के मौसम में बात व गठिया वात कि रोगियों में इजाफा हुआ है। इनमें वृद्ध व महिलाओं की संख्या अधिक है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में हड्डी रोगियों को रक्त संचार के लिए अपनी मालिश गुनगुने सरसों के तेल से करनी चाहिए और धूप में बैठकर सिकाई करनी चाहिए। डाक्टर से सलाह लेकर दवा लेते रहना चाहिए।
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शुक्रवार को जिला अस्पताल में मरीजाें की भीड़ रही। फिजीशियन व चाइल्ड स्पेशलिस्ट डाक्टरों के चैंबराें में ज्यादा मरीज थे। इनमें अधिकांश मरीज सर्दी से होने वाली बीमारी से ग्रसित थे। अमूमन सर्दियों के मौसम में जिला अस्पताल में करीब 500 से 600 मरीज आते थे लेकिन इस मर्तबा करीब 1200 से 1500 मरीज रोज आ रहे हैं। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौसम किस तरह लोगों को बीमार कर रहा है।
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बच्चों में सांस की बीमारी भी बढ़ रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. विनय अग्रवाल ने बताया कि यह बीमारी कोल्ड वायरल है। यह दिन में गर्मी और रात व शाम के समय सर्दी होने के कारण हो रहा है। इस मौसम में लोग लापरवाही बरतते हैं जिससे उन्हें सर्दी लग जाती है। बताया कि लोग लापरवाही न बरतें। गर्म कपडे़ पहनें और कान बांधकर रखें और इस बीमारी की चपेट में आए परिजनों की तौलिया व बिस्तर आदि अलग रखें। यह फै लने वाली बीमारी है और संपर्क में आते ही लोग बीमार हो जाते है। सर्दी लगने पर डाक्टर को दिखाकर दवा लें और आराम करें।
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जिला अस्पताल में खांसी का सीरप नहीं है। इससे मरीजों को यहां वहां भटकना पड़ रहा है। वहीं डाक्टरों के चैंबर में मौजूद दवा प्रतिनिधि व मेडिकल स्टोर संचालकों के गुर्गें मरीजों को अपनी दुकान में बिकने वाले सीरप लिख देते हैं। इससे मरीजों को सीरप अधिक मूल्य देकर लेना पड़ता है। यही नहीं, यह दवा के दलाल अन्य दवाओं की भी पर्चियां लिखते नजर आते हैं।
ऐसे करें बचाव
-कान बंाधक र रखें ,गर्म कपडे़ पहनें। दिन में इनर जरूर पहनें।
-खाने में हरी व रेशेदार सब्जियाें का प्रयोग करे, गर्म ताजा खाना खाएं।
-वायरल फीवर से पीड़ित मरीज की उपयोग की गई वस्तुओं का उपयोग न करें।
-कमरे से एकदम बाहर न निकलें, नंगे पैर न घूमें।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. केके गुप्त ने बताया कि सर्दियों के मौसम में बात व गठिया वात कि रोगियों में इजाफा हुआ है। इनमें वृद्ध व महिलाओं की संख्या अधिक है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में हड्डी रोगियों को रक्त संचार के लिए अपनी मालिश गुनगुने सरसों के तेल से करनी चाहिए और धूप में बैठकर सिकाई करनी चाहिए। डाक्टर से सलाह लेकर दवा लेते रहना चाहिए।