{"_id":"57ffd4104f1c1b1a5428dd81","slug":"the-delivery-took-place-in-the-ambulance-on-the-way","type":"story","status":"publish","title_hn":"रास्ते में एंबुलेंस में ही हुआ प्रसव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रास्ते में एंबुलेंस में ही हुआ प्रसव
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Fri, 14 Oct 2016 12:06 AM IST
विज्ञापन
मीना।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उरई (जालौन)। सरकारी अस्पतालों के डाक्टर जननी सुरक्षा योजना के प्रति गंभीर नहीं हैं। प्रसव कराने के लिए आने वाली महिलाओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अस्पतालों की लापरवाही पर महिलाओं के परिजन डिलीवरी के लिए नर्सिंगहोम ले जाते हैं। बुधवार की रात संवाददाता जिला महिला अस्पताल में हकीकत जानने पहुंचा। रात को प्रसव के लिए आईं दो महिलाओं को तो नर्सिंगहोम जाना पड़ा। एक का प्रसव एंबुलेंस में ही हो गया।
विज्ञापन
सरकार महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कई योजनाएं संचालित हो रही है। इसी में से एक है जननी सुरक्षा योजना। इस योजना पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे। जिला महिला अस्पताल समेत प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हर जगह महिला चिकित्सकों की मनमानी चल रही है। बुधवार को जब संवाददाता महिला अस्पताल पहुंचा तो वहां की स्थित देख दंग रह गया। ड्यूटी पर तैनात डाक्टर नींद ले रही थीं। नर्सों के भरोसे पर गर्भवती महिलाओं का चेकअप किया जा रहा था।
विज्ञापन
शहर के राजेंद्र नगर निवासी गर्भवती महिला रानी को लेकर परिजन रात में 12 बजे के करीब अस्पताल पहुंचे तो वहां पर तैनात स्टाफ नर्सों ने जरूरी उपचार दिया और उसे रुकने की सलाह दी। दो घंटे के बाद जब उसकी पीड़ा असहनीय हो गई तो डाक्टर साहिबा को जगाया गया। उन्होंने चेकअप किया और उसे मरीज के तीमारदारों को बाहर ले जाने की सलाह दे दी। गर्भवती महिला के तीमारदारों ने उनसे कुछ बात करनी चाही लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया और सोने के लिए कमरे में चली गईं। डाक्टर की सलाह पर सोना के परिजन उसे नर्सिंगहोम के लिए अस्पताल से बाहर ले गए।
विज्ञापन
शहर के बैंक कालोनी पांडेय नगर में अस्थाई रूप से निवास कर रही सरावन गांव निवासी मोनिका को जब पीड़ा हुई तो भोर के चार बजे के आसपास 108 एंबुलेंस से जिला महिला अस्पताल पहुंची। मोनिका के साथ भी सोना जैसा ही व्यवहार किया गया। स्टाफ नर्स ने उसे अटेंड किया। प्रथम जांच में सुबह आठ बजे तक रुकने की सलाह दे दी। महिला के पति विवेक ने डाक्टर को बुलाने का आग्रह किया। इस पर डाक्टर को बुलाया गया। डाक्टर ने चेकअप किया। बड़ी परेशानी बताकर बाहर ले जाने की सलाह दे दी। डाक्टर की सलाह पर मोनिका के परिजन उसे शहर के ही एक प्राइवेट हास्पिटल के लिए लेकर चले गए।
माधौगढ़ क्षेत्र के गांव बोहरा निवासी दलित महिला प्रसव पीड़ा से परेशान हुई तो परिजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माधौगढ़ लेकर पहुंचे। यहां पर ड्यूटी पर तैनात डाक्टर ने भी रेफर कर दिया। परिजनों से उरई जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। मरीज के परिजन बबलू ने बताया कि वह सरकारी एंबुलेंस से उरई की ओर बढ़े। उन्होंने बताया कि डाक्टर ने खतरे की बात कह कर उसे रेफर कर दिया गया। इसी दौरान कुकरगांव के पास एंबुलेंस में ही उसके प्रसव हो गया। इसके बाद उसे अस्पताल ले आए जहां पर उसको उपचार दिया गया।
बाहर की दवाइयों का खेल
महिला अस्पताल में तैनात महिला डाक्टर कमीशन बाजी के चक्कर में मरीजों को बाहर की दवाएं लिखती हैं। अस्पताल के आसपास खुले मेडिकल संचालक उनके हिस्से का कमीशन उनको भेजवा देते हैं। दवा प्रतिनिधि भी दिन भर डाक्टराें के चैंबरों के आसपास नजर आते हैं।
सरकारी अस्पताल का खेल निराला है गरीबों के लिए मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं से गरीब ही वंचित रह जाते है। हालत यह है कि प्रसव पीड़ा से कराह रहीं महिलाओं के पास अगर देने के लिए पैसे नहीं है तो उनका प्रसव न कराकर गंभीर बताकर रेफर कर दिया जाता है। इसकी शिकायत मरीजों व तीमारदारों ने अधिकारियों से की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है। रात के समय तो डाक्टरों का व्यवहार भी बदल जाता है।
लक्ष्य पूरा न होने पर लग चुकी फटकार
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में भी जननी सुरक्षा योजना में प्रसव लक्ष्य में शहर समेत कई केंद्र फिसड्डी पाए गए थे। इस पर डीएम संदीप कौर ने सीएमओ, सीएमएस और सभी केंद्रों के अधीक्षकों को फटकार लगाई थी। जननी सुरक्षा योजना में लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी गई। बैठकों में अधिकारियों की फटकार का असर हकीकत में नजर नहीं आता है।
अस्पताल में सुविधाएं नहीं: सीएमएस
गर्भवती महिलाओं को रेफर करने के पीछे यहां पर जरूरी सुविधाओं का न होना भी रहता है। मरीज को झांसी मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया जाता है। अब लोग प्राइवेट में करा लें यह उनकी मर्जी। ब्लड की अत्यधिक कमी वाली महिलाओं को रात के समय रेफर करना ही एक मात्र विकल्प रहता है। अन्यथा की स्थिति में ज्यादातर प्रसव अस्पताल में ही कराए जाते है। डा. सुनीता बनौधा, सीएमएस जिला महिला अस्पताल उरई