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संक्रमण के वक्त परीक्षाएं न कराने का फैसला ही सही
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जिले में विश्वविद्यालय की परीक्षाएं न कराने के सरकार के फैसले से महाविद्यालयों के प्रबंधकों, शिक्षकों और परीक्षार्थियों सभी ने राहत की सांस ली है। हालांकि सभी परीक्षार्थियों को प्रोन्नत किए जाने के निर्णय पर मेधावियों की प्रतिभा के साथ कुछ गलत न हो, इसका पेंच अभी फंसा है।
जिस पर भी प्रबंधक एसोसिएशन का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं होगा, किसी के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। कोरोना काल में परीक्षाएं कराना कहीं से भी उचित नहीं था, ऐसे में सरकार का फैसला सराहनीय है, क्योंकि कई डिग्री कालेजों को भी संक्रमण के वक्त क्वारंटीन सेंटर भी बनाया गया था।
अब वहीं परीक्षा कराना ठीक न होता। बता दें कि जनपद में इस साल करीब 30 हजार परीक्षार्थियों ने विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में हिस्सा लिया था। लगभग सभी संकायों के कुछ न कुछ विषयों की परीक्षाएं होना बाकी हैं।
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बुंदेलखंड स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं पंडित परशुराम द्विवेदी डिग्री कालेज, जगम्मनपुर के प्रबंधक श्रवण द्विवेदी का कहना है कि उनके संगठन ने भी परीक्षाएं न कराने की मांग की थी, जिसे सरकार की ओर से स्वीकार कर लिया गया है।
फैसला परीक्षार्थियों ही नहीं प्रबंधन और शिक्षकों सभी के हित में है, क्योंकि संक्रमण के दौर में परीक्षाएं कराना खतरे से खाली नहीं है।
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के सचिव आशीष मिश्रा का कहना है कि 5 जून को ही संगठन की ओर से परीक्षाएं न कराने की मांग की गई थी। सरकार ने परीक्षार्थियों को पास करने के लिए जो फार्मूला मांगा है,
भरोसा करें कि उसकी मदद से किसी भी परीक्षार्थी के साथ कोई गलत नहीं होगा। सभी को प्रतिभा के मुताबिक ही अंक प्राप्त होंगे, ताकि किसी का कॅरियर प्रभावित न हो।
अशोक शुक्ला महिला महाविद्यालय कोंच के प्रबंधक विपिन कुमार शुक्ला का कहना है कि संक्रमण का दौर इस वक्त चरम पर है, ऐसे में परीक्षार्थियों को कालेज बुलाकर परीक्षाएं कराना आसान नहीं है।
उनके मध्य सोशल डिस्टेंसिंग रखना सबसे बड़ी चुनौती होती। जिससे कालेज प्रबंधन की मुश्किलें ही बढ़ती। सरकार ने परीक्षाएं न कराने का निर्णय कर वाकई सभी को राहत देने का काम किया है।
रामदत्त द्विवेदी डिग्री कालेज, रामपुरा के प्रबंधक गौरव द्विवेदी का कहना है कि परीक्षाएं न कराने का फैसला तो एकदम ठीक है
लेकिन साथ ही सरकार को यह भी देखना होगा कि इसके चलते किसी परीक्षार्थी के साथ अन्याय न हो, फार्मूला ऐसा तैयार हो जिससे किसी परीक्षार्थी को ऐसा न लगे कि कुछ गलत हुआ है। इसके लिए आवश्यकता पड़े तो कालेज स्तर से भी परीक्षार्थी की प्रतिभा का आकलन कराया जा सकता है।
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जिस पर भी प्रबंधक एसोसिएशन का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं होगा, किसी के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। कोरोना काल में परीक्षाएं कराना कहीं से भी उचित नहीं था, ऐसे में सरकार का फैसला सराहनीय है, क्योंकि कई डिग्री कालेजों को भी संक्रमण के वक्त क्वारंटीन सेंटर भी बनाया गया था।
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अब वहीं परीक्षा कराना ठीक न होता। बता दें कि जनपद में इस साल करीब 30 हजार परीक्षार्थियों ने विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में हिस्सा लिया था। लगभग सभी संकायों के कुछ न कुछ विषयों की परीक्षाएं होना बाकी हैं।
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बुंदेलखंड स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं पंडित परशुराम द्विवेदी डिग्री कालेज, जगम्मनपुर के प्रबंधक श्रवण द्विवेदी का कहना है कि उनके संगठन ने भी परीक्षाएं न कराने की मांग की थी, जिसे सरकार की ओर से स्वीकार कर लिया गया है।
फैसला परीक्षार्थियों ही नहीं प्रबंधन और शिक्षकों सभी के हित में है, क्योंकि संक्रमण के दौर में परीक्षाएं कराना खतरे से खाली नहीं है।
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के सचिव आशीष मिश्रा का कहना है कि 5 जून को ही संगठन की ओर से परीक्षाएं न कराने की मांग की गई थी। सरकार ने परीक्षार्थियों को पास करने के लिए जो फार्मूला मांगा है,
भरोसा करें कि उसकी मदद से किसी भी परीक्षार्थी के साथ कोई गलत नहीं होगा। सभी को प्रतिभा के मुताबिक ही अंक प्राप्त होंगे, ताकि किसी का कॅरियर प्रभावित न हो।
अशोक शुक्ला महिला महाविद्यालय कोंच के प्रबंधक विपिन कुमार शुक्ला का कहना है कि संक्रमण का दौर इस वक्त चरम पर है, ऐसे में परीक्षार्थियों को कालेज बुलाकर परीक्षाएं कराना आसान नहीं है।
उनके मध्य सोशल डिस्टेंसिंग रखना सबसे बड़ी चुनौती होती। जिससे कालेज प्रबंधन की मुश्किलें ही बढ़ती। सरकार ने परीक्षाएं न कराने का निर्णय कर वाकई सभी को राहत देने का काम किया है।
रामदत्त द्विवेदी डिग्री कालेज, रामपुरा के प्रबंधक गौरव द्विवेदी का कहना है कि परीक्षाएं न कराने का फैसला तो एकदम ठीक है
लेकिन साथ ही सरकार को यह भी देखना होगा कि इसके चलते किसी परीक्षार्थी के साथ अन्याय न हो, फार्मूला ऐसा तैयार हो जिससे किसी परीक्षार्थी को ऐसा न लगे कि कुछ गलत हुआ है। इसके लिए आवश्यकता पड़े तो कालेज स्तर से भी परीक्षार्थी की प्रतिभा का आकलन कराया जा सकता है।