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नोट बंदी : 50 दिन बाद भी हाल बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:10 PM IST
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स्टेट बैंक के एटीएम पर लगी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के 50वें दिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग सूरत देखने को मिली। शहरी क्षेत्रों में बैंक के बाहर लाइने छोटी होती दिखीं तो वहीं गांवों में लोग पैसे निकालने के लिए जद्दोजहद करते दिखाई दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर एटीएम का शटर या तो गिरा हुआ था या फिर उसके आगे कैश न होने की बात लिखी थी। नोटबंदी के 50 वें दिन शहरी क्षेत्र की
बैंकों में हालात जरूर सामान्य रहे लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति नाजुक दिखाई दी। बुधवार को भी अधिकतर ग्रामीण बैंकों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगी दिखाई दीं। इसके साथ ही कैश को लेकर भी कई जगह बखेड़ा खड़ा होता दिखाई दिया। शहरी इलाकों में बैंकों मेें पर्याप्त कैश दिखा। बुधवार को शहर के मेन रोड स्थित स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, एचडीएफसी
बैंक में ग्राहकों की भीड़ पहले की अपेक्षा कम रही। लाइन में लगे ग्राहकों को कैश तो मिला लेकिन इंतजार करना पड़ा। वहीं, एटीएम मशीनों के बाहर भी कम ग्राहक ही दिखे। वहीं, कस्बाई क्षेत्रों जालौन, कोंच, कालपी, रामपुरा स्थित बैंकों में नोटबंदी का असर अब भी देखने को मिल रहा है।
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विद्युत विभाग की वसूली प्रभावित
नोटबंदी का असर विद्युत विभाग पर भी पड़ा है। जहां प्रत्येक माह बिलों की वसूली का आधे से अधिक रुपया जमा हो जाता था वहीं इस माह मात्र 37 लाख 46 हजार रुपया ही यहां जमा हो सका। कालपी एसडीओ अजय कुमार के अनुसार नगर में 6403 उपभोक्ता हैं। इनका बिल प्रत्येक माह एक करोड़ 50 लाख रुपये आता है। 70 लाख रुपये से अधिक की वसूली प्रत्येक
माह हो जाती है। जब 8 नवंबर को नोटबंदी के एलान के बाद महीने के अंत तक 1 करोड़ 20 लाख रुपये जमा हुए थे। दिसबंर के अंत तक मात्र 37 लाख 46 हजार रुपया ही जमा हो सका जो वसूली का चौथाई हिस्सा है।
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बैंकों में हालात जरूर सामान्य रहे लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति नाजुक दिखाई दी। बुधवार को भी अधिकतर ग्रामीण बैंकों के बाहर लोगों की लंबी लाइनें लगी दिखाई दीं। इसके साथ ही कैश को लेकर भी कई जगह बखेड़ा खड़ा होता दिखाई दिया। शहरी इलाकों में बैंकों मेें पर्याप्त कैश दिखा। बुधवार को शहर के मेन रोड स्थित स्टेट बैंक, यूनियन बैंक, एचडीएफसी
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बैंक में ग्राहकों की भीड़ पहले की अपेक्षा कम रही। लाइन में लगे ग्राहकों को कैश तो मिला लेकिन इंतजार करना पड़ा। वहीं, एटीएम मशीनों के बाहर भी कम ग्राहक ही दिखे। वहीं, कस्बाई क्षेत्रों जालौन, कोंच, कालपी, रामपुरा स्थित बैंकों में नोटबंदी का असर अब भी देखने को मिल रहा है।
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विद्युत विभाग की वसूली प्रभावित
नोटबंदी का असर विद्युत विभाग पर भी पड़ा है। जहां प्रत्येक माह बिलों की वसूली का आधे से अधिक रुपया जमा हो जाता था वहीं इस माह मात्र 37 लाख 46 हजार रुपया ही यहां जमा हो सका। कालपी एसडीओ अजय कुमार के अनुसार नगर में 6403 उपभोक्ता हैं। इनका बिल प्रत्येक माह एक करोड़ 50 लाख रुपये आता है। 70 लाख रुपये से अधिक की वसूली प्रत्येक
माह हो जाती है। जब 8 नवंबर को नोटबंदी के एलान के बाद महीने के अंत तक 1 करोड़ 20 लाख रुपये जमा हुए थे। दिसबंर के अंत तक मात्र 37 लाख 46 हजार रुपया ही जमा हो सका जो वसूली का चौथाई हिस्सा है।