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Jalaun News: फर्जी तरीके से भुगतान में प्रशासन ने बीडीओ को किया था निलंबित
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फोटो - 26 बीडीओ प्रतिभा शाल्या को गिरफ्तार कर ले जाती विजिलेंस टीम। संवाद
उरई। कदौरा ब्लॉक में तैनाती के दौरान बीडीओ प्रतिभा शाल्या को प्रशासन ने फर्जी भुगतान के मामले में निलंबित कर दिया था। बाद में बीडीओ ने कोर्ट से दरवाजा खटखटाया। राहत मिलने के बाद दोबारा पदभार लिया था।
कदौरा ब्लॉक में तैनात रही बीडीओ प्रतिभा शाल्या पर मनरेगा के कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगा था। ब्लॉक के इमलिया गांव में जलरोधक बांध निर्माण कार्य में अनियमित बरती गई थी। इसके साथ ही फर्जी तरीके से करीब तीन लाख का भुगतान किया गया था।
शिकायत मिलने पर पूरे मामले की जांच जिलाधिकारी ने डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह कुशवाहा को दी थी। जांच के दौरान आरोप सही पाए जाने पर उन्होंने पूरी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी। इस पर तत्कालीन बीडीओ को विकासखंड से हटाकर शासन से संबंध कर दिया था। 22 मार्च 2025 को शासन ने उसे निलंबित कर दिया था। इसके बाद उसे कोर्ट से राहत मिली थी और उसने दोबारा से कदौरा का पदभार ग्रहण किया था।
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बिना कमीशन के नहीं हो रहा था ब्लॉक से कोई भुगतान
ब्लॉक में काम करने वाले ठेकेदारों व रोजगार सेवकों ने बताया कि बीडीओ का काम करने का तरीका एकदम से तानाशाह पूर्ण था। पीड़ितों की माने तो कोई भी भुगतान बिना रुपये के नहीं होता था। बताया कि कच्चे काम का कमीशन 12 प्रतिशत व पक्के काम का कमीशन आठ प्रतिशत बीडीओ को देना पड़ता था तब जाकर भुगतान होता था।
कार्यालय से पीड़ित ने आवास पर बुलाया था
करीब चार बजे पीड़ित ठेकेदार ने बीडीओ के चालक से उन्हें आवास पर बुलाने की बात कही। इस पर बीडीओ तुरंत ही आवास पर आ गईं। इसके बाद पीड़ित और उसके साथ एक और साथी वहां पहुंचे और पीड़ित ने बीडीओ को एक लाख रुपये दे दिए। तभी पहले ही सादा वर्दी में मौजूद टीम के लोग जैसे ही अंदर पहुंचे तो बीडीओ ने रुपयों को फेंक दिया और पत्थर उठाकर मारने लगी। तभी टीम उसे अपने साथ ले गई।
सरकारी आवास पर छापा, विजिलेंस टीम ने मौके से बरामद की रिश्वत की रकम
सूत्रों के मुताबिक बुधवार को पूर्व निर्धारित योजना के तहत ठेकेदार ने बीडीओ प्रतिभा शाल्या को भुगतान के नाम पर सरकारी आवास पर बुलाया था। ठेकेदार ने कार्यालय में पर्ची देकर मैडम, आवास पर आओ लिखकर उन्हें बुलाने का संकेत दिया था। इसी दौरान झांसी से आई सतर्कता विजिलेंस टीम आवास के आसपास पहले से ही तैनात थी और पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही थी। जैसे ही बीडीओ ने ठेकेदार से एक लाख रुपये लिए, विजिलेंस टीम तुरंत हरकत में आई और उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम सिविल ड्रेस में थी, जिससे बीडीओ को संदेह हुआ और उन्होंने पकड़े जाने के डर से रुपये फेंकने का प्रयास भी किया लेकिन टीम ने मौके से पूरी रकम बरामद कर ली।
टीम ने जब बीडीओ को अपने साथ चलने के लिए कहा तो उन्होंने विरोध जताया और बाहर की ओर दौड़ने लगीं। इस पर टीम की महिला कांस्टेबल किरण पाल और हेमलता ने उन्हें दौड़कर पकड़ लिया और समझाते हुए सरकारी गाड़ी में बैठाया। इसके बाद विजिलेंस टीम बीडीओ को पास के थाने लेकर पहुंची, जहां कागजी कार्रवाई और पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। टीम में इंस्पेक्टर शेषमणि त्रिपाठी, अतुल कुमार आदि के साथ अन्य टीम मौजूद रहे
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कदौरा ब्लॉक में तैनात रही बीडीओ प्रतिभा शाल्या पर मनरेगा के कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगा था। ब्लॉक के इमलिया गांव में जलरोधक बांध निर्माण कार्य में अनियमित बरती गई थी। इसके साथ ही फर्जी तरीके से करीब तीन लाख का भुगतान किया गया था।
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शिकायत मिलने पर पूरे मामले की जांच जिलाधिकारी ने डीसी मनरेगा रामेंद्र सिंह कुशवाहा को दी थी। जांच के दौरान आरोप सही पाए जाने पर उन्होंने पूरी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी। इस पर तत्कालीन बीडीओ को विकासखंड से हटाकर शासन से संबंध कर दिया था। 22 मार्च 2025 को शासन ने उसे निलंबित कर दिया था। इसके बाद उसे कोर्ट से राहत मिली थी और उसने दोबारा से कदौरा का पदभार ग्रहण किया था।
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बिना कमीशन के नहीं हो रहा था ब्लॉक से कोई भुगतान
ब्लॉक में काम करने वाले ठेकेदारों व रोजगार सेवकों ने बताया कि बीडीओ का काम करने का तरीका एकदम से तानाशाह पूर्ण था। पीड़ितों की माने तो कोई भी भुगतान बिना रुपये के नहीं होता था। बताया कि कच्चे काम का कमीशन 12 प्रतिशत व पक्के काम का कमीशन आठ प्रतिशत बीडीओ को देना पड़ता था तब जाकर भुगतान होता था।
कार्यालय से पीड़ित ने आवास पर बुलाया था
करीब चार बजे पीड़ित ठेकेदार ने बीडीओ के चालक से उन्हें आवास पर बुलाने की बात कही। इस पर बीडीओ तुरंत ही आवास पर आ गईं। इसके बाद पीड़ित और उसके साथ एक और साथी वहां पहुंचे और पीड़ित ने बीडीओ को एक लाख रुपये दे दिए। तभी पहले ही सादा वर्दी में मौजूद टीम के लोग जैसे ही अंदर पहुंचे तो बीडीओ ने रुपयों को फेंक दिया और पत्थर उठाकर मारने लगी। तभी टीम उसे अपने साथ ले गई।
सरकारी आवास पर छापा, विजिलेंस टीम ने मौके से बरामद की रिश्वत की रकम
सूत्रों के मुताबिक बुधवार को पूर्व निर्धारित योजना के तहत ठेकेदार ने बीडीओ प्रतिभा शाल्या को भुगतान के नाम पर सरकारी आवास पर बुलाया था। ठेकेदार ने कार्यालय में पर्ची देकर मैडम, आवास पर आओ लिखकर उन्हें बुलाने का संकेत दिया था। इसी दौरान झांसी से आई सतर्कता विजिलेंस टीम आवास के आसपास पहले से ही तैनात थी और पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही थी। जैसे ही बीडीओ ने ठेकेदार से एक लाख रुपये लिए, विजिलेंस टीम तुरंत हरकत में आई और उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। टीम सिविल ड्रेस में थी, जिससे बीडीओ को संदेह हुआ और उन्होंने पकड़े जाने के डर से रुपये फेंकने का प्रयास भी किया लेकिन टीम ने मौके से पूरी रकम बरामद कर ली।
टीम ने जब बीडीओ को अपने साथ चलने के लिए कहा तो उन्होंने विरोध जताया और बाहर की ओर दौड़ने लगीं। इस पर टीम की महिला कांस्टेबल किरण पाल और हेमलता ने उन्हें दौड़कर पकड़ लिया और समझाते हुए सरकारी गाड़ी में बैठाया। इसके बाद विजिलेंस टीम बीडीओ को पास के थाने लेकर पहुंची, जहां कागजी कार्रवाई और पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। टीम में इंस्पेक्टर शेषमणि त्रिपाठी, अतुल कुमार आदि के साथ अन्य टीम मौजूद रहे