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Jalaun News: पूरे दिन नहीं चमके सूरज, गलन और शीतलहर से सिकुड़े लोग
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उरई। मंगलवार की सर्दी सीजन के लिहाज से रिकार्ड तोड़ रही। पूरे दिन सूरज नहीं चमके ओर शीतललहर, गलन की वजह से लोगों को सिकुड़ने को मजबूर होना पड़ा।
न्यूनतम तापमान पांच और अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रहा। ये दोनों ही आंकड़े ठंड के लिहाज से अब तक की सबसे ज्यादा सर्दी वाले साबित हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार कोहरे और गलन का यह असर अभी सप्ताह भर और देखा जा सकता है। कोहरे की वजह से जहां सड़कों का यातायात धीमा रहा वहीं ट्रेनों की लेटलतीफी भी जारी रही।
सुबह से ही गलन और कोहरे का असर दिखा। सोमवार की देर रात से ही ठंड का असर शुरू हो गया था। शहर में कई जगहों पर अलाव जल रहे थे तो जहां लकड़ी नहीं मिली लोग कचरा, पन्नी जलाते नजर आए। यह स्थिति आंबेडकर चौराहे पर एक पुलिसकर्मी पन्नी जलाकर अलाव तापने की कोशिश कर रहा था। यही स्थिति क्लब के सामने एक दुकानदार इकराम की भी रही, वह कागज और पन्नी जलाकर ठंड से बचने की कोशिश कर रहा था।
पालिका के सामने एक दुकानदार पन्नियां इकट्ठा कर अलाव के लिए लेकर आया और ठंड भगाने की कोशिश करता दिखा। इसके साथ ही जिला परिषद पर भी अलाव के लिए लकड़ी की स्थिति ठीक नहीं मिली। कोंच स्टैंड के पास रैन बसेरे पर अलाव जलता मिला, लेकिन अधिकांश जगह लकड़ी न होने की शिकायतें भी रहीं।
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उरई। झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर ग्वालियर से बरौनी जाने वाली छपरा मेल का 36 दिन बाद संचालन फिर से शुरू हो गया। ट्रैक मरम्मत और कोहरे के कारण इस ट्रेन का संचालन रेल प्रशासन ने रोक दिया था। यह ट्रेन 11 दिसंबर से बंद चल रही थी। इससे यात्रियों को खासी दिक्कत हो रही थी। मंगलवार को पहले ही दिन इस ट्रेन के जनरल टिकट 96 बिके और 10 रिजर्वेशन भी हुए।
वहीं, बरौनी से ग्वालियर जाने वाली ट्रेन का संचालन बुधवार से होगा। अभी इन दोनों ट्रेनों को नियमित रूप से बहाल नहीं किया गया है। इन ट्रेनों में ग्वालियर से बरौनी जाने वाली ट्रेन 26 फरवरी तक सोमवार और गुरुवार को संचालित नहीं होगी। बरौनी से ग्वालियर जाने वाली ट्रेन भी 27 फरवरी तक नियमित नहीं चलेगी। यह ट्रेन मंगलवार और शुक्रवार को संचालित नहीं होगी।
कोहरे व रूट डायवर्जन के कारण कई ट्रेनें घंटों देरी से आ रही हैं। इनमें पनवेल से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन 17 घंटे 40 मिनट देरी से आई। गोरखपुर से मुंबई अंत्योदय एक्सप्रेस छह घंटे, इंदौर से पटना एक्सप्रेस सात घंटे 47 मिनट, झांसी से लखनऊ पैसेंजर दो घंटे 40 मिनट, कोच्चिवैली से गोरखपुर राप्तीसागर एक्सप्रेस तीन घंटे देरी से आई।
समस्तीपुर (बिहार) निवासी एसएन झा यहां महर्षि विद्या मंदिर में शिक्षक हैं। वह छपरा मेल से घर गए। उन्होंने बताया कि छपरा मेल बिहार जाने वाली सीधी ट्रेन है। इस ट्रेन का वह दो बार रिजर्वेशन करा चुके हैं। दो बार निरस्तीकरण के चलते नहीं जा पाए। अब ट्रेन का संचालन होने पर वह जा रहे हैं।
बड़ागांव निवासी बालमुकुंद का कहना है कि वह आंंखों के इलाज के लिए लखनऊ जाना था। इसके लिए उन्होंने झांसी-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस भी कराई थी, लेकिन सर्दी के कारण वह सुबह नहीं जा पाए। अब वह छपरा मेल से लखनऊ तक जा पाएंगे। यह ट्रेन लखनऊ और ग्वालियर जाने वालों के लिए सबसे अच्छी ट्रेन है।
मुहम्मदाबाद। जिले में मटर की फसल करीब 1.30 लाख हेक्टेयर में होती है। पाला गिरने से मटर की फली जमीन को छू रही है। खेत की जमीन गीली होने से उस फली के सड़ने से खतरा बढ़ गया है। जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि सर्दी में पाला गिरना ज्यादातर फसलों के लिए मुफीद है। गेहूं के लिए तो यह काफी लाभदायक है। दाल, सरसों को भी इससे खतरा नहीं है। सिर्फ मटर की फसल को नुकसान है। आखिरी चरण में चल रही मटर की तुड़ाई इस पाले की वजह से रुक गई है। पाले की वजह से मटर गीली और भारी होकर जमीन को छू रही है। गीली जमीन होने की वजह से उसके सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
उरई। सर्दी के आखिरी चरण में भी प्रकोप का ऐसा असर है कि ऊनी कपड़ों की खूब खरीदारी हो रही है। मंगल बाजार के दिन ऊनी कपड़ों की दुकानें सजी रहीं। यहां काफी संख्या में भीड़ पहुंची। दुकानदार रमेश कुमार ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा जनवरी के इस दूसरे सप्ताह में मंगलवार के बाजार में 40 फीसरी तक ज्यादा ऊनी कपड़ों की बिक्री हुई है। सबसे ज्यादा स्वेटर, टोपी और मफलर बिक रहे हैं। बच्चों के कपड़े ज्यादा बिक रहे हैं। इसके साथ ही जैकेट की भी खूब डिमांड है।
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न्यूनतम तापमान पांच और अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रहा। ये दोनों ही आंकड़े ठंड के लिहाज से अब तक की सबसे ज्यादा सर्दी वाले साबित हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार कोहरे और गलन का यह असर अभी सप्ताह भर और देखा जा सकता है। कोहरे की वजह से जहां सड़कों का यातायात धीमा रहा वहीं ट्रेनों की लेटलतीफी भी जारी रही।
सुबह से ही गलन और कोहरे का असर दिखा। सोमवार की देर रात से ही ठंड का असर शुरू हो गया था। शहर में कई जगहों पर अलाव जल रहे थे तो जहां लकड़ी नहीं मिली लोग कचरा, पन्नी जलाते नजर आए। यह स्थिति आंबेडकर चौराहे पर एक पुलिसकर्मी पन्नी जलाकर अलाव तापने की कोशिश कर रहा था। यही स्थिति क्लब के सामने एक दुकानदार इकराम की भी रही, वह कागज और पन्नी जलाकर ठंड से बचने की कोशिश कर रहा था।
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पालिका के सामने एक दुकानदार पन्नियां इकट्ठा कर अलाव के लिए लेकर आया और ठंड भगाने की कोशिश करता दिखा। इसके साथ ही जिला परिषद पर भी अलाव के लिए लकड़ी की स्थिति ठीक नहीं मिली। कोंच स्टैंड के पास रैन बसेरे पर अलाव जलता मिला, लेकिन अधिकांश जगह लकड़ी न होने की शिकायतें भी रहीं।
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उरई। झांसी-कानपुर रेलमार्ग पर ग्वालियर से बरौनी जाने वाली छपरा मेल का 36 दिन बाद संचालन फिर से शुरू हो गया। ट्रैक मरम्मत और कोहरे के कारण इस ट्रेन का संचालन रेल प्रशासन ने रोक दिया था। यह ट्रेन 11 दिसंबर से बंद चल रही थी। इससे यात्रियों को खासी दिक्कत हो रही थी। मंगलवार को पहले ही दिन इस ट्रेन के जनरल टिकट 96 बिके और 10 रिजर्वेशन भी हुए।
वहीं, बरौनी से ग्वालियर जाने वाली ट्रेन का संचालन बुधवार से होगा। अभी इन दोनों ट्रेनों को नियमित रूप से बहाल नहीं किया गया है। इन ट्रेनों में ग्वालियर से बरौनी जाने वाली ट्रेन 26 फरवरी तक सोमवार और गुरुवार को संचालित नहीं होगी। बरौनी से ग्वालियर जाने वाली ट्रेन भी 27 फरवरी तक नियमित नहीं चलेगी। यह ट्रेन मंगलवार और शुक्रवार को संचालित नहीं होगी।
कोहरे व रूट डायवर्जन के कारण कई ट्रेनें घंटों देरी से आ रही हैं। इनमें पनवेल से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन 17 घंटे 40 मिनट देरी से आई। गोरखपुर से मुंबई अंत्योदय एक्सप्रेस छह घंटे, इंदौर से पटना एक्सप्रेस सात घंटे 47 मिनट, झांसी से लखनऊ पैसेंजर दो घंटे 40 मिनट, कोच्चिवैली से गोरखपुर राप्तीसागर एक्सप्रेस तीन घंटे देरी से आई।
समस्तीपुर (बिहार) निवासी एसएन झा यहां महर्षि विद्या मंदिर में शिक्षक हैं। वह छपरा मेल से घर गए। उन्होंने बताया कि छपरा मेल बिहार जाने वाली सीधी ट्रेन है। इस ट्रेन का वह दो बार रिजर्वेशन करा चुके हैं। दो बार निरस्तीकरण के चलते नहीं जा पाए। अब ट्रेन का संचालन होने पर वह जा रहे हैं।
बड़ागांव निवासी बालमुकुंद का कहना है कि वह आंंखों के इलाज के लिए लखनऊ जाना था। इसके लिए उन्होंने झांसी-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस भी कराई थी, लेकिन सर्दी के कारण वह सुबह नहीं जा पाए। अब वह छपरा मेल से लखनऊ तक जा पाएंगे। यह ट्रेन लखनऊ और ग्वालियर जाने वालों के लिए सबसे अच्छी ट्रेन है।
मुहम्मदाबाद। जिले में मटर की फसल करीब 1.30 लाख हेक्टेयर में होती है। पाला गिरने से मटर की फली जमीन को छू रही है। खेत की जमीन गीली होने से उस फली के सड़ने से खतरा बढ़ गया है। जिला कृषि अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि सर्दी में पाला गिरना ज्यादातर फसलों के लिए मुफीद है। गेहूं के लिए तो यह काफी लाभदायक है। दाल, सरसों को भी इससे खतरा नहीं है। सिर्फ मटर की फसल को नुकसान है। आखिरी चरण में चल रही मटर की तुड़ाई इस पाले की वजह से रुक गई है। पाले की वजह से मटर गीली और भारी होकर जमीन को छू रही है। गीली जमीन होने की वजह से उसके सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
उरई। सर्दी के आखिरी चरण में भी प्रकोप का ऐसा असर है कि ऊनी कपड़ों की खूब खरीदारी हो रही है। मंगल बाजार के दिन ऊनी कपड़ों की दुकानें सजी रहीं। यहां काफी संख्या में भीड़ पहुंची। दुकानदार रमेश कुमार ने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा जनवरी के इस दूसरे सप्ताह में मंगलवार के बाजार में 40 फीसरी तक ज्यादा ऊनी कपड़ों की बिक्री हुई है। सबसे ज्यादा स्वेटर, टोपी और मफलर बिक रहे हैं। बच्चों के कपड़े ज्यादा बिक रहे हैं। इसके साथ ही जैकेट की भी खूब डिमांड है।