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ओवरलोड ट्रकों ने बिगाड़ी व्यवस्था, दरका पुल
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sun, 19 Jun 2016 11:11 PM IST
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कालपी स्थित यमुना का चटका हुआ पुराना पुल।
- फोटो : अमर उजाला
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1982 से संचालित यमुना का पुराना पुल लगातार ओवरलोड वाहनों को झेलता रहा। इसके चलते यह पुल वर्ष 2012-13 में दरकने लगा। इसकी कोठियों की स्प्रिंग खराब हो गई। इसके बाद 2014-15 में दोबारा पुल खराब हो गया और इसे तब तीन माह के लिए बंद कर दिया गया। हालांकि इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम ने इस पुल को पूरी तरह बंद करने की सिफारिश की थी। यह भी कहा था
कि यदि किसी भी हालत में यह पुल दोबारा संचालित किया जाए तो इस पर ओवरलोड वाहन नहीं चलने चाहिए। इसके बावजूद इस पुल को न सिर्फ चालू किया गया बल्कि इस पर ओवरलोड वाहन भी बदस्तूर चलते रहे। इसके चलते अब एक बार फिर यह पुल दरक गया है। विभागीय अधिकारी इस संबंध में कुछ भी साफ बोलने से कतरा रहे हैं। कानपुर-झांसी मार्ग पर कालपी के पास यमुना नदी पर पुराने
पुल का निर्माण एनबीसीसी कंपनी ने किया था। इस पुल का निर्माण 1977 में शुरू हुुआ और 1982 में एक किलोमीटर लंबा पुल करोड़ों रुपये से बनकर तैयार हुआ था। कानपुर झांसी एनएच 25 पर इस पुल के बनने से ही सड़क मार्ग पर यातायात शुरू हुआ था। 2012 तक तो पुल पर सामान्य रूप से यातायात चलता रहा, पर 2012-13 में पुल की गई कोठियों की स्प्रिंग खराब हो गई। तब इस पुल को एक
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माह के लिए बंद किया गया। इसे बाद 2014-15 में भी पुल में लगी बेयरिंग भी खराब हो गई। तब भी पुल को तीन माह के लिए बंद किया गया था। नई तकनीक से बेयरिंग डालने के बाद पुल को चालू किया गया। बेयरिंग बदलने आई टीम व 12-13 में स्प्रिंग सही करने आई तकनीकी टीमों ने पुल से ओवरलोड वाहन निकलने को लेकर खतरे की आशंका जताई थी।
सुविधा पर दबंगई हावी
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार नए पुल से एक बार में दो वाहनों का निकलना मुश्किल था। वहीं किसी नए पुल के निर्माण के लिए करोड़ों की लागत आती। साथ ही शासन को इसकी रिपोर्ट भी भेजनी होती जिसमें वर्षों का समय लग जाता। इसे देखते हुए पुराने पुल की मरम्मत कर इसे हल्के और छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया। पर, दबंग ओवरलोड वाहन चालकों, ट्रक मालिकों और मौरंग माफियाओं ने अपने ट्रकों को इस पुल से निकालना जारी रखा। इसके चलते इस पुल पर एक बार फिर ध्वस्त होने का खतरा खड़ा हो गया है।
एक ही पुल से चलाना पड़ेगा काम
नए पुल से दोनों तरफ का ट्रैफिक निकलने से जाम के हालात बने रहना तय है। नया पुल काफी संकरा बना हुआ है। इससे डबल ट्रैक चलने पर वाहन बेहद नजदीकी से क्रास होते हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। दुुर्घटना होने पर पुल के नीचे नदी होने से खतरा बढ़ जाता है। इससे कानपुर झांसी के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों को बड़ी परेशानी होना तय है। किसानों, व्यापारियों व दैनिक यात्रियों की भी इससे समस्याएं बढ़ेगी।
बालू माफियाओं की करनी फिर उजागर
पुल के दरकने का मुख्य कारण ओवरलोड बालू से भरे ट्रकों का निकलना बताया जा रहा है। फोरलेन अधिकारियों ने कहा कि अधिक वजन के वाहन लगातार निकाले जा रहे हैं। इसके लिए कई बार जिला व स्थानीय प्रशान से भी कहा गया। पर कोई अंकुश नहीं लग पाया। हाईवे अर्थारिटी की तरफ से खतरे के बोर्ड भी लगाए गए पर ओवरलोड वाहनों का निकलना बंद नहीं हुआ। इसलिए मजबूरन बड़ी घटना की आशंका को देखते हुए यमुना पुल का आवागमन बंद कर दिया गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बगल में ही बने नए पुल से दोनाें तरफ के वाहनों को निकाला जाएगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
हाईवे अथारिटी के जनसंपर्क अधिकारी बीएम तिवारी कहते हैं कि ओवरलोडिंग की वजह से पहले बेयरिंग व स्प्रिंग खराब हो चुकी है। पर इस बार कंक्रीट भी क्रेेक हो र्गई। यह बेहद खतरनाक स्थिति है। शनिवार को मेंटीनेंस वर्क के दौरान क्रेक देखे गए तो तुरंत वीडीओ बनाकर हेड आफिस भेजा गया। हेड आफिस से तुरंत पुल को बंद करने का निर्देश दिया गया। कहा कि अगर इतना ओवरलोड निकल रहा
है और लेयर क्रेक हो रही है तो हादसा एक या दो घंटे में भी हो सकता है। इसके बाद तुरंत ट्रैफिक रोक कर हेड आफिस को सूचना दी गई। रविवार को हेड आफिस से तकनीक टीम आई थी। पीडी नवीन मिश्रा, इंजीनियर आरके वर्मा, इंजीनियर एके शर्मा के नेतृत्व में आई टीम ने निरीक्षण में पाया कि दोनों तरफ जो मेन प्वाइंट हैं, वह उसमें कानपुर की तरफ का प्वाइंट पूरी तरह क्रेक हो गया है और झांसी
की तरफ का क्रेक होना शुरू हो गया है। टीम को शाम तक रिपोर्ट हेड आफिस को देगी। अभी तक यह तय नहीं हो पया है कि पुरानी तकनीकी से बने इस पुल में मरम्मत कैसे होगी। पुल को दोबारा शुरू होने में कम से कम चार से पांच महीने का समय लगेगा।
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कि यदि किसी भी हालत में यह पुल दोबारा संचालित किया जाए तो इस पर ओवरलोड वाहन नहीं चलने चाहिए। इसके बावजूद इस पुल को न सिर्फ चालू किया गया बल्कि इस पर ओवरलोड वाहन भी बदस्तूर चलते रहे। इसके चलते अब एक बार फिर यह पुल दरक गया है। विभागीय अधिकारी इस संबंध में कुछ भी साफ बोलने से कतरा रहे हैं। कानपुर-झांसी मार्ग पर कालपी के पास यमुना नदी पर पुराने
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पुल का निर्माण एनबीसीसी कंपनी ने किया था। इस पुल का निर्माण 1977 में शुरू हुुआ और 1982 में एक किलोमीटर लंबा पुल करोड़ों रुपये से बनकर तैयार हुआ था। कानपुर झांसी एनएच 25 पर इस पुल के बनने से ही सड़क मार्ग पर यातायात शुरू हुआ था। 2012 तक तो पुल पर सामान्य रूप से यातायात चलता रहा, पर 2012-13 में पुल की गई कोठियों की स्प्रिंग खराब हो गई। तब इस पुल को एक
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माह के लिए बंद किया गया। इसे बाद 2014-15 में भी पुल में लगी बेयरिंग भी खराब हो गई। तब भी पुल को तीन माह के लिए बंद किया गया था। नई तकनीक से बेयरिंग डालने के बाद पुल को चालू किया गया। बेयरिंग बदलने आई टीम व 12-13 में स्प्रिंग सही करने आई तकनीकी टीमों ने पुल से ओवरलोड वाहन निकलने को लेकर खतरे की आशंका जताई थी।
सुविधा पर दबंगई हावी
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिकारियों के अनुसार नए पुल से एक बार में दो वाहनों का निकलना मुश्किल था। वहीं किसी नए पुल के निर्माण के लिए करोड़ों की लागत आती। साथ ही शासन को इसकी रिपोर्ट भी भेजनी होती जिसमें वर्षों का समय लग जाता। इसे देखते हुए पुराने पुल की मरम्मत कर इसे हल्के और छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया। पर, दबंग ओवरलोड वाहन चालकों, ट्रक मालिकों और मौरंग माफियाओं ने अपने ट्रकों को इस पुल से निकालना जारी रखा। इसके चलते इस पुल पर एक बार फिर ध्वस्त होने का खतरा खड़ा हो गया है।
एक ही पुल से चलाना पड़ेगा काम
नए पुल से दोनों तरफ का ट्रैफिक निकलने से जाम के हालात बने रहना तय है। नया पुल काफी संकरा बना हुआ है। इससे डबल ट्रैक चलने पर वाहन बेहद नजदीकी से क्रास होते हैं। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। दुुर्घटना होने पर पुल के नीचे नदी होने से खतरा बढ़ जाता है। इससे कानपुर झांसी के बीच सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों को बड़ी परेशानी होना तय है। किसानों, व्यापारियों व दैनिक यात्रियों की भी इससे समस्याएं बढ़ेगी।
बालू माफियाओं की करनी फिर उजागर
पुल के दरकने का मुख्य कारण ओवरलोड बालू से भरे ट्रकों का निकलना बताया जा रहा है। फोरलेन अधिकारियों ने कहा कि अधिक वजन के वाहन लगातार निकाले जा रहे हैं। इसके लिए कई बार जिला व स्थानीय प्रशान से भी कहा गया। पर कोई अंकुश नहीं लग पाया। हाईवे अर्थारिटी की तरफ से खतरे के बोर्ड भी लगाए गए पर ओवरलोड वाहनों का निकलना बंद नहीं हुआ। इसलिए मजबूरन बड़ी घटना की आशंका को देखते हुए यमुना पुल का आवागमन बंद कर दिया गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बगल में ही बने नए पुल से दोनाें तरफ के वाहनों को निकाला जाएगा।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
हाईवे अथारिटी के जनसंपर्क अधिकारी बीएम तिवारी कहते हैं कि ओवरलोडिंग की वजह से पहले बेयरिंग व स्प्रिंग खराब हो चुकी है। पर इस बार कंक्रीट भी क्रेेक हो र्गई। यह बेहद खतरनाक स्थिति है। शनिवार को मेंटीनेंस वर्क के दौरान क्रेक देखे गए तो तुरंत वीडीओ बनाकर हेड आफिस भेजा गया। हेड आफिस से तुरंत पुल को बंद करने का निर्देश दिया गया। कहा कि अगर इतना ओवरलोड निकल रहा
है और लेयर क्रेक हो रही है तो हादसा एक या दो घंटे में भी हो सकता है। इसके बाद तुरंत ट्रैफिक रोक कर हेड आफिस को सूचना दी गई। रविवार को हेड आफिस से तकनीक टीम आई थी। पीडी नवीन मिश्रा, इंजीनियर आरके वर्मा, इंजीनियर एके शर्मा के नेतृत्व में आई टीम ने निरीक्षण में पाया कि दोनों तरफ जो मेन प्वाइंट हैं, वह उसमें कानपुर की तरफ का प्वाइंट पूरी तरह क्रेक हो गया है और झांसी
की तरफ का क्रेक होना शुरू हो गया है। टीम को शाम तक रिपोर्ट हेड आफिस को देगी। अभी तक यह तय नहीं हो पया है कि पुरानी तकनीकी से बने इस पुल में मरम्मत कैसे होगी। पुल को दोबारा शुरू होने में कम से कम चार से पांच महीने का समय लगेगा।