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Jalaun News: बुआई हो गई, लेकिन यूरिया की कमी से फसल की सेहत पर संकट
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उरई। फसलों की बुआई हो गई है। डीएपी के पर्याप्त होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन, यूरिया अभी जरूरत के सापेक्ष आधी ही उपलब्ध हो सकी है। जिला कृषि विभाग के जो आंकड़े हैं, उसमें चार माह का समय बचा है और जिले में अभी भी लक्ष्य के सापेक्ष 45 फीसदी यूरिया उपलब्ध नहीं हो पाई है। यूरिया नहीं मिली तो फसल पर संकट मंडरा सकता है।
जनपद में ढाई लाख से ज्यादा किसान हैं। ये किसान जिले की 81 सहकारी समितियों और करीब 250 खाद की दुकानों से उर्वरक खरीदते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 की बात करें तो मार्च 2024 तक जिले को 4,2785 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होती है, लेकिन शासन से अब तक 2,3549 मीट्रिक टन यूरिया यानि लक्ष्य का मात्र 55 फीसदी ही उपलब्ध हुई। इसमें जिले से 9,355 मीट्रिक टन यूरिया वितरित कर दी गई और दावा है कि शेष यूरिया 14,194 मीट्रिक टन आवश्यकतानुसार वितरित की जा रही है। लक्ष्य समय समाप्त होने में मात्र चार महीने शेष हैं, ऐसे में 18,736 मीट्रिक टन यूरिया कब तक उपलब्ध हो पाएगी।
लेट लतीफी फसलों को नुकसान न पहुंचा दे। हालांकि बुआई के समय प्रयोग होने वाली डीएमपी की स्थिति यूरिया से ठीक है। आंकड़ों के अनुसार 25,724 मीट्रिक टन के सापेक्ष 2,444 मीट्रिक टन जिले को प्राप्त हो गई। समितियों और दुकानों में 19,730 मीट्रिक टन भेज दी गई और शेष 4,712 मीट्रिक टन भेजी जा रही है। चार महीने में लक्ष्य का शेष भी जिले को उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है।
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डीएपी और यूरिया का संकट नहीं है। शासन से जो उर्वरक प्राप्त हो रही है, उसे जरूरत के हिसाब से समितियों को भेजा जा रहा है। डीएपी लक्ष्य के करीब है, यूरिया भी मार्च तक पर्याप्त पहुंचने की संभावना है। दुकानों में भी निगरानी चल रही है। महंगी बेचने या परेशान करने की स्थिति में सख्त कदम उठाया जाएगा। -गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी
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जनपद में ढाई लाख से ज्यादा किसान हैं। ये किसान जिले की 81 सहकारी समितियों और करीब 250 खाद की दुकानों से उर्वरक खरीदते हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 की बात करें तो मार्च 2024 तक जिले को 4,2785 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होती है, लेकिन शासन से अब तक 2,3549 मीट्रिक टन यूरिया यानि लक्ष्य का मात्र 55 फीसदी ही उपलब्ध हुई। इसमें जिले से 9,355 मीट्रिक टन यूरिया वितरित कर दी गई और दावा है कि शेष यूरिया 14,194 मीट्रिक टन आवश्यकतानुसार वितरित की जा रही है। लक्ष्य समय समाप्त होने में मात्र चार महीने शेष हैं, ऐसे में 18,736 मीट्रिक टन यूरिया कब तक उपलब्ध हो पाएगी।
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लेट लतीफी फसलों को नुकसान न पहुंचा दे। हालांकि बुआई के समय प्रयोग होने वाली डीएमपी की स्थिति यूरिया से ठीक है। आंकड़ों के अनुसार 25,724 मीट्रिक टन के सापेक्ष 2,444 मीट्रिक टन जिले को प्राप्त हो गई। समितियों और दुकानों में 19,730 मीट्रिक टन भेज दी गई और शेष 4,712 मीट्रिक टन भेजी जा रही है। चार महीने में लक्ष्य का शेष भी जिले को उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है।
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डीएपी और यूरिया का संकट नहीं है। शासन से जो उर्वरक प्राप्त हो रही है, उसे जरूरत के हिसाब से समितियों को भेजा जा रहा है। डीएपी लक्ष्य के करीब है, यूरिया भी मार्च तक पर्याप्त पहुंचने की संभावना है। दुकानों में भी निगरानी चल रही है। महंगी बेचने या परेशान करने की स्थिति में सख्त कदम उठाया जाएगा। -गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी