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Jalaun News: गांव की श्यामा ने बदली तस्वीर, 100 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

Mon, 03 Nov 2025 01:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Nov 2025 01:05 AM IST
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Shyama of the village changed the picture, made 100 women self-reliant
फोटो - 28 श्यामा देवी। संवाद
उरई। नदी किनारे बसे भरसूड़ा गांव की तस्वीर अब बदल चुकी है। कभी रोजगार के अभाव से जूझने वाला यह गांव आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है। इसकी शुरुआत हुई गांव की श्यामा देवी से, जिन्होंने साल 2018 में स्वयं सहायता समूह बनाकर 100 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा। श्यामा की यह पहल अब इन महिलाओं के परिवारों की जिंदगी बदल चुकी है।
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एट क्षेत्र के भरसूड़ा गांव निवासी सीता शरण की पत्नी श्यामा देवी ने बीए तक की पढ़ाई की थी। उनकी शादी गांव में हो जाने के बाद वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सकीं। उनके मन में गांव की भौगोलिक स्थिति को देखते कुछ नया करने की इच्छा थी। इस पर उन्होंने गांव की महिलाओं से समूह में काम करने की बात कही। महिलाओं ने उनसे कहा कि यहां कुछ काम नहीं है। श्यामा के मन में तो कुछ करने की ललक थी। इस पर उन्होंने महिलाओं का उत्साह बढ़ाकर समूह का गठन किया। गांव वन क्षेत्र से जुड़ा था। इस पर उन्होंने इस क्षेत्र में उगने वाले औषधीय पौधों से रोजगार का रास्ता निकाला।
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उन्होंने 20 से 25 महिलाओं को जोड़कर गिलोय सत्व, आंवला चूर्ण, तुलसी चूर्ण, दंत मंजन, बेल मुरब्बा, सहजन और आंवला का अचार बनवाना शुरू किया। साथ ही समूह की महिलाओं ने गाय के गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार की। कुछ ही समय में उनके उत्पादों की बिक्री दिल्ली, झांसी और आसपास के जिलों में शुरू हुई। इससे महिलाओं को आर्थिक सहारा मिला और आत्मविश्वास भी जागा। पहली सफलता के बाद श्यामा देवी ने 10 नए समूहों का गठन किया और करीब 100 महिलाओं को जोड़ा। इन समूहों ने ब्लॉक मुख्यालय कोंच में लगने वाली प्रदर्शनियों में उत्पादों के स्टॉल लगाए। इन उत्पादों को देखकर औषधि विभाग के प्रमुख सचिव ने समूह की सराहना की। प्रशासन को निर्देश दिया कि महिलाओं को समय-समय पर आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रशिक्षण दिलाए जाए। (संवाद)
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कोरोना काल में भी निभाई जिम्मेदारी



कोरोना महामारी के दौरान समूह की महिलाओं ने सैनिटाइजर और मास्क तैयार कर प्रशासन की मदद की।

समूह ने 10 हजार सैनिटाइजर की बोतलें और 50 हजार मास्क तैयार कर जिले के विभिन्न विभागों को उपलब्ध कराए।

इससे हुई आय से सिलाई मशीनें खरीदी गईं जिससे और महिलाओं को रोजगार मिला।





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शहर में प्रेरणा कैंटीन खोलकर महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर



वर्तमान में समूह की महिलाएं जिला महिला अस्पताल में प्रसूता महिलाओं के लिए भोजन व्यवस्था संभाल रही हैं। साथ ही प्रशासन के सहयोग से शुरू हुई प्रेरणा कैंटीन में समूह की करीब 15 महिलाएं काम कर आर्थिक सशक्तीकरण का प्रतीक बन चुकी हैं। श्यामा देवी ने बताया कि जब प्रशासन ने हमारा साथ दिया तो हौसले और बढ़ गया। अब महिलाएं किसी पर निर्भर नहीं, बल्कि परिवार का सहारा हैं।

फोटो - 28 श्यामा देवी। संवाद

फोटो - 28 श्यामा देवी। संवाद

फोटो - 28 श्यामा देवी। संवाद

फोटो - 28 श्यामा देवी। संवाद

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