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Jalaun News: सीनियर को समय से आने की फुर्सत नहीं, जूनियर चला रहे मोबाइल
Sun, 04 May 2025 12:34 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sun, 04 May 2025 12:34 AM IST
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उरई। मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाएं दूर होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। हालत यह है कि नौ बजे से शुरू होने वाली ओपीडी में सुबह दस बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंच रहे हैं। कहीं डॉक्टर के स्थान पर जूनियर इलाज कर रहे हैं, पूछने पर मरीजों को बाद में आने की सलाह देते हैं।
हालत यह है कि अगर किसी मरीज ने कुछ पूछ लिया तो उसके साथ बदसलूकी भी हो जाती है। लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों की ढील के कारण अव्यवस्थाएं बढ़ रही हैं। कार्रवाई न होने से मेडिकल स्टॉफ का लोगों के प्रति बर्ताव अच्छा नहीं है। लोगों की समस्या को देखते हुए जब शनिवार को अमर उजाला की टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची तो वहां कई कक्षों में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कुछ जगहों पर जूनियर डॉक्टर बैठे थे और मरीजों को डॉक्टर के आने का आश्वासन दे रहे थे। मरीजों ने बताया कि यहां पर डॉक्टर अपनी मर्जी से बैठते हैं, अगर कोई कुछ कहता है, तो अभद्रता करने पर उतारू हो जाते हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अरविंद त्रिवेदी कहते हैं कि यदि कोई डॉक्टर समय पर ओपीडी में न मिले तो मरीज इसकी सूचना तत्काल दें। शिकायत सही मिली तो कार्रवाई होगी।
दस बजे के बाद आएंगे डॉक्टर साहब
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोगी विभाग के कक्ष में 9 बजकर 15 मिनट पर पहुंचे तो वहां कक्ष पर खाली कुर्सियां पड़ी थीं, वहां मौजूद स्टॉफ नर्स से पूछा तो उसने कहा कि क्या काम है, डॉक्टर को दिखाने की बात की गई तो उसने बताया की डॉक्टर साहब (धीरेंद्र कुमार ) दस बजे के बाद ही आते हैं। वहां कुछ मरीज भी बैठे थे, उन्होंने बताया कि दिखाने आए थे, लेकिन इंतजार करना पड़ रहा है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ के कक्ष में नहीं डॉक्टर, मोबाइल में व्यस्त जूनियर
जब टीम 9 बजकर 20 मिनट पर स्त्री रोग विभाग में पहुंची तो वहां कक्ष में डॉ. (सुधा गंगवार) की कुर्सी खाली पड़ी थी। उनके सामने वाली कुर्सी में दो जूनियर डॉक्टर थी, लेकिन वह भी मोबाइल में व्यस्त रहींं। पूछने पर बताया कि मैडम टाइम से आएंगी। क्या काम है, बताओ।
नेत्र रोग विशेषज्ञ का पता नहीं
ओपीडी विभाग के नेत्र रोग विशेषज्ञ कक्ष में जब टीम पहुंची तो वहां से डॉ. आरएन कुशवाहा नदारद थे। दो मरीज बैठे थे, वहां मौजूद स्टॉफ से पूछने पर पता चला कि डॉक्टर साहब टाइम से आएंगे। क्या समय होगा, किसी को कोई पता नहीं। मरीजों ने बताया कि वह जल्दी इसलिए आ गए हैं, कि दिखवाकर घर निकल जाएं। लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं हैं।
सीनियर डॉक्टर की कुर्सी खाली, एक मेज पर सिर रख सो रही
ओपीडी के सीनियर ईएनटी सर्जन विभाग में सीनियर डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी थी, वहां दो महिला डॉक्टर व एक पुरुष मौजूद थे। एक महिला डॉक्टर मेज पर सिर रखकर सो रही थीं। जबकि पास में बैठा डॉक्टर भी मोबाइल में व्यस्त था। पूछने पर पता चला कि सर्जन डॉक्टर अभी आए नहीं है।
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हालत यह है कि अगर किसी मरीज ने कुछ पूछ लिया तो उसके साथ बदसलूकी भी हो जाती है। लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों की ढील के कारण अव्यवस्थाएं बढ़ रही हैं। कार्रवाई न होने से मेडिकल स्टॉफ का लोगों के प्रति बर्ताव अच्छा नहीं है। लोगों की समस्या को देखते हुए जब शनिवार को अमर उजाला की टीम मेडिकल कॉलेज पहुंची तो वहां कई कक्षों में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कुछ जगहों पर जूनियर डॉक्टर बैठे थे और मरीजों को डॉक्टर के आने का आश्वासन दे रहे थे। मरीजों ने बताया कि यहां पर डॉक्टर अपनी मर्जी से बैठते हैं, अगर कोई कुछ कहता है, तो अभद्रता करने पर उतारू हो जाते हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य अरविंद त्रिवेदी कहते हैं कि यदि कोई डॉक्टर समय पर ओपीडी में न मिले तो मरीज इसकी सूचना तत्काल दें। शिकायत सही मिली तो कार्रवाई होगी।
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दस बजे के बाद आएंगे डॉक्टर साहब
मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोगी विभाग के कक्ष में 9 बजकर 15 मिनट पर पहुंचे तो वहां कक्ष पर खाली कुर्सियां पड़ी थीं, वहां मौजूद स्टॉफ नर्स से पूछा तो उसने कहा कि क्या काम है, डॉक्टर को दिखाने की बात की गई तो उसने बताया की डॉक्टर साहब (धीरेंद्र कुमार ) दस बजे के बाद ही आते हैं। वहां कुछ मरीज भी बैठे थे, उन्होंने बताया कि दिखाने आए थे, लेकिन इंतजार करना पड़ रहा है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ के कक्ष में नहीं डॉक्टर, मोबाइल में व्यस्त जूनियर
जब टीम 9 बजकर 20 मिनट पर स्त्री रोग विभाग में पहुंची तो वहां कक्ष में डॉ. (सुधा गंगवार) की कुर्सी खाली पड़ी थी। उनके सामने वाली कुर्सी में दो जूनियर डॉक्टर थी, लेकिन वह भी मोबाइल में व्यस्त रहींं। पूछने पर बताया कि मैडम टाइम से आएंगी। क्या काम है, बताओ।
नेत्र रोग विशेषज्ञ का पता नहीं
ओपीडी विभाग के नेत्र रोग विशेषज्ञ कक्ष में जब टीम पहुंची तो वहां से डॉ. आरएन कुशवाहा नदारद थे। दो मरीज बैठे थे, वहां मौजूद स्टॉफ से पूछने पर पता चला कि डॉक्टर साहब टाइम से आएंगे। क्या समय होगा, किसी को कोई पता नहीं। मरीजों ने बताया कि वह जल्दी इसलिए आ गए हैं, कि दिखवाकर घर निकल जाएं। लेकिन यहां डॉक्टर ही नहीं हैं।
सीनियर डॉक्टर की कुर्सी खाली, एक मेज पर सिर रख सो रही
ओपीडी के सीनियर ईएनटी सर्जन विभाग में सीनियर डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी थी, वहां दो महिला डॉक्टर व एक पुरुष मौजूद थे। एक महिला डॉक्टर मेज पर सिर रखकर सो रही थीं। जबकि पास में बैठा डॉक्टर भी मोबाइल में व्यस्त था। पूछने पर पता चला कि सर्जन डॉक्टर अभी आए नहीं है।