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नर्मदेश्वर में उमड़ती है भक्तों की आस्था

Mon, 02 Aug 2021 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Aug 2021 12:00 AM IST
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लोगों की आस्था का केंद्र नर्मदेश्वर मंदिर। - फोटो : ORAI
जालौन। सावन मास में नगर में स्थित प्राचीन नर्मदेश्वर मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र रहता है। नगर में औरैया रोड स्थित प्राचीन नमर्देश्वर शिव मंदिर में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ी रहती है। वैसे तो प्रतिदिन ही शिवभक्त भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए इस मंदिर में आते हैं। पर सावन के सोमवार को यहां महादेव के भक्तों का हुजूम उमड़ा रहता है।
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नर्मदेश्वर मंदिर का निर्माण नगर के सेठ लक्ष्मीनारायण ने कराया था। वर्ष 1953 में निर्मित इस मंदिर की स्थापना शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा की गई थी। स्थापना के मौके पर ज्योति मठ व द्वारिकापीठ के शंकराचार्य भी शामिल हुए थे। किंवदंतियों के अनुसार एक बार सेठ लक्ष्मी नारायण होशंगाबाद के पास स्थित नर्मदा नदी में स्नान के लिए गए थे। स्नान के दौरान उन्हें भगवान शिव का शिवलिंग मिला। इसके बाद उनके छोटे भाई रूपचंद्र माहेश्वरी शिवलिंग को पैदल यात्रा कर जालौन लाए। जहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की गई। माना जाता है इस मंदिर में स्थापित भगवान शिव के पास जो भक्त पूर्ण मनोयोग से अपनी मनोकामना लेकर आते हैं उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती है। वर्ष 2000 में मंदिर का जीर्णोद्धार कर मंदिर को विशेष भव्यता प्रदान की गई। अब इस मंदिर पर दूर से दूर से शिवभक्त भगवान महादेव का महाभिषेक करने आते हैं।
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फोटो-16-गायर के तालाब में उगी घास। संवाद
सौ साल पुराने तालाब में उगी घास
जालौन। सौ साल पुराना तालाब ग्रामीणों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। आलम यह है कि तालाब में पानी की जगह घास उग आई है।
बताते चलें कि विकास खंड के ग्राम गायर में मंदिर के पास प्राचीन तालाब स्थिति है। गांव के जल स्तर को बनाए रखने, पशुओं पक्षियों को गर्मी के मौसम में पेयजल उपलब्ध कराने एवं लोगों को कपड़े धोने जैसी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए गांव में लगभग 100 वर्ष पूर्व तालाब बनाया गया था। गर्मी के मौसम में होने वाली आगजनी की घटनाओं के दौरान भी ग्रामीण इसके पानी का प्रयोग करते थे। गांव का तालाब पानी से भरा रहे एवं इसका उपयोग सिंचाई के लिए भी हो सके। इसके लिए सिंचाई विभाग ने तालाब को भरने के लिए ट्यूबवेल भी लगाया है। गांव में स्थित 2 एकड़ का तालाब ग्रामीणों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है।
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ग्रामीणों द्वारा लगातार उसमें कूड़ा डालने एवं तालाब पर गांव के कुछ व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण करने के कारण तालाब का क्षेत्रफल कम होता जा रहा है। प्रशासन द्वारा तालाब के अतिक्रमण को को हटाने व उसकी सफाई न कराए जाने के कारण तालाब में घास उग आई है। तालाब में उगी घास के कारण ग्रामीण उसमें पशुओं तक को पानी नहीं पीने देते हैं। तालाब में उगी घास के कारण तालाब के पानी का भी उपयोग बंद हो गया है। सचिव नीता राठौर ने बताया कि गांव में एक और तालाब है जिसकी खुदाई कराई जा रही है। भविष्य में इसके लिए भी कार्ययोजना बनाई जाएगी।
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