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ख्वाब आंखों में मुहब्बत के सजाता सावन...
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न्यू लाइफ में आयोजित काव्य गोष्ठी में काव्य पाठ करते कवि।
- फोटो : ORAI
उरई। न्यू लाइफ पब्लिक स्कूल में यज्ञदत्त त्रिपाठी की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार विनोद गौतम के संचालन में काव्यगोष्ठी हुई। इसमें कवि और शायरों ने गांधी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर रविशंकर अग्रवाल को श्रद्धांजलि दी। गोष्ठी की शुरुआत सुरेश चंद्र त्रिपाठी की वंदना और नईम की नातेपाक से हुई।
प्रदीप दीक्षित ने कहा कि विद्यालय के साथ मेरे जीवन में जो रिक्ति आई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। पहचान संस्था के अध्यक्ष कशफी ने कहा साहित्य से रवि अग्रवाल का लगाव रहा और वह शायरों कवियों के अति निकट आ गए थे। परवेज अख्तर ने पढ़ा-जबसे मुहब्बत की फसल सूख गई, चेहरे इंसानों के लगने लगे बंजर कितने। सिद्धार्थ त्रिपाठी ने सुनाया-हमने पूछा रोटी
लै हो नासमिटन ने हां कर दई। प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम ने पढ़ा- जा रहे हैं आप हमको याद आएंगे बहुत, आपसे बावास्ता लम्हे भी रुलायेंगे बहुत। शिखा गर्ग ने पढ़ा-ख्वाब आंखों में मुहब्बत के सजाता सावन, दिल में उम्मीद की कलियों को खिलाता सावन। शफीकुर्रहमान कशफी ने पढ़ा- कलाम मेरा है पर रंग तो दबीर का है, ये मेरे हाथ में कांसा उसी फकीर का।
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अभिषेक सरल ने पढ़ा-आस छोड़ दो कोई अवतार लेकर नहीं आएगा, रणभूमि की रणभेरी में मधुर राग नहीं सुनाएगा। संचालन गीतकार विनोद गौतम ने किया। पुष्पेंद्र पुष्प,फरीद अली बशर ने भी काव्य पाठ किया।
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प्रदीप दीक्षित ने कहा कि विद्यालय के साथ मेरे जीवन में जो रिक्ति आई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। पहचान संस्था के अध्यक्ष कशफी ने कहा साहित्य से रवि अग्रवाल का लगाव रहा और वह शायरों कवियों के अति निकट आ गए थे। परवेज अख्तर ने पढ़ा-जबसे मुहब्बत की फसल सूख गई, चेहरे इंसानों के लगने लगे बंजर कितने। सिद्धार्थ त्रिपाठी ने सुनाया-हमने पूछा रोटी
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लै हो नासमिटन ने हां कर दई। प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम ने पढ़ा- जा रहे हैं आप हमको याद आएंगे बहुत, आपसे बावास्ता लम्हे भी रुलायेंगे बहुत। शिखा गर्ग ने पढ़ा-ख्वाब आंखों में मुहब्बत के सजाता सावन, दिल में उम्मीद की कलियों को खिलाता सावन। शफीकुर्रहमान कशफी ने पढ़ा- कलाम मेरा है पर रंग तो दबीर का है, ये मेरे हाथ में कांसा उसी फकीर का।
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अभिषेक सरल ने पढ़ा-आस छोड़ दो कोई अवतार लेकर नहीं आएगा, रणभूमि की रणभेरी में मधुर राग नहीं सुनाएगा। संचालन गीतकार विनोद गौतम ने किया। पुष्पेंद्र पुष्प,फरीद अली बशर ने भी काव्य पाठ किया।