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Jalaun News: तौल को लेकर विभागों के अफसरों में रार, एफसीआई के कांटे से लिया गया वजन
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उरई। कोटेदारों तक पहुंचने वाले गल्ले की तौल को लेकर दो विभागों के अधिकारियों के बीच रार हो गई।
एक अधिकारी अपने कांटे में मामूली अंतर की खराबी बता रहे हैं तो दूसरे कांटे को ठीक करने के लिए कह रहे हैं। इसी रार के बीच गुरुवार को गल्ला एसडब्ल्यूसी में नहीं तौला गया। ट्रकों को तौल के लिए फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के गोदाम ले जाया गया।
कोटेदारों के यहां पहुंचने से पहले ठेकेदारों का गल्ला उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम (एसडब्ल्यूसी) पहुंचता है। यहां से तौल के बाद आगे की कार्यवाही होती है। कोटेदार एसडब्ल्यूसी के कांटे को लेकर सवाल खड़ा कर रहे थे। बुधवार को नए कांटे से तौल को लेकर मुद्दा उठा तो विवाद में ट्रकों का गल्ला तौला ही नहीं जा सका। 24 घंटे से भी ज्यादा समय तक ट्रक वहीं खड़े रहे। कांटा जब दूसरे दिन भी नहीं बदला गया तो फिर निर्णय लिया गया कि ट्रकों को एफसीआई के कांटे पर ले जाया जाए। गुरुवार को एफसीआई के कांटे से ही गल्ला तौल के बाद आगे बढ़ा।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी गोविंद कुमार उपाध्याय ने कहा कि प्रभारी को कांटा ठीक कराना चाहिए। उसमें सही आकलन नहीं हो रहा है। इसी वजह से कोटेदार इस कांटे की तौल पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। उनसे कहा गया है कि कांटा ठीक करवाएं, उसके बाद ही वहां से तौल की जा सकेगी। तब तक के लिए एफसीआई से ट्रकों की तौल की जा रही है।
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एसडब्ल्यूसी के प्रभारी संतोष राजपूत ने बताया कि बांटॉ-मांप विभाग के अधिकारी अपना 60 किलो का कांटा लेकर आए थे। जब क्रॉस चेक किया गया तो फुटकर तौल में कुछ अंतर था, जबकि कुल तौल में मामूली अंतर आ रहा था। उसको ठीक कराने के लिए कहा गया है। तौल में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं है। विभाग की ओर से जो पंजीकरण किया गया था, उसकी डेट भी अभी है। यहां की और एफसीआई की तौल में 20 किलो का अंतर आ रहा है।
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एक अधिकारी अपने कांटे में मामूली अंतर की खराबी बता रहे हैं तो दूसरे कांटे को ठीक करने के लिए कह रहे हैं। इसी रार के बीच गुरुवार को गल्ला एसडब्ल्यूसी में नहीं तौला गया। ट्रकों को तौल के लिए फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के गोदाम ले जाया गया।
कोटेदारों के यहां पहुंचने से पहले ठेकेदारों का गल्ला उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम (एसडब्ल्यूसी) पहुंचता है। यहां से तौल के बाद आगे की कार्यवाही होती है। कोटेदार एसडब्ल्यूसी के कांटे को लेकर सवाल खड़ा कर रहे थे। बुधवार को नए कांटे से तौल को लेकर मुद्दा उठा तो विवाद में ट्रकों का गल्ला तौला ही नहीं जा सका। 24 घंटे से भी ज्यादा समय तक ट्रक वहीं खड़े रहे। कांटा जब दूसरे दिन भी नहीं बदला गया तो फिर निर्णय लिया गया कि ट्रकों को एफसीआई के कांटे पर ले जाया जाए। गुरुवार को एफसीआई के कांटे से ही गल्ला तौल के बाद आगे बढ़ा।
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जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी गोविंद कुमार उपाध्याय ने कहा कि प्रभारी को कांटा ठीक कराना चाहिए। उसमें सही आकलन नहीं हो रहा है। इसी वजह से कोटेदार इस कांटे की तौल पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। उनसे कहा गया है कि कांटा ठीक करवाएं, उसके बाद ही वहां से तौल की जा सकेगी। तब तक के लिए एफसीआई से ट्रकों की तौल की जा रही है।
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एसडब्ल्यूसी के प्रभारी संतोष राजपूत ने बताया कि बांटॉ-मांप विभाग के अधिकारी अपना 60 किलो का कांटा लेकर आए थे। जब क्रॉस चेक किया गया तो फुटकर तौल में कुछ अंतर था, जबकि कुल तौल में मामूली अंतर आ रहा था। उसको ठीक कराने के लिए कहा गया है। तौल में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं है। विभाग की ओर से जो पंजीकरण किया गया था, उसकी डेट भी अभी है। यहां की और एफसीआई की तौल में 20 किलो का अंतर आ रहा है।