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संस्कृति का संरक्षण जरूरी: राज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो जालौन
Updated Sun, 25 Oct 2015 11:17 PM IST
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उरई(जालौन)। तीन कोस पर बदले पानी, आठ कोस पर बानी इन पक्तियों से देश की संस्कृति की विविधता का आंकलन सहज ही लगाया जा सकता है। जो अपनी संस्कृति को संरक्षित नहीं कर सकता वह देश और समाज आगे नहीं बढ़ा सकता। इसलिए संस्कृति का संरक्षण जरूरी है और यह काम ऐसे आयोजनों से ही संभव है। यह बातें सूबे के राज्यपाल राम नाइक ने उरई के मंडप सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय लोककला महोत्सव के उद्घाटन पर कहीं।
इसके पूर्व शहर के सभागार में तीन दिवसीय राष्ट्रीय लोककला महोत्सव का उद्घाटन रविवार को राज्यपाल राम नाइक ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन से पूर्व उनका बुंदेली संस्कृति के अनुसार द्वारचार कर स्वागत किया गया। इसके बाद लोककलाओं की झलकियां प्रस्तुत की गईं। इसमें बृज नृत्य, दीवारी नृत्य के अलावा विभिन्न प्रांतों के लोक-नृत्यों को प्रस्तुत हुए। संस्कार भारती ध्येय गीत प्रस्तुत किया गया। इसके बाद राज्यपाल राम नाइक ने उपस्थित लोगों को संस्कृति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि हमारे देश के तीज त्योहार उमंग व संस्कारों के परिचायक है। भारतीय संस्कृति विविधता से भरी रही है, इसे पूरे विश्व ने माना है।
राज्यपाल ने संस्कृति के संरक्षण पर भी जोर दिया। लोककला महोत्सव से युवाओं को सीख मिलेगी और संस्कृति के संरक्षण में ऐसे आयोजन कारगर साबित होंगे। इस कार्यक्रम में संस्कृति की जो प्रस्तुतियां दी गई है वह तो टेलर भर है पिक्चर आप लोग अब देखेंगे। उन्होंने सूबे की सरकार पर बिजली के माध्यम से कटाक्ष किया। कहा कि यूपी में जनरेटर न हो तो कोई भी महोत्सव पूरा नहीं हो सकता। वह यूपी का भ्रमण कर रहे हैं, यह लोगों को रास नहीं आ रहा। 14 महीने के कार्यकाल में वह 45 जिलों का भ्रमण कर चुके हैं। यह इसलिए जरूरी है कि विश्व के पांच देशों को छोड़ दिया जाए तो यूपी से बड़ा कोई देश नहीं है, ऐसे प्रदेश की जानकारी होना जरूरी है।
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कार्यक्रम में आए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति अविनाश चंद्र पांडेय ने कहा कि सांस्कृतिक रंगों से बंधे समूह हमें आईना दिखाने का काम करते है। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का काम करते है। संस्कार भारती के संरक्षक योगेंद्र जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। आयोजक मंडल की ओर से अतिथियों को साल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
इसके पहले स्मारिका व कोंच की रामलीला पुस्तक का लोकार्पण राज्यपाल की ओर से किया गया। लोकमंगल के निदेशक अयोध्या प्रसाद गुप्त कुमुद व संस्कार भारती के अध्यक्ष डा. एस.पी बुधौलिया ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान लोकमंगल अध्यक्ष डा. रेनू चंद्रा, मेवालाल गुप्ता, गिरीश चंद्र मिश्र, सांसद भानु प्रताप वर्मा, सदर विधायक दयाशंकर वर्मा, पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी, चौधरी श्याम सुंदर, डा. ममता स्वर्णकार, पालिकाध्यक्ष गिरजा चौधरी, गरिमा पाठक, लक्ष्मण दास बबानी, आशीष सेठ, डा. राकेश द्विवेदी, महेश द्विवेदी सर, इंद्रजीत सिंह यादव, नरसिंग दास गुप्ता, जय शंकर द्विवेदी, युद्वीर कंथरिया, उर्विजा दीक्षित, भाष्कर अवस्थी, अशोक राठौर आदि मौजूद रहे।
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इसके पूर्व शहर के सभागार में तीन दिवसीय राष्ट्रीय लोककला महोत्सव का उद्घाटन रविवार को राज्यपाल राम नाइक ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन से पूर्व उनका बुंदेली संस्कृति के अनुसार द्वारचार कर स्वागत किया गया। इसके बाद लोककलाओं की झलकियां प्रस्तुत की गईं। इसमें बृज नृत्य, दीवारी नृत्य के अलावा विभिन्न प्रांतों के लोक-नृत्यों को प्रस्तुत हुए। संस्कार भारती ध्येय गीत प्रस्तुत किया गया। इसके बाद राज्यपाल राम नाइक ने उपस्थित लोगों को संस्कृति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि हमारे देश के तीज त्योहार उमंग व संस्कारों के परिचायक है। भारतीय संस्कृति विविधता से भरी रही है, इसे पूरे विश्व ने माना है।
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राज्यपाल ने संस्कृति के संरक्षण पर भी जोर दिया। लोककला महोत्सव से युवाओं को सीख मिलेगी और संस्कृति के संरक्षण में ऐसे आयोजन कारगर साबित होंगे। इस कार्यक्रम में संस्कृति की जो प्रस्तुतियां दी गई है वह तो टेलर भर है पिक्चर आप लोग अब देखेंगे। उन्होंने सूबे की सरकार पर बिजली के माध्यम से कटाक्ष किया। कहा कि यूपी में जनरेटर न हो तो कोई भी महोत्सव पूरा नहीं हो सकता। वह यूपी का भ्रमण कर रहे हैं, यह लोगों को रास नहीं आ रहा। 14 महीने के कार्यकाल में वह 45 जिलों का भ्रमण कर चुके हैं। यह इसलिए जरूरी है कि विश्व के पांच देशों को छोड़ दिया जाए तो यूपी से बड़ा कोई देश नहीं है, ऐसे प्रदेश की जानकारी होना जरूरी है।
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कार्यक्रम में आए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति अविनाश चंद्र पांडेय ने कहा कि सांस्कृतिक रंगों से बंधे समूह हमें आईना दिखाने का काम करते है। ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने का काम करते है। संस्कार भारती के संरक्षक योगेंद्र जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। आयोजक मंडल की ओर से अतिथियों को साल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
इसके पहले स्मारिका व कोंच की रामलीला पुस्तक का लोकार्पण राज्यपाल की ओर से किया गया। लोकमंगल के निदेशक अयोध्या प्रसाद गुप्त कुमुद व संस्कार भारती के अध्यक्ष डा. एस.पी बुधौलिया ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान लोकमंगल अध्यक्ष डा. रेनू चंद्रा, मेवालाल गुप्ता, गिरीश चंद्र मिश्र, सांसद भानु प्रताप वर्मा, सदर विधायक दयाशंकर वर्मा, पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी, चौधरी श्याम सुंदर, डा. ममता स्वर्णकार, पालिकाध्यक्ष गिरजा चौधरी, गरिमा पाठक, लक्ष्मण दास बबानी, आशीष सेठ, डा. राकेश द्विवेदी, महेश द्विवेदी सर, इंद्रजीत सिंह यादव, नरसिंग दास गुप्ता, जय शंकर द्विवेदी, युद्वीर कंथरिया, उर्विजा दीक्षित, भाष्कर अवस्थी, अशोक राठौर आदि मौजूद रहे।