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‘भये प्रकट कृपाला दीन दयाला’
अमर उजाला ब्यूरो जालौन
Updated Sun, 11 Oct 2015 12:45 AM IST
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रामलीला महोत्सव में श्रीराम जन्म की लीला का मंचन किया गया। प्रभु श्रीराम का प्राकट्य होते ही समूचा पंडाल ‘भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी’ के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालु खुशी से थिरकने लगे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए।
रामजन्म की लीला के मंचन में दर्शाया गया कि राजा दशरथ को ग्लानि हुई कि उनके उम्र चौथे चरण में भी कोई संतान नहीं हुई। ऐसे में उनका वंश आगे कैसे बढ़ेगा। उन्होंने गुरू वशिष्ठ से अपने मन की व्यथा सुनाई। गुरु की आज्ञानुसार राजा दशरथ ने पुत्र-यज्ञ करवाया।
इसमें अग्निदेव ने हव्य कुंड से प्रकट होकर उन्हें प्रसाद दिया। इसे राजा ने कौशल्या तथा कैकई को आधा-आधा बांट दिया। कौशल्या और कैकई ने अपने-अपने भाग से आधा-आधा प्रसाद सुमित्रा को दे दिया। इससे राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई।
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तदुपरांत नामकरण संस्कार के दौरान उनके नाम क्रमश: राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न रखा गया। जब प्रभु राम का प्राकट्य हुआ तो उनके रूप को देखकर कौशल्या अचंभित हो गईं। उन्होंने प्रभु से विनय की कि इस रूप में दुनिया वाले अगर आप को देखेंगे तो मुझे तरह-तरह के ताने सुनने पड़ेंगे।
राम और कौशल्या के इस संवाद को सुनकर दर्शक भाव विभोर हो गए। राम के सुंदर अभिनय में चंद्रप्रकाश (कानपुर) तथा कौशल्या के रूप में रामशरण शर्मा ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। दशरथ की भूमिका रामभूषण उदैनियां ने निभाई।
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रामजन्म की लीला के मंचन में दर्शाया गया कि राजा दशरथ को ग्लानि हुई कि उनके उम्र चौथे चरण में भी कोई संतान नहीं हुई। ऐसे में उनका वंश आगे कैसे बढ़ेगा। उन्होंने गुरू वशिष्ठ से अपने मन की व्यथा सुनाई। गुरु की आज्ञानुसार राजा दशरथ ने पुत्र-यज्ञ करवाया।
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इसमें अग्निदेव ने हव्य कुंड से प्रकट होकर उन्हें प्रसाद दिया। इसे राजा ने कौशल्या तथा कैकई को आधा-आधा बांट दिया। कौशल्या और कैकई ने अपने-अपने भाग से आधा-आधा प्रसाद सुमित्रा को दे दिया। इससे राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई।
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तदुपरांत नामकरण संस्कार के दौरान उनके नाम क्रमश: राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न रखा गया। जब प्रभु राम का प्राकट्य हुआ तो उनके रूप को देखकर कौशल्या अचंभित हो गईं। उन्होंने प्रभु से विनय की कि इस रूप में दुनिया वाले अगर आप को देखेंगे तो मुझे तरह-तरह के ताने सुनने पड़ेंगे।
राम और कौशल्या के इस संवाद को सुनकर दर्शक भाव विभोर हो गए। राम के सुंदर अभिनय में चंद्रप्रकाश (कानपुर) तथा कौशल्या के रूप में रामशरण शर्मा ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। दशरथ की भूमिका रामभूषण उदैनियां ने निभाई।