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‘डोली भूमि गिरत दसकंधर, छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर’
अमर उजाला ब्यूरो जालौन
Updated Thu, 22 Oct 2015 11:46 PM IST
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गल्ला व्यापारी संघ के तत्वावधान में गल्ला मंडी परिसर में हो रही रामलीला में राम-रावण युद्ध की लीला का मंचन किया गया। ‘डोली भूमि गिरत दसकंधर, छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर’ श्रीराम चरित मानस की चौपाई की गूंज के बीच राम व रावण में घमासान युद्ध हुआ।
युद्ध के दौरान राम ने तीर से दशानन की नाभि के अमृत कुंड पर वार किया गया तो उसी पल रावण जमीन पर गिर पड़ा और उसकेे प्राण पखेरु उड़ गए। आतिशबाजी के बीच रावण के पुतले का दहन हुआ और भगवान राम के जयकारों से पांडाल गूंज उठा।
गल्ला मंडी परिसर में मेघनाथ वध के साथ अन्य लीलाएं हुईं और फिर राम, रावण युद्ध लीला का मंचन किया गया। लंका के सभी राक्षसों का राम, लक्ष्मण से मिलकर संहार कर दिया, तब रावण अपनी सेना लेकर रामादल पर टूट पड़ा था। उस समय उसकी अट्टाहास और वाणों की बौछार से एक समय रामादल में खलबली मचा दी।
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कई वीर योद्धा मूर्छित हो गए। इसी समय विभीषण ने प्रभु राम को रावण मरण की युक्ति सुझाई और फिर देखते ही भगवान राम ने वाणों की बौछार शुरू कर दी। 31 तीर चले, जिसमें 20 ने भुजाओं को, 10 ने शीशों को और 1 वाण रावण की नाभि पर लगा, जिससे उसका अमृत सूख गया और रावण का अंत हो गया।
रावण का अंत होते ही उपस्थित दर्शकों ने भगवान राम की जय जयकार की और उन पर पुष्प वर्षा की। इस मौके पर ब्रजकिशोर राजपूत, संजय कुमार गुप्ता, राजीव महेश्वरी, नरेंद्र यादव, पंकज गुप्ता, सुरेश गुप्ता, संतोष, राजा, पम्मी, संजय रावत, सुभाष, सुरेंद्र मौखरी, प्रदीप महेश्वरी आदि उपस्थित रहे।
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युद्ध के दौरान राम ने तीर से दशानन की नाभि के अमृत कुंड पर वार किया गया तो उसी पल रावण जमीन पर गिर पड़ा और उसकेे प्राण पखेरु उड़ गए। आतिशबाजी के बीच रावण के पुतले का दहन हुआ और भगवान राम के जयकारों से पांडाल गूंज उठा।
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गल्ला मंडी परिसर में मेघनाथ वध के साथ अन्य लीलाएं हुईं और फिर राम, रावण युद्ध लीला का मंचन किया गया। लंका के सभी राक्षसों का राम, लक्ष्मण से मिलकर संहार कर दिया, तब रावण अपनी सेना लेकर रामादल पर टूट पड़ा था। उस समय उसकी अट्टाहास और वाणों की बौछार से एक समय रामादल में खलबली मचा दी।
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कई वीर योद्धा मूर्छित हो गए। इसी समय विभीषण ने प्रभु राम को रावण मरण की युक्ति सुझाई और फिर देखते ही भगवान राम ने वाणों की बौछार शुरू कर दी। 31 तीर चले, जिसमें 20 ने भुजाओं को, 10 ने शीशों को और 1 वाण रावण की नाभि पर लगा, जिससे उसका अमृत सूख गया और रावण का अंत हो गया।
रावण का अंत होते ही उपस्थित दर्शकों ने भगवान राम की जय जयकार की और उन पर पुष्प वर्षा की। इस मौके पर ब्रजकिशोर राजपूत, संजय कुमार गुप्ता, राजीव महेश्वरी, नरेंद्र यादव, पंकज गुप्ता, सुरेश गुप्ता, संतोष, राजा, पम्मी, संजय रावत, सुभाष, सुरेंद्र मौखरी, प्रदीप महेश्वरी आदि उपस्थित रहे।