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रावण का अत्याचार देख प्रकट हुए श्रीराम
अमर उजाला ब्यूरो जालौन
Updated Sat, 10 Oct 2015 12:31 AM IST
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कोंच की सुप्रसिद्ध 163वें रामलीला महोत्सव के दौरान बीती रात्रि रामलीला रंगमंच पर रामजन्म लीला का मनोहारी मंचन किया गया। रावण और उसके भाइयों कुंभकर्ण व विभीषण ने घोर तपस्या कर ब्रह्मïा को प्रसन्न कर लिया और उनसे मनवांछित वरदान प्राप्त किया।
अहंकारी रावण के अत्याचारों से त्रस्त पृथ्वी ने गोवेश में बैकुंठ जाकर भगवान विष्णु से रावण के बढ़ते अधर्म और अत्याचारों के बारे में बताते हुए उसका भार कम करने का निवेदन किया और भगवान विष्णु ने अयोध्या में राजा दशरथ के यहां राम के रूप में अवतार धारण किया।
कोंच के ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव में बीती रात्रि श्रेष्ठ रंगकर्मियों द्वारा राम जन्म लीला का उम्दा मंचन किया गया। प्रस्तुति के मुताबिक रावण अपने अनुजों कुंभकर्ण और विभीषण समेत ब्रह्मा की तपस्या में लीन है, उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मïा उन्हें वरदान देते हैं।
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जिसमें रावण अजेयता और विभीषण वरदान प्राप्त कर लेते हैं ब्रह्मा जी वरदान देकर अंर्तध्यान हो गए। फिर बढ़ता है रावण का पापाचार, अधर्म के चारों ओर पैर पसारने से त्रस्त पृथ्वी गोवेश में बैकुंठ जाकर भगवान विष्णु से प्रार्थना करती है कि उसे रावण के पापाचार से मुक्त करें।
भगवान विष्णु स्वयं राम रूप में और अपने अंशों से भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के रूपों में अयोध्या नरेश दशरथ के यहां प्रकट होते हैं।
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अहंकारी रावण के अत्याचारों से त्रस्त पृथ्वी ने गोवेश में बैकुंठ जाकर भगवान विष्णु से रावण के बढ़ते अधर्म और अत्याचारों के बारे में बताते हुए उसका भार कम करने का निवेदन किया और भगवान विष्णु ने अयोध्या में राजा दशरथ के यहां राम के रूप में अवतार धारण किया।
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कोंच के ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव में बीती रात्रि श्रेष्ठ रंगकर्मियों द्वारा राम जन्म लीला का उम्दा मंचन किया गया। प्रस्तुति के मुताबिक रावण अपने अनुजों कुंभकर्ण और विभीषण समेत ब्रह्मा की तपस्या में लीन है, उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मïा उन्हें वरदान देते हैं।
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जिसमें रावण अजेयता और विभीषण वरदान प्राप्त कर लेते हैं ब्रह्मा जी वरदान देकर अंर्तध्यान हो गए। फिर बढ़ता है रावण का पापाचार, अधर्म के चारों ओर पैर पसारने से त्रस्त पृथ्वी गोवेश में बैकुंठ जाकर भगवान विष्णु से प्रार्थना करती है कि उसे रावण के पापाचार से मुक्त करें।
भगवान विष्णु स्वयं राम रूप में और अपने अंशों से भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के रूपों में अयोध्या नरेश दशरथ के यहां प्रकट होते हैं।