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Jalaun News: नहीं भटकेंगी गर्भवती, मॉडल क्लीनिक में मिलेगा बेहतर इलाज
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उरई। जिला महिला अस्पताल व सीएचसी जालौन में मॉडल क्लीनिक बनेगा।
इस मॉडल क्लीनिक के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को एक साथ पंजीकरण से इलाज और दवा की सुविधा मिलेगी। इसमें उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी यानी एचआरपी) वाली महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें इलाज दिया जाएगा।
बता दें कि गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित और संस्थागत प्रसव के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का आयोजन किया जाता है। इस अभियान के तहत महीने में चार बार यानी पहली, नौ, 16 व 24 तारीख को गर्भवती की जांच की जाती है। जिला महिला अस्पताल में बनने वाले मॉडल क्लीनिक के लिए जगह की जांच के लिए जिला परामर्शदाता मातृत्व स्वास्थ्य रुबी वर्मा, टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (टीएसयू) जिला सीनियर विशेषज्ञ डॉ. अर्पणा यादव पहुंचीं।
उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रभाकर और सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा से मुलाकात की और जगह को लेकर मंथन किया। टीम ने बताया कि मॉडल क्लीनिक के संचालन के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), लायंस क्लब जैसी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
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ओपीडी में पंजीकरण के वक्त ही गर्भवती को बता दिया जाएगा कि उसे मॉडल क्लीनिक में जाना है। मॉडल क्लीनिक में सबसे पहले एमसीपी कार्ड की जांच की जाएगी। यदि गर्भवती महिला का आरसीएच पोर्टल पर पंजीकरण नहीं होगा तो तत्काल उसका पंजीकरण कराया जाएगा। एएनसी रजिस्टर में महिला के बारे में पूरी सूचना अंकित की जाएगी। इसके बाद वहीं पर वजन, ब्लड प्रेशर की जांच के बाद खून और पेशाब के नमूने के सैंपल लेकर लैब भेजे जाएंगे। साथ ही अल्ट्रासाउंड जांच भी की जाएगी। जब तक महिला की जांच रिपोर्ट नहीं आती है, तब तक गर्भवती की परामर्शदाता द्वारा काउंसलिंग की जाएगी। सारी जांच रिपोर्ट के बाद गर्भवती को स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जांच के लिए भेजा जाएगा। चिकित्सक की जांच के बाद, दूसरे कक्ष में गर्भवती को जरूरी दवाओं का वितरण किया जाएगा।
गर्भवती की उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की श्रेणी होने पर गर्भवती के मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड पर लाल रंग से एचआरपी की मोहर लगाई जाएगी। एचआरपी वाली महिलाओं की काउंसलर द्वारा विशेष काउंसलिंग की जाएगी। महिला को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जाएगा। एचआरपी वाली महिला को अगली फॉलोअप विजिट के बारे में बताया जाएगा।
उरई। पहले चरण में जिला महिला अस्पताल व सीएचसी जालौन में मॉडल क्लीनिक का निर्माण किया जाना है। इसके बाद प्रसव केंद्र माधौगढ़, कोंच, कालपी की फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर मॉडल क्लीनिक बनाया जाएगा। इसमें इसी तरह की जांचें और इलाज की व्यवस्था की जाएगी। जिस एफआरयू पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होगी, वहां की गर्भवती महिलाओं की जांच बाउचर देकर निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से निशुल्क कराई जाएगी।
मॉडल क्लीनिक बनाने का उद्देश्य किसी भी गर्भवती का अस्पताल में बिना किसी समस्या के उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। मॉडल क्लीनिक बनने से महिलाओं को लाभ होगा। -डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ, जालौन
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इस मॉडल क्लीनिक के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को एक साथ पंजीकरण से इलाज और दवा की सुविधा मिलेगी। इसमें उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी यानी एचआरपी) वाली महिलाओं को चिह्नित कर उन्हें इलाज दिया जाएगा।
बता दें कि गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित और संस्थागत प्रसव के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का आयोजन किया जाता है। इस अभियान के तहत महीने में चार बार यानी पहली, नौ, 16 व 24 तारीख को गर्भवती की जांच की जाती है। जिला महिला अस्पताल में बनने वाले मॉडल क्लीनिक के लिए जगह की जांच के लिए जिला परामर्शदाता मातृत्व स्वास्थ्य रुबी वर्मा, टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (टीएसयू) जिला सीनियर विशेषज्ञ डॉ. अर्पणा यादव पहुंचीं।
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उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रभाकर और सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा से मुलाकात की और जगह को लेकर मंथन किया। टीम ने बताया कि मॉडल क्लीनिक के संचालन के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), लायंस क्लब जैसी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।
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ओपीडी में पंजीकरण के वक्त ही गर्भवती को बता दिया जाएगा कि उसे मॉडल क्लीनिक में जाना है। मॉडल क्लीनिक में सबसे पहले एमसीपी कार्ड की जांच की जाएगी। यदि गर्भवती महिला का आरसीएच पोर्टल पर पंजीकरण नहीं होगा तो तत्काल उसका पंजीकरण कराया जाएगा। एएनसी रजिस्टर में महिला के बारे में पूरी सूचना अंकित की जाएगी। इसके बाद वहीं पर वजन, ब्लड प्रेशर की जांच के बाद खून और पेशाब के नमूने के सैंपल लेकर लैब भेजे जाएंगे। साथ ही अल्ट्रासाउंड जांच भी की जाएगी। जब तक महिला की जांच रिपोर्ट नहीं आती है, तब तक गर्भवती की परामर्शदाता द्वारा काउंसलिंग की जाएगी। सारी जांच रिपोर्ट के बाद गर्भवती को स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जांच के लिए भेजा जाएगा। चिकित्सक की जांच के बाद, दूसरे कक्ष में गर्भवती को जरूरी दवाओं का वितरण किया जाएगा।
गर्भवती की उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की श्रेणी होने पर गर्भवती के मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड पर लाल रंग से एचआरपी की मोहर लगाई जाएगी। एचआरपी वाली महिलाओं की काउंसलर द्वारा विशेष काउंसलिंग की जाएगी। महिला को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जाएगा। एचआरपी वाली महिला को अगली फॉलोअप विजिट के बारे में बताया जाएगा।
उरई। पहले चरण में जिला महिला अस्पताल व सीएचसी जालौन में मॉडल क्लीनिक का निर्माण किया जाना है। इसके बाद प्रसव केंद्र माधौगढ़, कोंच, कालपी की फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर मॉडल क्लीनिक बनाया जाएगा। इसमें इसी तरह की जांचें और इलाज की व्यवस्था की जाएगी। जिस एफआरयू पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं होगी, वहां की गर्भवती महिलाओं की जांच बाउचर देकर निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों से निशुल्क कराई जाएगी।
मॉडल क्लीनिक बनाने का उद्देश्य किसी भी गर्भवती का अस्पताल में बिना किसी समस्या के उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। मॉडल क्लीनिक बनने से महिलाओं को लाभ होगा। -डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ, जालौन