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बकरियों ने खोल दी पशुपालन विभाग की पोल

Fri, 24 Jun 2016 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उरई
ब्यूरो/अमर उजाला, उरई Updated Fri, 24 Jun 2016 11:35 PM IST
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Polls opened goats Animal Husbandry Department
अधिकारियों को अपनी बात बताती महिला बकरी पालक। - फोटो : अमर उजाला

उरई (जालौन)। बुंदेलखंड पैकेज से खरीदी गई बकरियों ने पशुपालन विभाग की पोल प्रदेश से आई विशेष टीम के सामने खोल दी है। मौके पर टीम को बकरी पालक तो मिले लेकिन एक भी बकरी देखने को नहीं मिली। जब जांच दल के अधिकारी ने जानकारी चाही तो किसी ने कहा कि साहब चरवें गई है छिरिया, तो किसी ने बताया कि पानी पीवे को नदी पे अबे हालई चली गई। कब तक लौटेंगी अब साहब झुलीपरे लौटे है। आखिर में अधिकारी झुझलाते हुए लौट गए। पशुपालन विभाग कोे बुंदेलखंड पैकेज से 9.80 करोड़ का बजट दिया गया था। इसमें से बकरियों की खरीद के अलावा उनके दाना और अन्य सामान में व्यय दर्शाया गया। कोंच ब्लाक क्षेत्र के गांव परेछा में पहले राउंड में 17 यूनिट व दूसरे राउंड में पांच यूनिट खरीद कर वितरित किए गए। गांव के 22 लोंगो को बकरी पालन का मौका दिया गया।

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इसमें बड़े स्तर पर उस समय के अधिकारियों ने घालमेल किया। गांव के जिन लोगों के पास बकरियां थी। उनकी बकरियां ही दिखा दी गई। कुछ की खरीद की गई थी। अच्छी नस्ल की बकरियां और बकरे देने का प्रावधान था लेकिन जो बकरियां दी गई उसमें से कई तो तुरंत ही मर गई थी तो कई देखने में भी स्वस्थ नहीं लग रही थी। कुल मिलाकर बकरी के नाम पर खेल किया गया। आज जब जांच टीम गांव पहुंची तो हकीकत सामने आ गई। एक भी पशुपालक बकरियां नहीं दिखा सका। अधिकारियों ने पूछा तो सबका एक ही बहाना था साहब चरवे में बीहड़ को और पानी पीवे को नदिया पे ले गए है। इस पर अधिकारी झुंझला उठे। आखिर में बकरी पालकों से बात की गई तो कई ऐसी बातें सामने आ गई जिसने बकरी पालन के नाम पर खर्च बजट में घालमेल की आशंका है। गांव की लाली देवी को एक यूनिट में एक बकरी कम दी गई। इसके अलावा कई लोगों की बकरियां मर गई उन्हें अब तक बीमा क्लेम नहीं मिल पाया। इस पर मौजूद अधिकारी भी बगले झांकते नजर आए। देखना यह है कि जांच दल जो रिपोर्ट शासन को सौंपेगा उस पर क्या कार्रवाई होगी?
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साहब मरी छिरिया के बदले में कछू नई मिलो
परेछा गांव निवासी लड़ैती देवी को बकरी पालन योजना में शामिल किया गया था। एक यूनिट मतलब पांच बकरियां और एक बकरा उसे दिया गया था। इसके बाद उसकी दो बकरियां मर गई जिसका क्लेम उसे नहीं मिला। आज जब अधिकारियों ने उससे पूछा तो उसका कहना था कि साहब दो छिरिया मर गई लेकिन बदले में कछू नई मिलो। कान अधिकारी ले गए ते।
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तीन मरी एकऊ नई मिली
परेछा गांव निवासी शांति देवी ने भी अधिकारियों को बताया कि उसकी तीन थिरिया मर गई लेकिन एकऊ नई मिली। अधिकारियन को खबर दे दई थी और बीमा को छल्ला व कान अधिकारी ले गए फिर लौट के नई आए। पूरी साल बीत गई।


तीन हजार रुपया लगे ते
गांव की ममता देवी भी बुंदेलखंड पैकेज से बकरी पालन के लिए चयनित हुई थी। ममता ने बताया कि उससे तीन हजार रुपया लिए गए थे तब योजना को लाभ मिल था। एक बकरी उसकी भी मर गई है लेकिन अभी तक बीमा कंपनी से कोई लाभ नहीं मिला।

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