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Jalaun News: किसान से धोखाधड़ी करने में एक को पांच साल की सजा
Fri, 28 Feb 2025 11:00 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Fri, 28 Feb 2025 11:00 PM IST
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उरई। किसान से धोखाधड़ी के मामले में न्यायाधीश ने दोषी को पांच साल की सजा सुनाई। उस पर पचास हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
सिरसाकलार थाना क्षेत्र के मघापुर निवासी गुलाब सिंह ने थाने में 22 दिसंबर 2020 को तहरीर देकर बताया था कि समरथ सिंह ग्राम जखा उसके घर आए और बताया कि मौजा जखा में खेत बिकाऊ है। उसने जगन्नाथ नाम के एक व्यक्ति को खेत मालिक बताकर मिलवाया। उसने विश्वास कर तीन लाख 80 हजार में खरीदने की हामी भर दी।
15 अक्तूबर 2020 को सब रजिस्टर कार्यालय में बैनामा हुआ। तीन लाख 80 हजार की चेक जगन्नाथ नाम के युवक को दी। जगन्नाथ ने बैंक खाता न होने की बात कहकर चेक वापस कर दी गई। इसके बाद उसके बेटे ने बैंक से तीन लाख 80 हजार रुपये निकालकर जगन्नाथ को दे दिए।
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तीन चार दिन बाद वह जखा स्थित खेत पर पहुंचा तब लोगों ने बताया कि जगन्नाथ की काफी समय पहले मृत्यु हो चुकी है। इस पर उसने समरथ से पूछा तब पता चला कि वह जगन्नाथ नहीं बल्कि वेदप्रकाश निवासी जखा है। जिसने जगन्नाथ बनकर बैनामा किया है।
पुलिस ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में वेदप्रकाश व समरथ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस ने विवेचना में समरथ का नाम हटाकर कोर्ट में वेदप्रकाश के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सीजेएम कोर्ट में चले ट्रायल के बाद गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने वेदप्रकाश को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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सिरसाकलार थाना क्षेत्र के मघापुर निवासी गुलाब सिंह ने थाने में 22 दिसंबर 2020 को तहरीर देकर बताया था कि समरथ सिंह ग्राम जखा उसके घर आए और बताया कि मौजा जखा में खेत बिकाऊ है। उसने जगन्नाथ नाम के एक व्यक्ति को खेत मालिक बताकर मिलवाया। उसने विश्वास कर तीन लाख 80 हजार में खरीदने की हामी भर दी।
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15 अक्तूबर 2020 को सब रजिस्टर कार्यालय में बैनामा हुआ। तीन लाख 80 हजार की चेक जगन्नाथ नाम के युवक को दी। जगन्नाथ ने बैंक खाता न होने की बात कहकर चेक वापस कर दी गई। इसके बाद उसके बेटे ने बैंक से तीन लाख 80 हजार रुपये निकालकर जगन्नाथ को दे दिए।
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तीन चार दिन बाद वह जखा स्थित खेत पर पहुंचा तब लोगों ने बताया कि जगन्नाथ की काफी समय पहले मृत्यु हो चुकी है। इस पर उसने समरथ से पूछा तब पता चला कि वह जगन्नाथ नहीं बल्कि वेदप्रकाश निवासी जखा है। जिसने जगन्नाथ बनकर बैनामा किया है।
पुलिस ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में वेदप्रकाश व समरथ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस ने विवेचना में समरथ का नाम हटाकर कोर्ट में वेदप्रकाश के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सीजेएम कोर्ट में चले ट्रायल के बाद गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने वेदप्रकाश को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।