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Jalaun News: 37 की जगह 93 पात्र दिखाकर भूमि अधिग्रहण का मुआवजा डकार गए अफसर

Wed, 23 Jul 2025 02:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jul 2025 02:05 AM IST
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Officials pocketed the compensation for land acquisition by showing 93 eligible persons instead of 37
उरई। कालपी के एनएच-27 फोरलेन परियोजना में मुआवजे के नाम पर करोड़ों रुपयों का खेल सामने आया है। आरोप है कि 18 साल बाद भी 37 पात्रों को भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा नहीं मिला है। मुआवजे के लिए शासन से भेजी गई करीब 78 करोड़ रुपये की राशि की बंदरबांट कर दी गई। इस मामले की शिकायत सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी से की है। उन्होंने मामले की जांच करके दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, वर्तमान एसडीएम भी मान रहे हैं कि मामले की जांच की जा रही है।
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सांसद चंद्रशेखर आजाद को पत्र भेजकर न्याय की गुहार कालपी के इंदिरा नगर निवासी नरेंद्र कुमार गौतम ने की है। चंद्रशेखर ने सीएम योगी को 21 जुलाई को पत्र लिखा है। उन्होंने मुआवजा वितरण में हुई गड़बड़ी की सीबीआई/एसआईटी से जांच कराने की मांग की है। भूमाफिया और संबंधित राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की है। वास्तविक प्रभावितों को यथाशीघ्र मुआवजा देने और प्रकरण का सार्वजनिक ऑडिट करने की भी बात कही है।
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गौतम ने बताया कि कालपी में एनएच-27 फोरलेन परियोजना सन 2007 में शुरू हुई। इसमें उनकी भी जमीन गई है, जिसका मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने साल 2018 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। इस आदेश के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कहा कि शासन द्वारा 21 जनवरी 2019 को 78,42,81,764.23 रुपये की राशि मुआवजा के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को भेजी गई है। गौतम का आरोप है कि शासन से साढ़े छह साल पहले भेजी गई मुआवजे की राशि की बंदरबांट हो गई है। प्रशासनिक अधिकारियों, दलाल और 93 फर्जी पात्रों ने राशि हड़प ली है।
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नरेंद्र गौतम का कहना है कि उनका घर एमसी इंटर कॉलेज कालपी के सामने था। उनके चारों भाई इस अधिग्रहण से प्रभावित हुए। उन्हें करीब 1.25 करोड़ रुपये मुआवजा मिलना था, लेकिन आज तक एक पैसा नहीं मिला है। बताया कि कई बार डीएम, एडीएम, मुख्यमंत्री, राज्य व केंद्र के मंत्रियों और एनएचएआई तक शिकायतें की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। जब एनएचएआई को दोबारा शिकायत की तो जवाब आया कि आपका पैसा एडीएम को भेज दिया गया है। अब वह अपने स्तर से भुगतान करेंगे, लेकिन एडीएम की तरफ से अभी तक कोई पहल नहीं हुई है।
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फर्जी सूची से हुआ करोड़ों का घोटाला
नरेंद्र गौतम ने बताया कि 37 वास्तविक लाभार्थी थे, लेकिन अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से सूची में 93 लोगों के नाम जोड़े गए। इनमें कई लोग फर्जी हैं, इसके सबूत मेरे पास हैं। आरोप लगाया कि कालपी का ही एक दलाल, जो पहले कई अपराधों में जेल जा चुका है, इस घोटाले को अंजाम दिया है। इसमें कई अधिकारियों ने करोड़ों रुपये लिए हैं। जो लोग अपात्र थे, उनको लाभार्थी दिखाकर 20-30 प्रतिशत पैसा दिया गया, बाकी अधिकारियों ने ले लिया।


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कई अपात्र कालपी के नहीं
नरेंद्र गौतम ने बताया कि आलमपुर के पास स्थित जंगल, जोकि नजूल भूमि (सरकारी जमीन) है, जहां कोई बसावट नहीं है, वहां पर लोगों को निवासी दर्शाकर मुआवजा दिया गया है, जबकि हाईवे के किनारे बसे घनी आबादी वाले इलाके, जो सीधे प्रभावित हुए, उन्हें मुआवजा ही नहीं दिया गया। बताया कि जब सूचना के अधिकार के तहत लाभार्थियों की सूची मांगी तो जो नाम सामने आए उन्हें देखकर चौक गया। सूची में कई नाम ऐसे हैं जो कालपी के निवासी ही नहीं हैं।
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प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी। जो उचित होगा किया जाएगा।
- संजय कुमार, एडीएम

फोटो 6- कालपी से निकला ओवरब्रिज। संवाद

फोटो 7- जानकारी देते शिकायतकर्ता। संवाद

फोटो 22 सीएम को भेजा गया चंद्रशेखर का शिकायती पत्र। संवाद
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