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Jalaun News: जागे अधिकारी, दो जिलों को जोड़ने वाली पाल घाट सड़क बनी
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सिरसा कलार। डेढ़ किलोमीटर तक सिम्हारा चौराहा से पाल घाट तक उखड़ी सड़क से हो रही परेशानी को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। खबर प्रकाशित होने के बाद जागे अफसरों ने सड़क को दुरुस्त करा दिया। स्थानीय लोगों ने अमर उजाला के प्रयासों की सराहना की है।
सिम्हारा चौराहा से पाल घाट तक की पांच किलोमीटर लंबी सड़क का 10 वर्षों से 1.5 किलोमीटर का हिस्सा खराब हालत में था, जिससे क्षेत्र के लोगों को दिक्कतें हो रही थीं। अमर उजाला ने छह नवंबर को इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने 20 लाख रुपये की लागत से सड़क का निर्माण कार्य पूरा करा दिया। इस सड़क के बनने से जालौन जिले के उरई और सिम्हारा, सिमरा शेखपुर, न्यामतपुर, हिम्मतपुर, अभैदेपुर, सिकन्ना समेत 50 गांवों के लोगों को अब कानपुर, राजपुर और अन्य शहरों तक सीधे पहुंचने में सुविधा होगी। पहले खराब सड़क के कारण भारी लोड वाले वाहन नहीं जा पाते थे, और ग्रामीणों को अतिरिक्त 25 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता था। अब यह दूरी घटकर 85 किलोमीटर रह गई है।
ग्रामीणों वीरंद्र, हरीराम, मोहन, और चरण सिंह ने बताया कि अब वे अपनी फसलें जैसे मटर, टमाटर, मिर्च और अन्य सब्जियां आसानी से कानपुर और अन्य बाजारों में बेच सकेंगे। पीडब्ल्यूडी के एई अंचल वर्मा ने बताया कि खराब सड़क होने की जानकारी आने पर इसका निर्माण करवा दिया गया है।
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ग्रामीणों ने जताया आभार
ग्रामीण रामपाल ने बताया कि डेढ़ किलोमीटर की सड़क को पार करने में आधा घंटा लग जाता था। इससे बचने के लिए 20 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। अब सड़क बनने से राहत मिली है। अमर उजाला ने कई बार मुद्दा उठाया है।
ग्रामीण बल्लू ने बताया कि इस सड़क पर कई हादसे हो चुके हैं। इन हादसों से राहत मिलेगी। छोटे वाहन तो बड़ी मुश्किल से इस मार्ग से गुजरते थे। अब ये रास्ता आसान हो गया है।
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सिम्हारा चौराहा से पाल घाट तक की पांच किलोमीटर लंबी सड़क का 10 वर्षों से 1.5 किलोमीटर का हिस्सा खराब हालत में था, जिससे क्षेत्र के लोगों को दिक्कतें हो रही थीं। अमर उजाला ने छह नवंबर को इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने 20 लाख रुपये की लागत से सड़क का निर्माण कार्य पूरा करा दिया। इस सड़क के बनने से जालौन जिले के उरई और सिम्हारा, सिमरा शेखपुर, न्यामतपुर, हिम्मतपुर, अभैदेपुर, सिकन्ना समेत 50 गांवों के लोगों को अब कानपुर, राजपुर और अन्य शहरों तक सीधे पहुंचने में सुविधा होगी। पहले खराब सड़क के कारण भारी लोड वाले वाहन नहीं जा पाते थे, और ग्रामीणों को अतिरिक्त 25 किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता था। अब यह दूरी घटकर 85 किलोमीटर रह गई है।
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ग्रामीणों वीरंद्र, हरीराम, मोहन, और चरण सिंह ने बताया कि अब वे अपनी फसलें जैसे मटर, टमाटर, मिर्च और अन्य सब्जियां आसानी से कानपुर और अन्य बाजारों में बेच सकेंगे। पीडब्ल्यूडी के एई अंचल वर्मा ने बताया कि खराब सड़क होने की जानकारी आने पर इसका निर्माण करवा दिया गया है।
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ग्रामीणों ने जताया आभार
ग्रामीण रामपाल ने बताया कि डेढ़ किलोमीटर की सड़क को पार करने में आधा घंटा लग जाता था। इससे बचने के लिए 20 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। अब सड़क बनने से राहत मिली है। अमर उजाला ने कई बार मुद्दा उठाया है।
ग्रामीण बल्लू ने बताया कि इस सड़क पर कई हादसे हो चुके हैं। इन हादसों से राहत मिलेगी। छोटे वाहन तो बड़ी मुश्किल से इस मार्ग से गुजरते थे। अब ये रास्ता आसान हो गया है।