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अब कुओं का पानी पहुंचेगा घर-घर
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Wed, 27 Apr 2016 11:09 PM IST
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सेसा गांव का कुआ जिसे प्रशासन ने माना रोल माडल।
- फोटो : अमर उजाला
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सूखा झेल रहे जिले में खारे पानी, सूख चुके हैंडपंपों और बंद हुई पेयजल परियोजनाओं ने प्रशासन को चिंता में डाल दिया है। ऐसे में पेयजल समस्या को दूर करना प्रशासन के लिए चुनौती साबित हो रहा है। इस बीच अस्तित्व खो चुके कुएं अब उम्मीद की किरण बने हैं। जिला प्रशासन ऐसे गांव चिह्नित कर रहा है जहां पर कुओं का पानी पीने योग्य है और
वर्तमान में उपयोगी नहीं है। इन कुओं से गांव की हर गली में पानी की आपूर्ति करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए जिले के डकोर ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत काबिलपुरा का मजरा सेसा रोल माडल बनकर सामने आया है। तत्कालीन ग्राम प्रधान ने गांव में वर्ष 2014 में प्रयोग किया था जो लाखों के बजट से कारगर साबित हुआ था। उसी को आधार
बनाकर प्रशासन ने अब तैयारी शुरू कर दी है। सूखे जनपद में पानी का संकट गहराता जा रहा है। जिला प्रशासन पेयजल आपूर्ति के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है लेकिन कार्य धरातल पर नहीं उतर पा रहे है। मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि पानी को लेकर शासन गंभीर है। गांव में पानी की समस्या न हो इसके लिए ऐसे गांव चिह्नित किए
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जा रहे हैं जहां हैंडपंप खराब हैं, गांव के अधिकांश जल स्रोत खारा पानी देते हैं। वहां पर अगर कोई ऐसे कुएं हैं जिनका पानी पीने योग्य है लेकिन वे दुर्दशा का शिकार हैं, उन्हें योजना
में शामिल कर उसका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इन कुओं का पानी गांव की गलियों में पाइप लाइनों के जरिये पहुंचाने की भी योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए सेसा गांव में तत्कालीन प्रधान अनिल कुमार की सोच से तैयार हुई परियोजना रोल माडल बनी है।
इस तरह होगी पानी सप्लाई की व्यवस्था
सेसा गांव की तर्ज पर ही कुओं का सुंदरीकरण कराया जाएगा और फिर सबमर्सिबल लगाकर पूरे गांव में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। गांव में जगह-जगह जरूरत के मुताबिक स्टैंड पोस्ट बनाए जाएंगे। स्टैंड पोस्ट में दो टोटी लगवाई जाएंगी जिससे एक से कुएं के पानी की सीधी सप्लाई से जोड़ा जाएगा और दूसरी को टंकी से। इससे गांव में हर समय पानी की उपलब्धता रहेगी और किसी को दूर तक पानी भरने भी नहीं जाना पड़ेगा।
दिखाया गया था आइना
सेसा गांव की कुआं पेयजल परियोजना को अमर उजाला ने 24 अप्रैल 2015 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि कम लागत में किस तरीके से एक गांव की पानी की समस्या दूर हो गई और 40 परिवारों का संकट दूर हो गया। आसपास के इलाके में भी योजना पर काम हो जाए तो पानी संकट दूर हो जाएगा। उस समय प्रशासन को सूखे का अंदाजा नहीं था लिहाजा सेसा गांव की परियोजना को गंभीरता से नहीं लिया।
याद आई प्रधान की तरकीब
पूर्व प्रधान अनिल कुमार निरंजन की तरकीब पर अगर प्रशासन पहले ही चेत जाता तो जिले के कई गांवों में पानी की संकट ही खड़ा नहीं होता। प्रधान ने वर्ष 2014-15 में जिला प्रशासन के समक्ष कुआं का माडल बनाकर प्रस्तुत किया था। जिला प्रशासन ने जल निगम के इंजीनियरों से उस समय स्टीमेट तैयार कराया तो 8.88 लाख का खर्च बना। इसे प्रधान
ने नकार दिया। इसके बाद जिला प्रशासन से अनुमति लेकर काम किया तो पूरी योजना 3.70 लाख रुपये में तैयार हो गई। गांव के लोगों की प्यास बुझनी लगी। तत्कालीन सीडीओ शंभू कुमार ने इस प्रयोग को खूब सराहा भी लेकिन इसके बाद प्रशासन ने उस माडल का प्रयोग किसी दूसरे गांव में करना जरूरी नहीं समझा।
जिस गांव में खारे पानी और खराब हैंडपंप की वजह से जल संकट खड़ा हो सकता है वहां पर कुएं का पानी गली-गली में पहुंचाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। कुएं से पाइप लाइन के जरिए स्टैंड पोस्ट बनाकर सप्लाई देने की व्यवस्था पर काम किया जाना है। पानी का संकट किसी गांव में खड़ा नहीं होने दिया जाएगा।- एसपी सिंह, सीडीओ जालौन
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वर्तमान में उपयोगी नहीं है। इन कुओं से गांव की हर गली में पानी की आपूर्ति करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए जिले के डकोर ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत काबिलपुरा का मजरा सेसा रोल माडल बनकर सामने आया है। तत्कालीन ग्राम प्रधान ने गांव में वर्ष 2014 में प्रयोग किया था जो लाखों के बजट से कारगर साबित हुआ था। उसी को आधार
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बनाकर प्रशासन ने अब तैयारी शुरू कर दी है। सूखे जनपद में पानी का संकट गहराता जा रहा है। जिला प्रशासन पेयजल आपूर्ति के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है लेकिन कार्य धरातल पर नहीं उतर पा रहे है। मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि पानी को लेकर शासन गंभीर है। गांव में पानी की समस्या न हो इसके लिए ऐसे गांव चिह्नित किए
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जा रहे हैं जहां हैंडपंप खराब हैं, गांव के अधिकांश जल स्रोत खारा पानी देते हैं। वहां पर अगर कोई ऐसे कुएं हैं जिनका पानी पीने योग्य है लेकिन वे दुर्दशा का शिकार हैं, उन्हें योजना
में शामिल कर उसका जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इन कुओं का पानी गांव की गलियों में पाइप लाइनों के जरिये पहुंचाने की भी योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए सेसा गांव में तत्कालीन प्रधान अनिल कुमार की सोच से तैयार हुई परियोजना रोल माडल बनी है।
इस तरह होगी पानी सप्लाई की व्यवस्था
सेसा गांव की तर्ज पर ही कुओं का सुंदरीकरण कराया जाएगा और फिर सबमर्सिबल लगाकर पूरे गांव में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। गांव में जगह-जगह जरूरत के मुताबिक स्टैंड पोस्ट बनाए जाएंगे। स्टैंड पोस्ट में दो टोटी लगवाई जाएंगी जिससे एक से कुएं के पानी की सीधी सप्लाई से जोड़ा जाएगा और दूसरी को टंकी से। इससे गांव में हर समय पानी की उपलब्धता रहेगी और किसी को दूर तक पानी भरने भी नहीं जाना पड़ेगा।
दिखाया गया था आइना
सेसा गांव की कुआं पेयजल परियोजना को अमर उजाला ने 24 अप्रैल 2015 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसमें बताया गया था कि कम लागत में किस तरीके से एक गांव की पानी की समस्या दूर हो गई और 40 परिवारों का संकट दूर हो गया। आसपास के इलाके में भी योजना पर काम हो जाए तो पानी संकट दूर हो जाएगा। उस समय प्रशासन को सूखे का अंदाजा नहीं था लिहाजा सेसा गांव की परियोजना को गंभीरता से नहीं लिया।
याद आई प्रधान की तरकीब
पूर्व प्रधान अनिल कुमार निरंजन की तरकीब पर अगर प्रशासन पहले ही चेत जाता तो जिले के कई गांवों में पानी की संकट ही खड़ा नहीं होता। प्रधान ने वर्ष 2014-15 में जिला प्रशासन के समक्ष कुआं का माडल बनाकर प्रस्तुत किया था। जिला प्रशासन ने जल निगम के इंजीनियरों से उस समय स्टीमेट तैयार कराया तो 8.88 लाख का खर्च बना। इसे प्रधान
ने नकार दिया। इसके बाद जिला प्रशासन से अनुमति लेकर काम किया तो पूरी योजना 3.70 लाख रुपये में तैयार हो गई। गांव के लोगों की प्यास बुझनी लगी। तत्कालीन सीडीओ शंभू कुमार ने इस प्रयोग को खूब सराहा भी लेकिन इसके बाद प्रशासन ने उस माडल का प्रयोग किसी दूसरे गांव में करना जरूरी नहीं समझा।
जिस गांव में खारे पानी और खराब हैंडपंप की वजह से जल संकट खड़ा हो सकता है वहां पर कुएं का पानी गली-गली में पहुंचाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। कुएं से पाइप लाइन के जरिए स्टैंड पोस्ट बनाकर सप्लाई देने की व्यवस्था पर काम किया जाना है। पानी का संकट किसी गांव में खड़ा नहीं होने दिया जाएगा।- एसपी सिंह, सीडीओ जालौन