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Jalaun News: 300 से ज्यादा गांवों की बिजली गुल, पानी बंद और संचार ठप

Mon, 01 Jun 2026 12:32 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 12:32 AM IST
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More than 300 villages have lost power, water and communication.
फोटो - 17 कालपी रोड पर जाम लगाए लोग। संवाद
उरई/कोंच/जालौन। बृहस्पतिवार रात आए भीषण आंधी-तूफान और बारिश के चार दिन बाद भी जिले की बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। 300 से अधिक गांवों की अभी भी बिजली गुल है। सबमर्सिबल और ट्यूबवेल बंद पड़े हैं। ग्रामीणों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। मोबाइल फोन चार्ज करने तक के लिए लोग कस्बों और बाजारों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं लोगों का गुस्सा भी फूट रहा है।
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आंधी में जिले भर में 800 से अधिक बिजली के पोल, लगभग 35 ट्रांसफार्मर और बड़ी संख्या में विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई स्थानों पर विशाल पेड़ गिरने से लाइनें टूट गईं और ट्रांसमिशन नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है। विभाग की टीमें लगातार मरम्मत में जुटी हैं, लेकिन नुकसान का दायरा इतना बड़ा है कि बहाली कार्य अपेक्षा से अधिक समय ले रहा है।
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सबसे गंभीर स्थिति डकोर, आटा, कोंच और जालौन क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बनी हुई है। कई गांवों में ग्रामीण चंदा करके जेनरेटर मंगाकर ट्यूबवेल चला रहे हैं, जबकि कुछ लोग ड्रम और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
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आटा क्षेत्र में 45 बिजली पोल गिर जाने से दर्जनों गांवों की आपूर्ति ठप हो गई। 60 घंटे बाद भी अधिकांश गांवों में बिजली नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। कई लोगों को मोबाइल चार्ज कराने के लिए 20 से 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है। बिजली संकट का असर बच्चों की पढ़ाई, छोटे कारोबार और रोजमर्रा के कामकाज पर भी पड़ रहा है।



कोंच व कदौरा के असूपुरा, सजेहरा, नजीरपुर, उदनपुर समेत कई गांवों में चार दिन बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। असूपुरा के ग्रामीण ट्रांसफार्मर बदलवाने की मांग लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होने से पेयजल संकट गहरा गया है, मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और गोशालाओं में भी परेशानी खड़ी हो गई है।

कारोबार पर पड़ रहा असर

बिजली संकट का असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम और डेयरी उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों का सामान खराब होने की कगार पर पहुंच गया है। कई ढाबा संचालकों को प्रतिदिन हजारों रुपये खर्च कर जेनरेटर चलाने पड़ रहे हैं।

ट्यूबवेल बंद होने से सिंचाई प्रभावित

ट्यूबवेल बंद होने से किसानों की सिंचाई प्रभावित हो रही है और खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं हैं। कई स्वास्थ्य केंद्रों और सरकारी कार्यालयों में जनरेटर के सहारे काम चलाया जा रहा है।
लोगों का फूटा गुस्सा, सड़क जाम की

उरई। बिजली संकट को लेकर लोगों का गुस्सा भी सामने आने लगा है। उरई के कालपी रोड पर शनिवार रात स्थानीय लोगों ने जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि दो दिन से अधिक समय तक बिजली न मिलने से इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं और पानी का भी संकट खड़ा हो गया है। पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद जाम खुलवाया गया तथा बाद में इलाके की आपूर्ति बहाल की गई। (संवाद)


वर्जन

जहां कम नुकसान हुआ था, वहां बिजली आपूर्ति शुरू करा दी गई है, जबकि गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में पोल, ट्रांसफार्मर और लाइनें बदलने का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। जल्द आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

- जितेंद्र नाथ, अधिशासी अभियंता

जालौन के 21 गांवों में बिजली गुल
जालौन। बृहस्पतिवार रात आई तेज आंधी और बारिश से क्षतिग्रस्त हुई बिजली व्यवस्था तीन दिन बाद भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। आंधी में करीब 100 बिजली पोल और बड़ी संख्या में तार क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे नगर क्षेत्र सहित 56 गांवों की विद्युत आपूर्ति ठप हो गई थी। टीमों ने लगातार मरम्मत कार्य करते हुए अब तक 35 गांवों की आपूर्ति बहाल कर दी है, लेकिन 21 गांवों में रविवार तक भी बिजली नहीं पहुंच सकी। जेई नवीन कंजोलिया ने बताया कि क्षतिग्रस्त पोल और तार बदलने का काम तेजी से चल रहा है। सोमवार शाम तक शेष गांवों की आपूर्ति भी सामान्य होने की उम्मीद है। (संवाद)




कदौरा में ग्रामीणों ने बिजली घर घेरा
कदौरा। बिजली आपूर्ति बहाल न होने पर शनिवार रात ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने परौसा बिजलीघर का घेराव कर देर रात तक हंगामा किया। ग्रामीणों के अनुसार उदनपुर फीडर से जुड़े सजेहरा, नजीरपुर, कुसमरा, खुटमिली, जैसकपुर, उदनपुर समेत कई गांवों में बिजली आपूर्ति ठप थी। आरोप है कि दोपहर एक बजे तक परौसा बिजलीघर में 33 केवी लाइन से सप्लाई पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद भी फीडर की लाइन दुरुस्त करने कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। रात करीब नौ बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण बिजलीघर पहुंच गए। आरोप है कि बिजलीघर के कर्मचारी अंदर से गेट बंद कर बैठे रहे। एक लाइनमैन पर धमकाने का आरोप भी लोगों ने लगाया। जेई ने मरम्मत कराने की बात कही, पर पूरी रात बिजली बहाल नहीं हो सकी। इससे करीब आठ गांवों की लगभग 20 हजार आबादी भीषण गर्मी में अंधेरे और परेशानी झेलने को मजबूर रही। जेई मिठाईलाल ने बताया कि टीमें बड़ी लाइनों को दुरुस्त करने में लगी थीं, जिसके कारण उदनपुर फीडर की मरम्मत में देरी हुई। (संवाद)

फोटो - 17 कालपी रोड पर जाम लगाए लोग। संवाद

फोटो - 17 कालपी रोड पर जाम लगाए लोग। संवाद

फोटो - 17 कालपी रोड पर जाम लगाए लोग। संवाद

फोटो - 17 कालपी रोड पर जाम लगाए लोग। संवाद

फोटो - 17 कालपी रोड पर जाम लगाए लोग। संवाद

फोटो - 17 कालपी रोड पर जाम लगाए लोग। संवाद

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