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Jalaun News: गोशालाओं में गोबर के धन का गोलमाल
Sat, 11 Mar 2023 12:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sat, 11 Mar 2023 12:13 AM IST
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कदौरा। कदौरा ब्लॉक की गोशालाओं में हर माह लाखों रुपये का गोबर बेचकर गोलमाल किया जा रहा है। प्रत्येक गोशाला से रोजाना एक ट्राली गोबर करीब 1500 रुपये में बेच जाता है। यह रुपये ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं कराए गए हैं। कदौरा ब्लाक क्षेत्र में 47 स्थाई और अस्थाई गोशालाएं हैं। ऐसे में प्रतिमाह लाखों रुपये का गोबर बेचा जा रहा है।
ब्लॉक क्षेत्र में करोड़ों रुपये के बजट से गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। गोशाला के रखरखाव की जिम्मेदारी प्रधान और सचिवों को सौंपी गई है। सरकार एक पशु के लिए 62 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बजट जारी करती है। इससे पशुओं का चारा, उनका रखरखाव, केयर टेकरों का मानदेय आदि शामिल है। नियमानुसार गोशाला से गोबर बेचकर धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा करानी चाहिए, लेकिन यहां गोबर किसानों को बेचा जा रहा है। इसका उपयोग किसान अपने खेतों में खाद और वर्मी कंपोस्ट आदि के लिए कर रहे हैं। गोशालाओं से गोबर की एक ट्राली की कीमत 1500 से 1700 रुपये होती है। ब्लॉक क्षेत्र में 47 गोशाला में 5500 से गोवंश हैं। ब्लॉक के अधिकारियों से लेकर पशुपालन और जिले के अधिकारियों को भी पता नहीं है कि गोबर का पैसा कहां जा रहा है। तीन वर्ष पूर्व गोशालाओं की स्थापना से यह काम हो रहा है। इस दौरान बेचे गए गोबर का कोई हिसाब नहीं है। प्रभारी बीडीओ अजय गुप्ता ने कहा कि गोशाला से यदि गोबर बेचकर पैसा ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं कराया जा रहा है तो मामला गंभीर है। मामले की जांच कराएंगे। गोबर का पैसा सिर्फ गोशाला में खर्च किया जाना चाहिए। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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ब्लॉक क्षेत्र में करोड़ों रुपये के बजट से गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। गोशाला के रखरखाव की जिम्मेदारी प्रधान और सचिवों को सौंपी गई है। सरकार एक पशु के लिए 62 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बजट जारी करती है। इससे पशुओं का चारा, उनका रखरखाव, केयर टेकरों का मानदेय आदि शामिल है। नियमानुसार गोशाला से गोबर बेचकर धनराशि ग्राम पंचायत के खाते में जमा करानी चाहिए, लेकिन यहां गोबर किसानों को बेचा जा रहा है। इसका उपयोग किसान अपने खेतों में खाद और वर्मी कंपोस्ट आदि के लिए कर रहे हैं। गोशालाओं से गोबर की एक ट्राली की कीमत 1500 से 1700 रुपये होती है। ब्लॉक क्षेत्र में 47 गोशाला में 5500 से गोवंश हैं। ब्लॉक के अधिकारियों से लेकर पशुपालन और जिले के अधिकारियों को भी पता नहीं है कि गोबर का पैसा कहां जा रहा है। तीन वर्ष पूर्व गोशालाओं की स्थापना से यह काम हो रहा है। इस दौरान बेचे गए गोबर का कोई हिसाब नहीं है। प्रभारी बीडीओ अजय गुप्ता ने कहा कि गोशाला से यदि गोबर बेचकर पैसा ग्राम पंचायत के खाते में जमा नहीं कराया जा रहा है तो मामला गंभीर है। मामले की जांच कराएंगे। गोबर का पैसा सिर्फ गोशाला में खर्च किया जाना चाहिए। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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